UP चुनाव में भी लोकसभा चुनाव वाली रणनीति! ऐसे क्या फॉर्मूल है, जिसपर अखिलेश यादव फिर खेलने जा रहे बड़ा दावं?
सपा का सबसे ज्यादा ध्यान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर है। साल 2012 के बाद से बसपा के कमजोर होने के बाद जो दलित वोटर छिटक गए हैं, सपा उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है। इसके अलावा, यह रणनीति दलित युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भी बनाई गई है
असम में हिमंता कैबिनेट का बड़ा फैसला, 18 वर्ष से अधिक उम्र वालों का अब नहीं बनेगा आधार कार्ड; ये है वजह
Assam News: असम में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने फैसला किया है कि अब असम में 18 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को नया आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा. इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अवैध विदेशी नागरिक भारत के इस सबसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र को हासिल न कर सके. मुख्यमंत्री ने शनिवार को इस कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए साफ किया कि घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार हर संभव कड़े कदम उठा रही है.
विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी मंजूरी
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि यह रोक पूरी तरह लागू रहेगी, लेकिन अगर किसी विशेष परिस्थिति में किसी वयस्क को आधार कार्ड की जरूरत होती है, तो उसके लिए एक अलग प्रक्रिया तय की गई है. ऐसे मामलों में संबंधित जिले के डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर को राज्य सरकार के पास एक विशेष प्रस्ताव भेजना होगा. इस प्रस्ताव की पूरी जांच करने के बाद राज्य सरकार खुद यह तय करेगी कि आवेदक आधार कार्ड पाने के योग्य है या नहीं. सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद ही विशेष मामलों में आधार कार्ड जारी किया जा सकेगा.
आबादी से ज्यादा बन गए आधार कार्ड
राज्य में आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया के सैचुरेशन पॉइंट यानी अंतिम सीमा तक पहुंचने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने रखे. उन्होंने कहा कि असम के कुछ जिलों में आधार कार्ड धारकों का आंकड़ा कुल अनुमानित आबादी से भी 100 प्रतिशत को पार कर चुका है. मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को अब यह पता लगाना होगा कि ये कौन लोग हैं जो अतिरिक्त आधार कार्ड बनवा रहे हैं. यही वजह है कि सरकार ने अब वयस्कों के नए आधार कार्ड बनाने पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो.
चाय बागान और जनजातीय समुदायों को अस्थाई राहत
सरकार ने इस नियम में कुछ खास वर्गों को फिलहाल छूट दी है. चाय बागान समुदाय, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और दिव्यांग लोगों को नया आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया अभी चलती रहेगी. सरकार का कहना है कि इन समुदायों के कई गरीब और पिछड़े लोगों के पास अभी तक अपना आधार कार्ड नहीं पहुंच पाया है. इसलिए मानवीय आधार पर इन्हें छूट दी गई है. हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि यह छूट भी हमेशा के लिए नहीं रहने वाली है.
साल 2027 से पूरी तरह बंद हो जाएगी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने समय सीमा तय करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इन आरक्षित समुदायों के लिए भी यह छूट अस्थाई है. 1 अप्रैल, 2027 से इस पूरी प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी. उस तय तारीख के बाद इन विशेष समुदायों के 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी नया आधार कार्ड मिलना बंद हो जाएगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड बनाने का काम पहले की तरह ही सामान्य रूप से चलता रहेगा, क्योंकि बच्चों के मामले में सुरक्षा का खतरा वयस्कों जितना नहीं है.
नियमों को पहले से ही सख्त करने की थी तैयारी
हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले भी कई मौकों पर कहा था कि उनकी सरकार आधार कार्ड जारी करने के मामले में बहुत सख्त रुख अपनाएगी. असम में अब यह दस्तावेज हासिल करना किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए आसान नहीं रहने वाला है. पिछले साल भी उन्होंने संकेत दिए थे कि बांग्लादेश से होने वाले अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए असम सरकार वयस्कों के लिए आधार कार्ड जारी करने के नियमों को बहुत ज्यादा कड़ा करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद कानूनी रूप से लागू कर दिया गया है.
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