राम मंदिर दान घोटाला: हिरासत में चढ़ावा गिनने वाला कर्मी, जांच के लिए SIT घटित, 15 दिन में देगी रिपोर्ट
Ram Mandir donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावे में हेराफेरी को लेकर हाल ही में दान विवाद सामने आया है। अब मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। कार्रवाई करते हुए चढ़ावा गिरने वाला कर्मचारी हिरासत में लिया गया है। साथ ही जांच के लिए सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। 15 दिनों के भीतर कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गबन के मामले की जांच तेज कर दी गई है। SOG ने एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। एजेंसियां CCTV फुटेज, बरामद नकदी और तकनीकी सबूतों के जरिए मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। इस बीच यूपी सरकार ने केस की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT का गठन कर दिया है। मामला अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ाए गए दान में वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
सपा नेताओं ने दावा किया था कि मंदिर के चढ़ावे और दान पेटी से ₹5 करोड़ से लेकर ₹7.5 करोड़ तक की राशि में हेराफेरी हुई है। पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज ने भी प्रबंधन पर पारदर्शिता न रखने के आरोप लगाए। मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले में पारदर्शिता की मांग की और कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही बीजेपी के स्थानीय नेता डॉ. रजनीश सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई या ईडी से जांच की मांग की थी।
IAS बने SIT के अध्यक्ष और दो सदस्य
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर यूपी सरकार ने SIT का गठन कर दिया है। साथ ही सरकार ने SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। लखनऊ के कमीश्नर विजय विश्वास पंत को SIT का अध्यक्ष बनाया गया है। IPS किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन एसआईटी के सदस्य होंगे। साथ ही मामले के बीच में राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमिटी के चेयरपर्सन नृपेंद्र मिश्रा भी शनिवार को अयोध्या पहुंचे। मिश्रा ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की।
कौन है आरोपी लवकुश?
मामले में चढ़ावा गिरने वाला लवकुश मिश्र आरोपी है। जानकारी के अनुसार, वह अयोध्या जिले के रुदौली के शुजागंज क्षेत्र के मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है। पुलिस ने इसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस जानने की कोशिश कर रही है कि दानपात्रों में जमा राशि की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में उसकी क्या भूमिका थी। बताया गया कि लवकुश के घर से 10 लाख रुपए कैश मिला है। लवकुश ने इस रकम को गोबर में छिपाया गया था।
पीएमओ ने भी लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी ट्रस्ट से रिपोर्ट तलब की है। इसके जवाब में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि दान का नियमित ऑडिट होता है।
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जांच की रडार में और भी कर्मचारी
जांच एजेंसियों के मुताबिक राम मंदिर के दान-पात्रों में जमा चढ़ावे की गिनती से जुड़े कई कर्मचारी भी रडार पर हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले को पूरी तरह समझने के लिए सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। इसलिए चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल हो रही है।
अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप से निपटने में भारत निभाएगा अहम भूमिका, तेज कर रहा वैक्सीन उत्पादन की प्रक्रिया: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य अफ्रीका में जारी इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है, क्योंकि भारत का सीरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) वायरस के बंडिबुग्यो स्ट्रेन को निशाना बनाने वाली वैक्सीन के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
मॉडर्न डिप्लोमेसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (सीईपीआई) के सहयोग से की जा रही है। इस परियोजना को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) का भी समर्थन प्राप्त है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चाडऑक्स1 बीडीबीवी नाम की यह वैक्सीन बंडिबुग्यो इबोलावायरस से सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की जा रही है। यह वायरस का अपेक्षाकृत दुर्लभ स्ट्रेन है, जो वर्तमान में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा के कुछ हिस्सों में फैल रहे प्रकोप से जुड़ा हुआ है।
इबोला के ज्यादा चर्चित जैरे स्ट्रेन के विपरीत, बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि इस वैक्सीन का विकास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह वैक्सीन उसी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है जिसका इस्तेमाल ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन में किया गया था। इससे क्लीनिकल परीक्षण के लिए आवश्यक डोज तैयार होने के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां इबोला के मौजूदा प्रकोप को नियंत्रित करने और इसके और अधिक फैलाव को रोकने के प्रयासों में जुटी हैं। इसी के तहत डब्ल्यूएचओ ने इस वैक्सीन उम्मीदवार के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 650 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने हाल ही में कहा था कि बंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन मौजूदा महामारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है और भविष्य में होने वाले प्रकोपों के लिए तैयारियों को भी मजबूत बनाएगी।
अफ्रीका सीडीसी के महानिदेशक जीन कासेया ने भी पुष्टि की है कि इस वैक्सीन का निर्माण भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया जाएगा।
इस बीच, भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों और हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन की व्यवस्था भी की गई है।
विशेषज्ञों ने इबोला के प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में वर्णित किया है, और सरकारें और वैक्सीन निर्माता अपनी तैयारियों को मजबूत करने और वैक्सीन विकास की प्रक्रिया में तेजी लाने की होड़ में लगे हुए हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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