उत्तर प्रदेश में कैसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड, योगी सरकार ने लोगों से की ये खास अपील
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है. अब उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चला रही है. इसी क्रम में राज्यभर में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि पात्र लोग आसानी से योजना से जुड़ सकें और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ प्राप्त कर सकें.
15 मई से 14 अगस्त तक चलेगा विशेष अभियान
Ayushman Card Scheme: देशभर में आयुष्मान कार्ड बनवाकर लोग इस योजना के जरिए मुफ्त इलाज करवा रहे हैं. ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ मिले इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अहम कदम उठाए जा रहे हैं. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जानकारी दी है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत 15 मई 2026 से 14 अगस्त 2026 तक विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य उन पात्र परिवारों तक पहुंचना है, जिनका अभी तक आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया है.
सरकार की ओर से जिले, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लाभार्थी अपना पंजीकरण कराकर आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं.
क्या है आयुष्मान भारत योजना?
आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है. योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है.
इस योजना से लाखों परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सहायता मिल रही है और स्वास्थ्य संबंधी खर्च का बोझ काफी कम हुआ है.
बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत
इस अभियान में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी बुजुर्ग आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं.
इसके लिए उन्हें अपने नजदीकी स्वास्थ्य शिविर या पंजीकरण केंद्र पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहुंचना होगा. कार्ड बनने के बाद बुजुर्गों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता मिलेगी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी.
गांव-गांव लगाए जा रहे स्वास्थ्य शिविर
राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है. इन शिविरों में पात्र लाभार्थियों की पहचान की जा रही है और मौके पर ही उनका पंजीकरण कर आयुष्मान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाएं और अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ें.
पात्र लोगों से आगे आने की अपील
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार चाहती है कि योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उनके परिवार में कोई सदस्य आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र है, तो वह जल्द से जल्द अपना कार्ड बनवाए.
उन्होंने कहा कि समय पर आयुष्मान कार्ड बन जाने से जरूरत पड़ने पर इलाज के लिए आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.
कैसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड?
आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए पात्र व्यक्ति अपने नजदीकी स्वास्थ्य शिविर, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या निर्धारित पंजीकरण केंद्र पर जा सकते हैं. वहां आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन के बाद कार्ड जारी किया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इस विशेष अभियान से लाखों नए लाभार्थी योजना से जुड़ेंगे और गरीब तथा जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच मिलेगा.
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सेबी ने भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया: स्पेसएक्स शेयरों पर विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ और कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शेनॉय ने हाल ही में हुए स्पेसएक्स आईपीओ में शेयर पाने वाले निवेशकों पर अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी फिडेलिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की ओर ध्यान दिलाया है और इस व्यवस्था की तुलना भारत के नियामकीय ढांचे से की है।
फिडेलिटी की नीति के तहत, जिन निवेशकों को स्पेसएक्स आईपीओ में शेयर आवंटित हुए हैं, यदि वे शेयरों की लिस्टिंग के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर उन्हें बेच देते हैं, जिसे फ्लिपिंग कहा जाता है, तो उन्हें भविष्य में फिडेलिटी के माध्यम से आईपीओ आवंटन पाने का अधिकार खोना पड़ सकता है।
इस नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए नितिन कामथ ने भारत के पूंजी बाजार और बाजार नियामक सेबी तथा स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा लागू सुरक्षा उपायों की सराहना की।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, निश्चित रूप से अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह देखकर हैरानी होती है कि सेबी और एक्सचेंजों की वजह से भारतीय बाजार अमेरिका की तुलना में कितने अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हैं।
कामथ ने यह भी कहा कि केवल फिडेलिटी ही ऐसी शर्तें लागू नहीं करती, बल्कि अमेरिका की अन्य बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में भी इसी तरह के प्रतिबंध देखने को मिलते हैं।
कैपिटलमाइंड के संस्थापक और पोर्टफोलियो प्रबंधक दीपक शेनॉय ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि भारत के नियामकीय ढांचे में ऐसी शर्तों को सही ठहराना मुश्किल होगा।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, यह कानूनी कैसे हो सकता है? सोचिए, कोई ब्रोकर आपसे कहे कि आईपीओ में मिले शेयरों को आप पहले 15 दिनों तक बेच नहीं सकते। भारत में सेबी ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर देगी।
ब्रोकरेज कंपनी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पहली बार नियम तोड़ने पर निवेशक को छह महीने तक नए इक्विटी ऑफर में भाग लेने से रोका जा सकता है। दूसरी बार उल्लंघन करने पर एक साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जबकि तीसरी बार ऐसा करने पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सकती है।
फिडेलिटी ने निवेशकों को भेजे अपने संदेश में कहा, आईपीओ की लिस्टिंग के बाद 16वें कैलेंडर दिन से निवेशक अपने शेयर बेच सकते हैं और उन्हें फ्लिपर नहीं माना जाएगा।
गौरतलब है कि शुक्रवार को नैस्डैक में लिस्टिंग के दौरान स्पेसएक्स के शेयरों में 19 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिससे यह अमेरिका की छठी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। इसी के साथ एलन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (एक ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति वाले व्यक्ति) बन गए।
--आईएएनएस
डीबीपी
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