हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय और कर्मफल देवता माना जाता है। शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और अन्य कई धार्मिक ग्रंथों में शनि देव को न्यायाधीश का पद मिलने की कथा का उल्लेख है। शास्त्रों के मुताबिक ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को शनिदेव का जन्म हुआ था। इस कारण हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाती है। वहीं शनिवार का दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी अधिक माना जा रहा है। तो आइए जानते इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार 16 मई की सुबह 05:11 मिनट से ज्येष्ठ माह के अमावस्या तिथि की शुरूआत होगी। वहीं 17 मई की रात 01:30 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाएगी।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। फिर सूर्योदय से पहले पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें और पीपल पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद शनिदेव को उड़द दाल, काले तिल, नीले फूल और तेल आदि अर्पित करें। अगर घर के पास शनि मंदिर है तो वहां पर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें और चाहें तो घर के मंदिर में भी बैठ सकते हैं। अब रुद्राक्ष की माला से शनि देव के मंत्रों का जाप करें।
मंत्र
ओम शं शनैश्चराय नमः
ओम शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
ओम नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
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हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सबसे अहम और बड़ा व्रत माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत किया जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत किया जाएगा। इस बार 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है। मान्यता के मुताबिक इस दिन माता सावित्री ने अपने सतीत्व और दृढ़ संकल्प के चलते यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तब से वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
वट सावित्री व्रत 2026
हिंदू पंचांग के मुताबिक वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस बार 16 मई 2026 की सुबह 05:12 मिनट पर अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। वहीं 16 मई की रात 01:31 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत किया जाएगा।
शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद वट वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है। वट वृक्ष की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। वट सावित्री व्रत करने वाली महिलाएं सुबह 10:26 मिनट तक सौभाग्य योग में पूजा कर सकती हैं। इस दिन शनि अमावस्या भी है। ऐसे में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने का भी यह एक उत्तम दिन माना जाता है।
महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव तीनों देवताओं का वास माना जाता है। इसको अक्षय वट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और जीवन में सुख-शांति के लिए व्रत करती हैं। वहीं सत्यवान और सावित्री की कथा सुनती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करना चाहिए।
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