अमेरिकी कोर्ट से अडाणी का केस खारिज:2 साल पहले दर्ज हुआ था; भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने, अमेरिकी निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप थे
अमेरिकी अदालत ने सोमवार को गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहा रिश्वत और धोखाधड़ी का केस खारिज कर दिया। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने केस खत्म करने की अमेरिकी न्याय विभाग की मांग मंजूर कर ली। गौतम अडाणी पर 2024 में भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताने का आरोप लगा था। यह भी कहा गया कि रिश्वत के जरिए अडाणी ग्रुप की एक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट का ठेका दिलाने की कोशिश की गई। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया था। अदालत का फैसला आने के बाद गौतम अडाणी ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, 'मैं न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं।' अडाणी ने समझौते की जानकारी से इनकार किया मामला भारत में रिश्वत और सोलर पावर के ठेके से जुड़ा था, लेकिन इसमें अमेरिकी निवेशकों का पैसा भी लगा था। अडाणी ग्रीन एनर्जी ने सितंबर 2021 में 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे। इनमें करीब 17.5 करोड़ डॉलर अमेरिकी निवेशकों ने लगाए थे। अमेरिकी जांच के मुताबिक, कंपनी ने इन निवेशकों को यह पूरी जानकारी नहीं दी कि रिश्वत से जुड़े क्या जोखिम है और उन्हें रोकने के लिए कंपनी ने क्या इंतजाम किए हैं। यानी निवेशकों को कंपनी से जुड़ी कुछ अहम जानकारी नहीं दी गई। यही वजह है कि मामला सिर्फ भारत में कथित रिश्वत देने तक सीमित नहीं रहा। इसमें अमेरिकी निवेशकों का पैसा भी जुड़ गया और अमेरिका में धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए गए। अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारियों को कथित रिश्वत देने की योजना बनाई गई, निवेशकों को सही जानकारी नहीं दी गई और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी की गई। इसके अलावा, अमेरिकी सिक्योरिटी और एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी निवेशकों को गलत या अधूरी जानकारी देने के आरोप में अमेरिकी एक्सचेंज कानूनों के तहत कार्रवाई की। न्याय विभाग पहले ही केस बंद करने को कह चुका 18 मई को अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, केस को कानूनी तौर पर खत्म करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी थी। इसलिए अंतिम फैसला जज को करना था। मामला भारत का, लेकिन अमेरिका में केस कैसे बना? रिश्वत देने की कथित योजना और सोलर पावर का ठेका भारत से जुड़ा था। लेकिन इस मामले में अमेरिकी निवेशकों का पैसा भी लगा था। अडाणी ग्रीन एनर्जी ने सितंबर 2021 में 75 करोड़ डॉलर का बॉन्ड जारी किया था। इसमें करीब 17.5 करोड़ डॉलर अमेरिकी निवेशकों से मिले थे। अमेरिकी जांच के मुताबिक, निवेशकों को कंपनी की रिश्वत रोकने की व्यवस्था और इससे जुड़े जोखिमों के बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अमेरिकी निवेशकों और वहां के पैसों से जुड़े लेनदेन तक पहुंच गया और अमेरिका में भी धोखाधड़ी के आरोप लगे। अमेरिकी अभियोजकों ने इस मामले में विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने, निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी करने से जुड़े अमेरिकी कानूनों के तहत आरोप लगाए। वहीं, अमेरिकी सिक्योरिटी और एक्सचेंज कमीशन ने भी निवेशकों को गलत जानकारी देने से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की। 16 की उम्र में स्कूल छोड़कर खड़ा किया साम्राज्य गौतम अडाणी ने 1988 में गुजरात में महज 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने के बाद कमोडिटी ट्रेडिंग के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। पिछले कुछ दशकों में उन्होंने अपने ग्रुप का विस्तार पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, माइनिंग, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में किया। आज अडाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्यों में से एक है। अमेरिकी केस खत्म होने की खबर ग्रुप के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी जीत मानी जा रही है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… डाबर ने FSSAI पर भेदभाव का आरोप लगाया:कहा- कॉम्पिटिटर्स को फायदा पहुंचा रही; बैन से ₹150 करोड़ के माल पर संकट था एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। पूरी खबर भी पढ़ें…
फंदे पर झूला पति, बेटा बनाता रहा VIDEO; गुरुग्राम में शख्स की मौत बनी गुत्थी
गुरुग्राम में एक कंपनी के कर्मचारी की संदिग्ध मौत हो गई। उसका शव फंदे से लटका मिला। शख्स के परिवार ने पत्नी पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने पत्नी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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