बच्चों में दस्त की समस्या को न करें नजरअंदाज, सही देखभाल और उपचार से टल सकता है बड़ा खतरा
नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। दस्त बच्चों में होने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो समय पर ध्यान न दिए जाने पर उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि दस्त की रोकथाम और उपचार को लेकर जागरूक रहें और बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाएं।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) लोगों से इस समस्या को नजरअंदाज न करने की अपील करते हुए बताता है कि दस्त के कारण बच्चों के शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इससे कमजोरी, निर्जलीकरण और कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए दस्त को हल्के में लेने के बजाय समय रहते उचित उपचार और देखभाल करना बेहद जरूरी है।
एनएचएम ने बताया कि दस्त से बचाव के लिए तीन महत्वपूर्ण उपायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पहला, छह माह तक के शिशुओं को केवल मां का दूध दिया जाए। स्तनपान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और उन्हें कई प्रकार के संक्रमणों से बचाने में मदद करता है।
दूसरा, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। साफ-सफाई अपनाने से संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। बच्चों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना, हाथों की नियमित सफाई और सुरक्षित पेयजल का उपयोग दस्त की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही रोटावायरस और खसरा जैसे रोगों के खिलाफ समय पर टीकाकरण भी आवश्यक है। टीकाकरण बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है और उनके स्वस्थ विकास में सहायक होता है।
तीसरा, यदि बच्चे को दस्त हो जाए तो तत्काल उपचार शुरू किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, दस्त के दौरान बच्चे को हर बार ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी और लवणों की कमी पूरी हो सके। इसके अलावा, चिकित्सीय सलाह के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की गोली देना भी लाभकारी माना जाता है। जिंक दस्त की अवधि और उसकी गंभीरता को कम करने में मदद करता है।
एनएचएम ने बताया कि स्वच्छता, स्तनपान और नियमित टीकाकरण स्वस्थ बचपन की मजबूत नींव हैं। यदि अभिभावक इन उपायों को अपनाएं और दस्त होने पर समय पर उपचार कराएं, तो बच्चों को इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रखा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर देखभाल ही बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
--आईएएनएस
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Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट से रीको को मिली राहत, जोधपुर में औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) को राहत देते हुए जोधपुर के बोरानाडा इंडस्ट्रियल एरिया के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण को कानूनी रूप से वैध बता दिया है. कोर्ट के इस बेहद अहम फैसले से लंबे समय से बीच मझदार में अटकी औद्योगिक विकास योजनाओं को अब नई गति मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है. साथ ही, इलाके में निवेश करने, उद्योगों को विस्तार मिलने और इससे प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के भी ए अवसर भी पैदा होंगे.
कोर्ट ने क्या कहा?
एक्टिंग चीफ जज संजीव प्रकाश शर्मा और जज चंद्रशेखर शर्मा की डिविजन बेंच ने भजनलाल सरकार और RIICO द्वारा दायर विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया हैं. बता दें कि 8 सितंबर 2017 को सिंगल बेंच द्वारा दिए गए निर्णय को अब कैंसिल कर दिया गया है. एकल पीठ ने 33 याचिकाओं को स्वीकार करते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को रद्द कर दिया था, जिससे परियोजना पर रोक लग गई थी. ये रोक लंबे समय से अटकी हुई थी.
हर पहलू से हुई जांच-पड़ताल
कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा है कि Land Acquisition अधिकारी ने जमीन के मालिकों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर विधिसम्मत तरीके से विचार किया था. कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने और सुनवाई करने का पूरा अवसर दिया गया था. ऐसे में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी खामी नहीं पाई गई है. इस आधार पर ही कोर्ट ने पुराने फैसले को निरस्त किया.
अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में ज्युडिशियल रिव्यू का दायरा सीमित रहता है और यह मुख्य रूप से निर्णय लेने की प्रक्रिया की वैधता तक ही सीमित रहता है. कोर्ट के अनुसार, सिंगल बेंच ने तकनीकी आधारों पर जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया था, जिसे जोधपुर कोर्ट की बेंच ने उचित नहीं माना.
1700 बीघा भूमि पर शुरू होगा विकास कार्य
हाईकोर्ट के नए फैसले के बाद RIICO अब लगभग 1700 बीघा भूमि पर विकास कार्य को आराम से शुरू कर सकेगा, जो यथास्थिति आदेश के कारण सालों से उपयोग में नहीं लाई जा सकी थी. यह जमीनें बोरानाडा के विकसित औद्योगिक क्षेत्रों के पास स्थित है और इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
शुरू होंगे कई नए औद्योगिक क्षेत्र
बोरानाडा इलाका पहले से ही वेस्ट राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है. यहां बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्र, एग्रो फूड पार्क, एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क (EPIP) समेत कई इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स का विकास हो चुका हैं. इन इलाकों में फिलहाल करीब 1500 औद्योगिक इकाइयां संचालित है, जो हजारों लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रही है.
राइजिंग राजस्थान के तहत शुरू हुए प्रोजेक्ट
रीको ने हाल के कुछ सालों में इस इलाके में मेडिकल डिवाइस पार्क, हैंडीक्राफ्ट और फर्नीचर पार्क तथा सामान्य श्रेणी की इंडस्ट्रियल यूनिट्स के लिए नए औद्योगिक क्षेत्रों का भी विकास किया है. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'राइजिंग राजस्थान' पहल के तहत इन प्रोजेक्ट्स को निवेशकों का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है और कई नई निवेश योजनाएं भी सामने आई हैं.
हाईकोर्ट की मंजूरी ने दिलाई राहत की सांस
अब हाईकोर्ट से कानूनी मंजूरी मिलने के बाद बाकी बची 1700 बीघा जमीन पर भी नए उद्योगों की स्थापना हो पाएगी. इससे इस इलाके में बड़े पैमाने पर इंवेस्टमेंट अट्रैक्शन होगा. सलाहकारों का मानना है कि नई इंडस्ट्रियों के आने से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है.
जल्द शुरू होगी भूमि आवंटन प्रक्रिया
रीको के अनुसार, भूमि पर आधारभूत सुविधाओं का विकास कार्य जल्द शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के आवंटन की प्रक्रिया भी जल्द चालु होगी, जिससे निवेशकों को शीघ्र अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे.
हाईकोर्ट का यह फैसला जोधपुर को पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला है. इससे न सिर्फ औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास भी होगा.
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