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Explainer: स्टार्स के फैन क्लब्स कैसे चलते हैं? फैंस और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट के बीच क्या होता है कनेक्शन, समझिए पूरा सिस्टम
Bollywood Star Fan Clubs: बॉलीवुड में किसी भी बड़े स्टार की फिल्म रिलीज होने से कई दिन पहले से उसको लेकर माहौल बनना शुरू हो जाता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उस स्टार का नाम और फिल्म ट्रेंड करने लगता है, थिएटर के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर और कटआउट नजर आने लगते हैं, फैंस ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंच जाते हैं और कई जगहों पर पहला शो भी साथ में देखा जाता है. यह सब देखकर ऐसा लगता है कि हजारों लोग अपने स्टार के लिए अपने लेवल पर यह सब कर रहे हैं. काफी हद तक यह बात सही होती है, क्योंकि फैन क्लबों में स्टार के लिए बहुत जुनून होता है. लेकिन बड़े फैन क्लब अब सिर्फ व्हाट्सऐप ग्रुप नहीं रह गया है. कई क्लबों का बाकायदा संगठन, सोशल मीडिया टीम और अलग-अलग शहरों में एडमिन काम करता है. शाहरुख खान के फैन क्लबों पर हुई एक अकादमिक स्टडी भी बताती है कि डिजिटल फैन कम्युनिटी स्टार की इमेज और फिल्मों के प्रमोशन में अहम भूमिका निभाती है.
फैन क्लब क्या है और चलता कैसे है?
सबसे पहले यह समझते हैं कि आखिर यह फैन क्लब होता है क्या है. आपको बता दें कि फैन क्लब ऐसे लोगों का ग्रुप होता है जो किसी खास एक्टर या एक्ट्रेस को पसंद करते हैं और उसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन एक्टिविटी करते हैं. सोशल मीडिया के आने के बाद इन क्लबों का काम काफी ज्यादा हो गया है. अब फैन क्लब के मेंबर्स किसी एक शहर में बैठे कुछ फैंस ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के हजारों फैंस ऑनलाइन कम्युनिटी का हिस्सा बन सकते हैं.
मसलन, शाहरुख खान के फैन क्लब SRK Universe को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि इसके मेंबर्स भारत के कई शहरों और विदेशों में भी मौजूद हैं. क्लब में शहर और राज्य के लेवल पर एडमिन की सिस्टम है और इसकी अपनी सोशल मीडिया टीम और डिजाइनर भी होते हैं. यानी बड़े फैन क्लबों में काम बंटा हुआ हो सकता है और हर मेंबर के पास अपनी जिम्मेंदारी होती है.
फिल्म का ट्रेलर जब आता है तब एक टीम उसे शेयर करती है, कोई पोस्टर बनाता है, कोई एक्स या इंस्टाग्राम पर हैशटैग चलता है. इसके अलावा और वह और भी फैंस को जोड़ते हैं. इसी वजह से रिलीज के समय किसी स्टार के नाम को लेकर चर्चा बढ़ जाती है. हालांकि हर ट्रेंड या वायरल पोस्ट को सेलिब्रिटी की टीम से जुड़ा हुआ मानना सही नहीं होगा. कई बार यह पूरी तरह फैंस की खुशी से भी करते हैं.
फैन क्लब का खर्च चलता कैसे है?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि हर फैन क्लब की फंडिंग तरीका एक जैसा नहीं होता. इसी एक बात के आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि सभी क्लबों को स्टार की टीम या किसी पीआर एजेंसी से पैसा मिलता है. कई फैन क्लब अपने मेंबर्स के सहयोग से एक्टिविटी करते हैं. मेंबर्स अपने बजट के हिसाब से पैसे जमा कर सकते हैं और उसी से बर्थडे सेलिब्रेशन, पोस्टर, केक, चैरिटी या फिल्म देखाने के इवेंट आयोजित कर सकते हैं. कुछ क्लब अपने सदस्यों के लिए टी-शर्ट, कैप या दूसरे मर्चेंडाइज भी बनाते हैं. वहीं कुछ फैन क्लबों का खर्च चलाने वाले एडमिन खुद अपनी जेब से लगाते हैं.
इसका एक उदाहरण शाहरुख खान के फैन क्लबों से मिलता है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने SRK Universe के फाउंडर के हवाले से लिखा था कि क्लब अलग-अलग शहरों में फिल्म का पहला शो बुक करता था और टी-शर्ट व दूसरे फैन एक्टिवेशन पर पैसे खर्च करते हैं. यानी फैन एक्टिविटी के पीछे सिर्फ किसी बाहरी फंडिंग को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है.
क्या स्टार की टीम और फैन क्लब कोई कनेक्शन होता है?
हां, कई मामलों में कनेक्शन होता है. यही वह हिस्सा है जो इस पूरे सिस्टम को दिलचस्प बनाता है. बड़े फैन क्लबों के एडमिन कई बार स्टार की टीम के कनेक्शन में रहते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि स्टार की टीम हर पोस्ट लिखती है या हर फैन क्लब स्टार का नाम ट्रेंड करने के लिए पैसे देते हैं.
SRK Universe के मामले में इंडियन एक्सप्रेस ने उसके को-फाउंडर के हवाले से बताया था कि फैन क्लब के स्टार की टीम के कनेक्शन में रहते हैं और शाहरुख खान उनके काम को जानते और तारीफ करते हैं. फिल्म प्रमोशन में भी फैन कम्युनिटी का यूज नया नहीं है. उदाहरण के लिए, 2015 में यशराज फिल्म्स ने अपनी फिल्म ‘Fan’ के प्रमोशन के दौरान SRK Universe को सीधे अपने कैंपेन से जोड़ा था. इससे समझ आता है कि जब किसी स्टार का फैन क्लब बड़ा और एक्टिव हो जाता है, तो फिल्म की मार्केटिंग टीम के लिए वह एक फायदेमंद होता है.
फिल्म रिलीज के समय फैन क्लब एक्टिव क्यों होता है?
फिल्म रिलीज से पहले फैन क्लब की एक्टिविटी अचानक बढ़ जाती हैं क्योंकि उस समय स्टार और फिल्म दोनों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना जरूरी होता है. ट्रेलर, गाना या पोस्टर आने पर फैंस उसे सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, रिएक्शन देते हैं और अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट से चर्चा करते हैं.
कुछ बड़े क्लब रिलीज के पहले दिन ही फिल्म देखने पहुंचते हैं. इससे थिएटर के बाहर का माहौल भी बनता है. ढोल-नगाड़े, पोस्टर, केक काटना और स्टार के नाम के नारे सोशल मीडिया पर वीडियो के रूप में पहुंचते हैं. लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए. फैन क्लब का खुद टिकट खरीदकर फिल्म देखना और किसी प्रोडक्शन कंपनी की ओर से लोगों को पैसे देकर भीड़ जुटाना एक ही बात नहीं है. इंडस्ट्री में पेड क्राउड या 'फैन एंगेजमेंट' जैसी एक्टिविटी की रिपोर्टिंग भी हुई है, जहां मार्केटिंग टीमों से जुड़ी एजेंसियां भीड़ जुटाती है. लेकिन ये फॉर्मूला हर फैन क्लब पर लागू करना सही नहीं होगा.
स्टार्स को फैन क्लब से फायदा क्या मिलता है?
सीधा फायदा है ऑर्गेनिक रीज और मजबूत फैन कम्युनिटी बनती है. किसी फिल्म का ऑफिशियल पोस्ट एक बार स्टार के अकाउंट से आता है, लेकिन फैन क्लब उसे अलग-अलग अकाउंट से बड़ी मात्रा में शेयर करते हैं. इससे एक ही कंटेंट कई लोगों तक पहुंच सकता है. इसके अलावा फैन क्लब सिर्फ फिल्म प्रमोशन तक लिमिटेड नहीं रहते. कई क्लब बर्थडे सेलिब्रेशन, चैरिटी, ब्लड डोनेशन और दूसरे सोशल एक्टिविटी भी करते हैं. Team Shah Rukh Khan की वेबसाइट पर भी फिल्म स्क्रीनिंग, चैरिटी और सोशल-अवेयरनेस एक्टिविटी का जिक्र है. साथ ही, क्लब ने खुद साफ किया है कि वह शाहरुख खान या उनकी कंपनी से सीधा कोई कनेक्शन नहीं रखते हैं. इससे समझा जा सकता है कि किसी स्टार का बड़ा फैन क्लब होना और उसका ऑफिशियल तौर पर स्टार की टीम की ओर से चलाया जाना दो अलग बातें हैं. स्टार के लिए इसका एक और फायदा है कि उसे अपने फैंस से सीधे जुड़ने का मौका मिलता है. वहीं फैंस के लिए स्टार से मिलने, जन्मदिन पर मिलने का मौका, स्पेशल स्क्रीनिंग या किसी इवेंट में पास मिलना बड़ी बात हो सकती है. यानी दोनों तरफ एक तरह का एक्सेस और कनेक्शन बनता है.
सोशल मीडिया पर फैन-वॉर भी इसी सिस्टम का हिस्सा है?
फैन क्लबों का एक दूसरा चेहरा सोशल मीडिया फैन-वॉर है. जब दो बड़े स्टार्स की फिल्मों की रिलीज आसपास होती है, तो दोनों के फैंस के बीच फैन-वॉर और बहस शुरू हो जाती है. कौन बड़ा स्टार है, किसकी फिल्म अच्छी है, किसका ट्रेलर को ज्यादा व्यूज मिले. किसका गाना ज्यादा ट्रेंड कर रहा है—ऐसी बहसें खूब होती हैं. लेकिन यहां भी हर चीज को पीआर का गेम से जोड़ना ठीक नहीं है. ये सब फैंस अपनी पसंद से भी ऐसा करते हैं. हां, इंडस्ट्री में फैन एंगेजमेंट को मार्केटिंग टूल के तौर पर यूज किए जाने की रिपोर्ट जरूर सामने आई हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में मार्केटिंग टीमों के साथ काम करने वाली एजेंसियों और 'फैन एंगेजमेंट' एक्टिविटी का जिक्र किया गया था. यानी सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर आवाज को 'पेड' कहना उतना ही गलत है, जितना यह मान लेना कि हर ऑनलाइन ट्रेंड ऑर्गेनिक होता है.
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