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Tata Sons में बड़े बदलाव की आहट: Noel Tata के नेतृत्व में नए चेयरमैन की तलाश, Chandrasekaran ने छोड़ी कुर्सी

टाटा समूह के अगले चेयरमैन की तलाश का रास्ता अब खुल गया है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद के लिए नाम नहीं देने का फैसला किया है। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

गुरुवार को जारी बयान में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करने के फैसले का सम्मान करता है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 51.4 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है। ऐसे में अगले चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस पूरी प्रक्रिया में नोएल टाटा का नाम सबसे अहम हो गया है। नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स की ओर से नामित दो निदेशकों में शामिल हैं। गुरुवार को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की बैठक भी नोएल टाटा की अध्यक्षता में हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में ट्रस्ट के बाकी पांच न्यासी भी शामिल हुए।

बैठक में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने जल्द से जल्द चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया। यह समिति टाटा संस के नए चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी। गौरतलब है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 27.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है।

हालांकि, नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया के सामने एक अहम कानूनी अड़चन भी है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन महाराष्ट्र के सार्वजनिक न्यास नियामक की ओर से लगाए गए रोक आदेश के कारण फिलहाल इस ट्रस्ट की बैठक नहीं हो पा रही है। इसके चलते चयन प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकती है।

प्रस्तावित समिति में तीन सदस्यों का चयन दोनों ट्रस्ट मिलकर करेंगे। जरूरी नहीं कि ये सदस्य टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्टों के नामित निदेशक ही हों। बाकी दो सदस्यों का चयन टाटा संस का बोर्ड करेगा। इनमें एक मौजूदा बोर्ड सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी व्यक्ति शामिल होगा।

मौजूदा स्थिति में समस्या यह है कि समिति की बैठक के लिए दोनों ट्रस्टों के नामित सदस्यों की पर्याप्त मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने प्रक्रिया शुरू तो कर दी है, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लगी रोक हटे बिना अगला कदम मुश्किल हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त से रोक हटाने का अनुरोध किया है और अब उसके जवाब का इंतजार है।

बता दें कि एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को नोएल टाटा और टाटा संस के उपाध्यक्ष वेंु श्रीनिवासन को ईमेल के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी थी। टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह चेयरमैन पद के लिए दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करेंगे।

चंद्रशेखरन करीब चार दशक से टाटा समूह से जुड़े रहे हैं और उनके नेतृत्व में समूह ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच कारोबारी नीतियों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं। इन्हीं मतभेदों को उनके पद छोड़ने के फैसले के बैकग्राउंड से जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनसे पहले साइरस मिस्त्री चेयरमैन थे, जिन्हें 2016 में पद से हटाया गया था। उस समय नए चेयरमैन की तलाश के लिए पांच सदस्यों वाली समिति बनाई गई थी। इसमें रतन टाटा, वेंनु श्रीनिवासन, अमित चंद्रा, रोनेन सेन और प्रोफेसर कुमार भट्टाचार्य शामिल थे। इसी समिति ने चंद्रशेखरन को अगला चेयरमैन चुना था।

अब करीब एक दशक बाद टाटा समूह में फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि उसका लक्ष्य नेतृत्व का बदलाव समय पर, व्यवस्थित और सुचारू तरीके से पूरा करना है। अगले कुछ महीनों में चयन समिति के गठन और संभावित नामों पर होने वाली चर्चा टाटा समूह के भविष्य की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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MP में अनसूटेबल नर्सिंग कॉलेजों के 2935 स्टूडेंट्स को हाई कोर्ट से राहत, आगामी परीक्षा में हो सकेंगे शामिल

MP में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी. सीबीआई जांच में लगभग 600 कॉलेज यानी अनसूटेबल पाए गए थे.

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  Sports

Hazlewood के 300 Test विकेट के बाद भी संकट में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश जीत के करीब

ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज फिर से नाकाम रहे जिससे बांग्लादेश शनिवार को यहां पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के तीसरे दिन ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंच गया। पहली पारी में केवल 198 रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 161 रन बनाए थे और वह अब भी बांग्लादेश से 67 रन पीछे है। बांग्लादेश ने अपनी पहली पारी में 426 रन बनाए थे।

ऑस्ट्रेलिया का दारोमदार अब कैमरन ग्रीन (नाबाद 43) और एलेक्स कैरी (नाबाद 19) पर टिका है। ऑस्ट्रेलिया को अगर हार से बचना है तो उसे दूसरी पारी में बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा जो अभी नामुमकिन लग रहा है। बांग्लादेश को ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल करने के लिए छह विकेट चाहिए, जो संभवतः इस प्रारूप में उसकी की सबसे बड़ी जीत होगी।

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बांग्लादेश ने सुबह अपनी पहली पारी छह विकेट पर 351 रन से आगे बढ़ाई और उसमें 75 महत्वपूर्ण रन जोड़े। बांग्लादेश ने इस तरह से पहली पारी में 228 रन की बढ़त हासिल की। मेहदी हसन मिराज ने 65 रन की शानदार पारी खेली।

इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दिन के अंत में स्टीव स्मिथ को आउट किया। मेहदी ने हसन महमूद (14) के साथ 46 रन, ताइजुल इस्लाम (17) के साथ 18 रन और फिर तस्कीन अहमद (14) के साथ 46 रन की उपयोगी साझेदारी की। बांग्लादेश के बल्लेबाजों ने ऑस्ट्रेलिया की खराब फील्डिंग का भी पूरा फायदा उठाया जिसने तीसरे दिन तीन कैच छोड़े।

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जोश हेज़लवुड ने शनिवार को गिरे सभी चार विकेट लिए। उन्होंने 89 रन देकर छह विकेट लिए। इस बीच उन्होंने मेहदी को आउट करके टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट पूरे किए।

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ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसके दोनों सलामी बल्लेबाज जेक वेदरल्ड (00) और ट्रैविस हेड (17) जल्दी आउट हो गए जिससे स्कोर दो विकेट पर 37 रन हो गया। इन दोनों को तेज गेंदबाज हसन महमूद ने आउट किया जिन्होंने पहली पारी में 55 रन देकर छह विकेट लिए थे। मार्नस लाबुशेन क्रीज पर काफी सक्रिय नजर आए, लेकिन स्पिनर ताइजुल इस्लाम की एक सीधी गेंद को चूक गए और 59 गेंदों में 31 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

मैच को बचाने की ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदें स्मिथ के कंधों पर टिकी थीं और इस अनुभवी खिलाड़ी ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की लेकिन तब मैच बांग्लादेश की ओर मुड़ गया, जब मेहदी ने अपनी ही गेंद पर स्मिथ (44) का कैच लपका। इससे ऑस्ट्रेलिया का स्कोर चार विकेट पर 122 रन हो गया।

Sat, 15 Aug 2026 17:21:43 +0530

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