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Independence Day Special: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देखें बॉलीवुड की ये 5 अंडररेटेड फिल्में, जगा देंगी आप में देशभक्ति का जुनून

Independence Day Special: भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. 15 अगस्त सिर्फ तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत सुनने या गुन-गुनाने का दिन नहीं है बल्कि यह उन सच्ची देशभक्ति की कहानी को याद करने का मौका भी है, जिन्होंने देश को आजादी दिलाने में अहम रोल निभाया. बॉलीवुड में देशभक्ति और आजादी को लेकर कई शानदार फिल्में बनाई गई हैं. इनमें कुछ फिल्मों को जबरदस्त पॉपुलैरिटी मिली, तो कुछ को उतना अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला. जिसकी वे हकदार थीं. ऐसी ही पांच फिल्में हैं, जिन्हें आज भी बेहतरीन लेकिन अंडररेटेड फिल्मों में गिना जाता है. 

मनोज बाजपेयी की '1971'

मनोज बाजपेयी की फिल्म 1971 उन छह भारतीय युद्धबंदियों की स्टोरी कहानी पर बेस्ड है जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पाकिस्तान की जेलों में कैद होते हैं. इन सैनिकों का सबसे बड़ा लक्ष्य अपन वतन की वापसी का होता है कि कैसे वह सहीसलामत अपने भारत देश लौट सकें. फिल्म इसी कोशिश और जेल से भागने की उनके प्लान को बेहत सीरियर तरीके से दिखाती है.

1971 फिल्म की सबसे खास बात इसकी कहानी और कलाकारों की एक्टिंग है. मनोज बाजपेयी के साथ कुमुद मिश्रा, रवि किशन और दीपक डोबरियाल अहम स्टार कहानी को और प्रभावशाली बनाया.  इसमें सिर्फ देशभक्ति बड़े-बड़े डायलॉग नहीं बल्कि सैनिकों की बेचैनी और अपने देश लौटने की जिद भी दिखाई देती है.  इस फिल्म को रिलीज के समय फिल्म को उतनी कामयाबी नहीं मिली, लेकिन आज इसे मनोज बाजपेयी की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो

श्याम बेनेगल की यह फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लाइफ और देश की आजादी में उनके योगदान को दिखाती है. इसमें उनकी लाइफ के उस दौर को दिखाया गया है, जब वह भारत से बाहर जर्मनी और जापान पहुंचे और आजाद हिंद फौज बनाई. इसमें एक्टर सचिन खेडेकर ने नेताजी का बेहतरीन किरदार निभाया था, जबकि कुलभूषण खरबंदा और दिव्या दत्ता भी अहम किरादार में नजर आए. फिल्म की खास बात यह है कि यह सुभाष चंद्र की लाइफ को सिर्फ रोमांचक तरीके नहीं दिखाया बल्कि इतिहास के जरूरी मुद्दों को बेहतरीन अंदाज में पेश किया गया. फिल्म सभी घटनाओं और संघर्ष को गंभीरता से सामने रखती है. ए.आर. रहमान का म्यूजिक इसकी कहानी के असर को और बढ़ाता है.  अपनी लंबी ड्यूरेशन की वजह से शायद यह ज्यादा लोगों के बीच पॉपुलैरिटी नहीं बना सकी. लेकिन इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले इसे एक अच्छी फिल्म मानते हैं. आप स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस फिल्म को देख सकते हैं. 

चित्तागोंग: जब स्कूल के बच्चों ने दी थी अंग्रेजों को चुनौती

आजादी की लड़ाई की बात होती है तो महात्मा गांधी, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुष का सबसे पहले जिक्र होता है. लेकिन आजादी की लड़ाई की कहानी इससे कहीं बड़ी थी. 2012 में आई चित्तागोंग इसी कहानी को सामने रखती है.  फिल्म 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे की घटना पर बेस्ड है, जिसमें मास्टर दा सूर्य सेन की लीडरशिप में क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी. खास बात यह थी कि इस आंदोलन में कई युवा और स्कूल के बच्चे भी शामिल हुए थे.  फिल्म में मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव और जयदीप अहलावत जैसे बेहतरीन कलाकार नजर आए. इसके बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस ज्यादा सक्सेस नहीं मिल सकी. ऐसे में आप इस फिल्म को देखकर देशभक्ति को जुनून का आभास कर सकते हैं.

शौर्य 

देशभक्ति की फिल्म का मतलब हमेशा सीमा पर बंदूक चलाने वाले सैनिकों से नहीं होता है. 2008 की शौर्य ने इसी सोच को अलग तरीके से पेश किया. यह फिल्म जम्मू-कश्मीर की पृष्ठभूमि पर आधारित एक कोर्ट-मार्शल की कहानी को दिखाती है. केके मेनन, राहुल बोस, जावेद जाफरी और मिनिषा लांबा जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म में ड्यूटी, मजहब, कानून और देशभक्ति जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. इसमें केके मेनन का ब्रिगेडियर रुद्र प्रताप सिंह का किरदार लोगों ने सबसे ज्यादा पसंद किया था.  फिल्म की कहानी सीरियस है और शायद यही वजह रही कि इसे उस तरह की सक्सेस नहीं मिल सकी, जैसी आज कल की बड़े स्टार वाली फिल्मों को मिलती है. लेकिन आज भी इसकी स्टोरी और केके मेनन के डायलॉग लोगों को याद हैं. 

'प्रहार' में दिखाया गया देशभक्ति को अलग अंदाज में

1991 में आई प्रहार: द फाइनल अटैक को नाना पाटेकर के करियर की यादगार फिल्मों में गिना जाता है. इसमें उन्होंने मेजर चौहान का बेहतरीन किरदार निभाया था, जो एक सख्त कमांडो ट्रेनर होते हैं. फिल्म की कहानी सबसे अहम मोड़ तब आता है जब उनके एक बहादुर कैडेट की हत्या हो जाती है.  इसके बाद मेजर चौहान भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं. जिसका मैसेज साफ होता है कि देश की रक्षा सिर्फ सीमा पर दुश्मन से लड़ने तक नहीं होती है बल्कि देश के अंदर मौजूद क्राइम और करप्शन के खिलाफ खड़ा होना भी एक तरह की जिम्मेदारी है. बताया जाता है कि नाना पाटेकर ने इस किरदार को निभाने के लिए सैन्य प्रशिक्षण भी लिया था. इसमें माधुरी दीक्षित, डिंपल कपाड़िया और गौतम जोगलेकर का भी अहम किरादर देखने मिला. 

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सिंधु जल संधि से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक… 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का देश के नाम संबोधन

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नाम संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वे सभी को बधाई देना चाहती हैं। कुछ ही घंटों में देश की आजादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत होगी. जब देश आजाद हुआ था तब एकीकरण की चुनौती थी. सरदार पटेल एकता के शिल्पकार थे. आज हम हम आधुनिक भारत बनने की ओर अग्रसर हैं. हमारे छात्र भारत के भविष्य के निर्माता हैं.

भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को प्रदर्शित किया

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारतीय सेना के अदम्य साहस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को प्रदर्शित किया. आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में, खासकर किसानों के लिए, एक निर्णायक कदम है.

आतंकियों को राष्ट्रपति की दो टूक

राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, आतंकवादी और उनका समर्थन करने वाले चाहे कहीं भी छिपें, उन्हें अंजाम भुगतना होगा। वहीं, राष्ट्रपति ने देश को नक्सल-मुक्त बनाने को एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया। उन्होंने बस्तर में तेजी से हो विकास के साथ सांस्कृतिक भागीदारी का भी उल्लेख किया। इसके साथ कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था के विकास दर वैश्विक औसत विकास दर से दोगुनी हो सकती है। 

दुनिया में बजा डिजिटल का डंका

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने कहा, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में आधे से अधिक भारत में होते हैं. उन्होंने कहा कि बीते दशक में समावेशी विकास की पहलों से 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। वहीं, फ्री राशन योजना 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा तय कर रही है.

राष्ट्रपति के अनुसार, वे तीनों सेनाओं, सभी सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिस कर्मियों की कर्तव्य-निष्ठा की सराहना करती हैं। वे उन भारतीयों की भी सराहना करती हैं जो वैश्विक मंच पर देश का मान-सम्मान बढ़ा रहे हैं. साथ ही विदेशों में भारतीय दूतावासों में काम करने वाले नागरिकों की भी सराहना करती हैं। 

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  Sports

सरफराज खान बाहर, ध्रुव जुरेल अंदर? श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में भारत की संभावित प्लेइंग XI

India Probable XI Against Sri Lanka: 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट खेलने उतरेगी. लगभग एक दशक बाद लंकाई सरजमीं पर उतरी गिल ब्रिगेड के सामने स्पिन के खिलाफ लचर प्रदर्शन से उबरने और WTC फाइनल की रेस में बने रहने की बड़ी चुनौती है. जसप्रीत बुमराह और वाशिंगटन सुंदर के बाहर होने से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ है, वहीं गेंदबाजी में गुरनूर बराड़ और प्रसिद्ध कृष्णा के बीच चयन को लेकर बड़ा सस्पेंस बना हुआ है. Fri, 14 Aug 2026 22:13:35 +0530

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