Leap India Share 9% गिरकर 145.10 रुपये पर बंद हुआ, BSE पर 166 पर हुई थी लिस्टिंग
लीप इंडिया लिमिटेड का शेयर शुक्रवार को कारोबार के पहले दिन बढ़त के साथ सूचीबद्ध होने के बाद अंत में अपने निर्गम मूल्य 159 रुपये से करीब नौ प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई में शेयर ने 166 रुपये पर शुरुआत की जो निर्गम मूल्य से 4.40 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, यह बढ़त बरकरार नहीं रह पाया और 8.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 145.10 रुपये पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह 10 प्रतिशत टूटकर 143.10 रुपये पर आ गया था। एनएसई में शेयर 4.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 165.90 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ। अंत में 8.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 144.93 रुपये पर बंद हुआ।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण 6,392.18 करोड़ रुपये रहा। आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी परिसंपत्तियां साझा करने वाली कंपनी लीप इंडिया लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को मंगलवार को बोली के अंतिम दिन 8.38 गुना अभिदान मिला था। इस 2,480 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 151-159 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।
आईपीओ से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कंपनी के कुछ कर्जों के पुनर्भुगतान या समय से पहले भुगतान के लिए किया जाएगा। शेष राशि का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।
GTRI ने US tariff नेटवर्क के आरोपों पर भारत को विस्तृत विवरण मांगने की सलाह दी
भारत को अमेरिका के उस आरोप पर अधिक ब्योरा मांगना चाहिए, जिसमें कहा गया था कि भारत सहित 40 से अधिक देश चीन को उच्च शुल्क से बचने में मदद करने के लिए कथित रूप से एक छिपे हुए पारगमन नेटवर्क चला रहे हैं। शोध संस्थान जीटीआरआई ने यह कहा। शोध निकाय ने कहा कि इससे दुरुपयोग का पता लगाने, वैध निर्यातकों की रक्षा करने और आधारहीन आरोपों को चुनौती देने में मदद मिलेगी।
अमेरिका ने बृहस्पतिवार को चीनी निर्यातकों पर उच्च अमेरिकी शुल्क से बचने के लिए इन देशों के माध्यम से माल भेजने का आरोप लगाया था। अमेरिकी रिपोर्ट में विशेष रूप से पंपों और कंप्रेसरों के लिए भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई गलियारे को निशाना बनाया गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत को अमेरिका से इन आरोपों के बारे में प्रत्येक देश, उत्पाद और निर्यात की खेप के आधार पर जानकारी देने के लिए कहना चाहिए।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को भी इस बारे में अधिक जांच करनी चाहिए, ताकि किसी भी दुरुपयोग का पता चल सके और वैध निर्यातकों के हितों की रक्षा हो। उन्होंने कहा कि ऐसा करके भारत इन अप्रमाणित आरोपों का सही ढंग से जवाब भी दे सकेगा।
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