Rajya Sabha Elections: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किये जाने के विरोध में उपवास पर बैठे कांग्रेस नेता, BJP पर लगाये आरोप
राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त किये जाने के बाद से कांग्रेस आक्रोशित है, भाजपा पर झूठी जानकारी के आधार पर फॉर्म रिजेक्ट करवाने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता अब भोपाल में उपवास पर बैठ गए हैं।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त होने के बाद से मध्य प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है, 45 डिग्री तापमान के बाद भी कांग्रेस नेताओं का हौसला कम नहीं है, कल रात निर्वाचन कार्यालय के बाहर धरने पर लेटकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद आज कांग्रेस नेता भीषण गर्मी में रोशनपुरा चौराहे पर उपवास पर बैठ गए।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित तमाम विधायक और पदाधिकारी और कार्यकर्ता सुबह उपवास पर बैठ गए और मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द करने का विरोध करने लगे, नेताओं ने अपने संबोधन में भाजपा और निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाये।
कांग्रेस का आरोप, विधायकों की एकजुटता देख BJP ने रचा षड्यंत्र
जयवर्धन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा के साथ समझौता करने का मतलब अपनी राजनैतिक आत्महत्या करना होता है और जब भाजपा को दिखा कि सभी कांग्रेस विधायक एकजुट हैं तो ये षड्यंत्र कर दिया, उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक बिना संज्ञान वाले नोटिस के आधार पर एक सांसद की दावेदारी निरस्त कर दी गई है।
जयवर्धन सिंह ने भाजपा को कहा चोर, जनता से सावधान रहने की अपील की
जयवर्धन सिंह ने कहा कि दिल्ली में हमारे वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज चुनाव आयोग जाकर वहां मुलाकात की है और हमें विश्वास है कि वहां हमारी अपील सुनी जाएगी और मीनाक्षी नटराजन को न्याय मिलेगा, उन्हें फिर से प्रत्याशी घोषित किया जायेगा। विधायक ने कहा भाजपा ने वोट चोरी की, परीक्षाएं चोरी की, अब सीट चोरी की है मैं जनता से अपील करना चाहता हूँ कि इन चोरों से सावधान रहो, उनकी बातों पर कभी विश्वास नहीं करना।
Ekadashi Tulsi Puja Rules: एकादशी पर तुलसी को जल जल चढ़ाना चाहिए? जानें सही नियम
Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत-उपासना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। जून 2026 में पड़ने वाली परमा एकादशी और निर्जला एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना चाहिए या नहीं।
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाया जाता। मान्यता है कि तुलसी माता भगवान विष्णु की परम प्रिय हैं और उन्हें माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। कहा जाता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसी कारण इस दिन उन्हें जल अर्पित करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित माना गया है। यदि पूजा में तुलसी दल की आवश्यकता हो, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पत्ते जल्दी अपवित्र नहीं होते और पूजा में उनका उपयोग किया जा सकता है।
एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व
यद्यपि एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं दिया जाता, लेकिन उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
एकादशी व्रत के प्रमुख नियम
एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। उन्हें पीले फूल, चंदन, फल और पहले से तोड़े गए तुलसी दल अर्पित किए जा सकते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्यतः चावल और अन्य अनाज का सेवन नहीं करते। कई लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ भक्त निर्जला व्रत का भी पालन करते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए एकादशी के दिन तुलसी और भगवान विष्णु की पूजा विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है।
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