खरबूजे के बीज: छोटे दानों में छिपा बड़ा खजाना, सेहत के लिए कई फायदे
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। गर्मी के मौसम में हर किसी को खरबूजा काफी पसंद है, लेकिन जिन बीजों को लोग खराब मानकर फेंक देते है, वही बीज बाजार में पैकिंग के साथ महंगे दामों पर बिक रहे हैं। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार खरबूजे के बीज कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं। खरबूजे के बीजों में अच्छी मात्रा में प्रोटीन, स्वस्थ वसा, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, खरबूजे के बीज दिल की सेहत के लिए लाभकारी साबित होते हैं। इनमें मौजूद मैग्नीशियम रक्तचाप को संतुलित रखता है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनमें मौजूद फाइबर भोजन को धीरे-धीरे पचाने में मदद करता है और आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है।
पर्याप्त फाइबर लेने वाले लोगों में कब्ज, पेट फूलने और अपच जैसी समस्याएं कम देखी जाती हैं। फाइबर आंतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों के लिए भी उपयोगी माना जाता है, जिससे संपूर्ण पाचन तंत्र स्वस्थ बना रह सकता है।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी खरबूजे के बीज सहायक माने जाते हैं। इनमें पाया जाने वाला जिंक प्रतिरक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिंक शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाओं के निर्माण और उनके बेहतर कामकाज में सहायता करता है। इसके साथ ही इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को हानिकारक फ्री-रेडिकल्स से बचाने का काम करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा कम हो सकता है।
त्वचा की सेहत के लिए भी खरबूजे के बीजों को लाभदायक माना जाता है। इनमें मौजूद स्वस्थ वसा और एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को भीतर से पोषण देने में मदद करते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे पोषक तत्व त्वचा की नमी बनाए रखने, समय से पहले आने वाली झुर्रियों को कम करने और त्वचा को ज्यादा स्वस्थ दिखाने में सहायक होते हैं। यही वजह है कि कई लोग इन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल करने लगे हैं।
वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी ये बीज उपयोगी हैं। इनमें प्रोटीन और फाइबर दोनों अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। ये दोनों पोषक तत्व पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करते हैं। जब बार-बार भूख नहीं लगती तो अनावश्यक खाने की आदत कम होती है, जिससे वजन कंट्रोल करने में सहायता मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खरबूजे के बीजों को घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। फल से निकाले गए बीजों को अच्छी तरह साफ कर लें ताकि उन पर लगा गूदा हट जाए। इसके बाद उन्हें धूप में पूरी तरह सुखा लें। सूखने के बाद हल्की आंच पर भूनकर खाया जा सकता है।
--आईएएनएस
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Parama Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है ज्येष्ठ माह की परमा एकादशी? जानें इस दिन क्या करें क्या न करें
Parama Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को श्री हरि भगवान विष्णु की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. प्रत्येक मास में 2 एकादशियां आती हैं, लेकिन अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में आने वाली परमा एकादशी का महत्व बेहद दुर्लभ माना गया है. शास्त्रों में इसे पापों का नाश करने वाली, दरिद्रता को दूर करने वाली तथा भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली तिथि बताया गया है. साल 2026 में पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी व्रत को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. चलिए हम आपको बताते हैं परमा एकादशी कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण समय क्या रहेगा.
परमा एकादशी कब है? (Ekadashi Kab Hai)
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आज यानी 10 जून 2026, बुधवार को रात 12 बजकर 58 मिनट से शुरु हो रही है, जो कल यानी 11 जून को रात 10 बजकर 37 मिनट पर खत्म होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा.
परमा एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त
परमा एकादशी पर इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है.
- ब्रह्मा मुहूर्त: 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा.
- अभिजीत मुहूर्त: 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक.
- उन्नति मुहूर्त: 12 बजकर 21 मिनट से 02 बजकर 05 मिनट तक रहेगा.
परमा एकादशी पारण समय
परमा एकादशी का पारण समय 12 जून को होगा जिसका मुहूर्त सुबह 05 बजकर 23 मिनट से लेकर 08 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग बन रहे हैं जो बेहद शुभ माने जाते हैं. इस दिन किए गए कामों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है, खासकर व्यापार और करियर से जुडें कामों में.
परमा एकादशी पर क्या करें?
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें.
- तुलसी दल अर्पित करें.
- विष्णु सहस्ननाम का पाठ करें.
- ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
- गौ सेवा, अन्नदान और वस्त्र दान करें.
- गरीब और जरूरतमंदों की सहायता करें.
क्या न करें?
- क्रोध, कटुवचन और विवाद से बचें.
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें.
- असत्य न बोलें
- किसी का अपमान न करें.
- समय का दुरुपयोग न करें.
परमा एकादशी का महत्व (Parama Ekadashi Significance)
धार्मिक मान्यता है कि धन के देवता कुबेर ने भी परमा एकादशी का व्रत किया था जिसके प्रभाव से उन्हें धनाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ था. परमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी उपवास माना जाता है जो तीन साल में सिर्फ एक बार आता है. यह व्रत दरिद्रता का नाश कर धन, वैभव, सभी पापों से मुक्ति और अंत में मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है. इस व्रत को करने से साधकों के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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