Om mantra ka mahatva: 'ॐ' का उच्चारण क्यों माना जाता है इतना पवित्र? जानें इस मंत्र का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
Om mantra ka mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी मंत्र, पूजा-पाठ या ध्यान की शुरुआत 'ॐ' के उच्चारण से करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। इसे "आदि ध्वनि" यानी सृष्टि की पहली ध्वनि माना जाता है, और धार्मिक ग्रंथों में इसे परमात्मा का साक्षात स्वरूप बताया गया है। यही कारण है कि लगभग हर मंत्र, स्तोत्र और आरती की शुरुआत 'ॐ' से ही की जाती है।
'ॐ' की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वेदों और उपनिषदों में 'ॐ' को ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय गूंजने वाली सबसे पहली ध्वनि माना गया है। कहा जाता है कि यह ध्वनि तीन मूल अक्षरों - "अ", "उ" और "म" के मेल से बनी है, जो क्रमशः सृष्टि, स्थिति और संहार के प्रतीक भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को दर्शाते हैं। इसी वजह से 'ॐ' को त्रिदेवों की एकीकृत शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।
कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि 'ॐ' न केवल एक ध्वनि है, बल्कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
'ॐ' के जाप का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि नियमित रूप से 'ॐ' का जाप करने से मन को गहरी शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसे हर मंत्र से पहले जोड़ने की परंपरा इसलिए भी मानी जाती है, क्योंकि यह माना जाता है कि 'ॐ' के उच्चारण से मंत्र की शक्ति और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक परंपराओं में यह भी कहा जाता है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में 'ॐ' का जाप करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, क्योंकि इस समय वातावरण शांत और पवित्र माना जाता है।
'ॐ' उच्चारण करने का सही तरीका
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, 'ॐ' का जाप करते समय व्यक्ति को शांत और स्थिर मुद्रा में बैठना चाहिए, साथ ही आंखें बंद रखनी चाहिए। मान्यता है कि 'ॐ' का उच्चारण करते समय इसे तीन भागों में विभाजित करके धीरे-धीरे बोलना चाहिए - पहले "अ", फिर "उ" और अंत में "म" की गूंजती हुई ध्वनि, जिसे नाभि से लेकर सिर तक महसूस किया जा सकता है।
इसके अलावा यह भी मान्यता है कि 'ॐ' का जाप कम से कम 108 बार करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल करना भी अत्यंत फलदायी बताया गया है।
'ॐ' जाप के वैज्ञानिक लाभ
धार्मिक महत्व के साथ-साथ 'ॐ' के उच्चारण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि 'ॐ' का उच्चारण करते समय उत्पन्न होने वाला कंपन मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक होता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती है। इसके अलावा नियमित रूप से 'ॐ' का जाप करने से एकाग्रता बढ़ती है और श्वसन तंत्र भी मजबूत होता है, ऐसा माना जाता है।
योग और ध्यान में भी है 'ॐ' का विशेष स्थान
आज के समय में 'ॐ' सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि योग और ध्यान की कक्षाओं में भी इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। दुनियाभर में योग सत्रों की शुरुआत और समापन 'ॐ' के उच्चारण के साथ करने की परंपरा तेजी से लोकप्रिय हुई है, जिससे यह प्राचीन भारतीय ध्वनि आज वैश्विक स्तर पर पहचानी जाने लगी है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।
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