Jharkhand: हेमंत सोरेन ने शहादत दिवस पर धरती आबा 'बिरसा मुंडा' को दी श्रद्धांजलि, राज्यपाल सहित कई नेता हुए शामिल
Jharkhand: झारखंड के रांची के कोकर स्थित समाधि स्थल पर धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन सहित कई जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर उनके संघर्ष, त्याग और आदिवासी समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया गया.
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर शत-शत नमन। आज रांची स्थित उनकी समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 9, 2026
धरती आबा ने जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान और आदिवासी-मूलवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। pic.twitter.com/0lu34DejDo
कौन थे बिरसा मुंडा?
बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान जननायकों में से एक थे. उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गांव में हुआ था. उन्होंने बचपन से ही आदिवासी समाज पर हो रहे अन्याय और शोषण को देखा. अंग्रेजी शासन के दौरान आदिवासियों को उनकी जमीन और जंगलों से बेदखल किया जा रहा था. इसके खिलाफ उन्होंने लोगों को संगठित किया और अधिकारों की लड़ाई शुरू की.
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश
बिरसा मुंडा का मानना था कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का प्राकृतिक अधिकार है. उन्होंने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया. उनके लिए यह केवल संसाधनों की लड़ाई नहीं, बल्कि पहचान और सम्मान का सवाल था.
उलगुलान की चेतना, संघर्ष की मशाल और जन-जन के स्वाभिमान के प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा ने हमें सिखाया कि अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष ही सबसे बड़ी शक्ति है।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 9, 2026
उनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
जय बिरसा! pic.twitter.com/DtdvnYJMqI
आज भी हैं प्रेरणा के स्रोत
बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया. उनके नेतृत्व में हजारों आदिवासी एकजुट हुए. उनका जीवन साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय का प्रतीक है. यही कारण है कि आज भी उन्हें आदरपूर्वक 'धरती आबा' कहा जाता है और उनका योगदान देशभर के लोगों को प्रेरित करता है.
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TMC में 'ऑपरेशन बगावत'! 20 सांसद अलग, 60 विधायक नाराज... बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल
West Bengal politics: पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कुछ भी ठीक नहीं है. चुनाव में बड़ी हार के बाद अब पार्टी एक बड़े राजनीतिक संकट में घिरती नजर रही है. दरअसल, बीते कुछ दिनों से पार्टी में बगावत का सिलसिला चल रहा है, ये बगावत पंचायत से शुरू होकर अब सीधे संसद तक पहुंच चुकी है.
TMC के 20 लोकसभा सांसद बागी गुट में हुए शामिल, अब आगे क्या?
मीडिया रिपोर्टृस के अनुसार टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से करीब 20 ने ममता बनर्जी से किनारा कर लिया है. बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने तो इस्तीफा दे दिया है. बता दें बागी खेमे की अगुवाई सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. इस सब के बीच ममता बनर्जी पार्टी के बचे नेताओं और अपने समर्थकों के साथ लगातार बैठक कर रहीं हैं.
#WATCH | Kolkata, West Bengal: Eggs and tomatoes were thrown at former Bidhannagar Municipal Corporation Mayor Sabyasachi Dutta while he was being taken away from the police station
— ANI (@ANI) June 9, 2026
Bidhannagar North Police arrested him following allegations that he demanded one crore rupees… pic.twitter.com/ZEQpaiFysD
पंचायत से नगर निगम तक, TMC में हर जगह से पलायन क्यों?
TMC के जमीनी स्तर पर हालात बुरे हैं. दक्षिण 24 परगना में पंचायत सदस्य सरेआम वसूली के पैसे वापस कर रहे हैं. कूचबिहार में एक नगर पालिका के 8 में से 5 पार्षद कांग्रेस में चले गए. कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम समेत सौ से ज्यादा पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. विधानसभा में भी 80 में से 60 के करीब विधायक बागी गुट के साथ हैं और ऋतब्रत बनर्जी उनके नेता बन गए हैं.
अभिषेक बनर्जी पर उठ रही उंगलियां, पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से थे नाराज
बागी नेताओं का साफ कहना है कि इस पूरे बिखराव के पीछे ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं. पुराने और वफादार नेताओं को दरकिनार कर पार्टी को अपने कुछ खास लोगों के इर्द-गिर्द चलाया गया. पार्टी के भीतर अभिषेक को लेकर खुला गुस्सा है. बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से अभिषेक की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट थे, जो पार्टी के सरकार से हटने के बाद अब बस खुलकर सामने आने लगा है.
#WATCH | Delhi | On rebellion in the party, TMC MP Kalyan Banerjee says, "You (BJP) have the CM, ED, CBI and other powers, but I have 'Maa, Maati, Maanush', my party, my party workers, and people of West Bengal." pic.twitter.com/pjtLj6RCMs
— ANI (@ANI) June 9, 2026
बागी को बताया गद्दार, टीएमसी ने दिया ये बयान
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने मंगलवार को बागी नेताओं को सीधे गद्दार कहा- उन्होंने कहा कि जो नेता कल तक ममता की तारीफ करते थे, वही आज पीएम मोदी के गुणगान गा रहे हैं. कल्याण बनर्जी ने भी बागियों को चुनौती देते हुए कहा कि इस्तीफा दो और जहां जाना हो जाओ.
शत्रुघ्न सिन्हा की खामोशी सबसे बड़ा रहस्य
इस पूरे घटनाक्रम में आसनसोल से टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी सबसे ज्यादा चर्चा में है. न वे बागी खेमे के साथ नजर आए, न ममता के पक्ष में कोई बयान दिया. पार्टी आलाकमान को डर है कि अगर 'शॉटगन' ने मुंह खोला और बागियों का साथ दिया तो ममता के लिए इस बगावत को नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाएगा. बता दें शत्रुघ्न सिन्हा 2022 में टीएमसी में आए थे. ममता ने उन्हें आसनसोल से दो बार चुनाव जिताया. इसीलिए माना जा रहा है कि वे फिलहाल बागी गुट से खुद को दूर रख रहे हैं. लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलें जारी हैं.
VIDEO | Bengal Minister Sharadwat Mukherjee said, "We have invited them for tea because they don't have anywhere else to go. Mamata Banerjee has thrown them out... BJP has not welcomed them... TMC is a circus."
— Press Trust of India (@PTI_News) June 9, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/3QPU0zSwiz
ममता अकेली पड़ रही हैं, अब आगे टीएमसी का भविष्य क्या?
बंगाल की जो नेता एक जमाने में 34 साल के वाम शासन को उखाड़ने के लिए जानी जाती थीं, वही आज अपनी पार्टी को बिखरते देख रही हैं. सबसे बड़ी तकलीफ यह है कि यह टूट उन्हीं के भरोसेमंद नेताओं की वजह से हो रही है जिन्हें उन्होंने खुद तैयार किया. आने वाले समय में ममता बनर्जी या उनकी पार्टी टीएमसी का क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि आगामी 2029 लोकसभा चुनाव में इस बार टीएमसी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
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