7 मई, 2025 को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत के मिलिट्री ऑपरेशन के बाद, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र अजीत डोभाल ने पहली बार 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है। डोभाल ने डिस्कवरी चैनल की आने वाली डॉक्यू-सीरीज़ 'डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' में इस ऑपरेशन, इसके मक़सद और भारत जो संदेश देना चाहता था, उस पर अपनी राय रखी है। इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के सीनियर मिलिट्री और नेशनल सिक्योरिटी लीडरशिप के प्रत्यक्ष अनुभव शामिल हैं और इसमें 88 घंटे की जवाबी कार्रवाई पर डोभाल का एक खास इंटरव्यू भी दिखाया गया है।
डिस्कवरी की आने वाली वृत्तचित्र शृंखला ‘‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’’ में डोभाल ने कहा कि 88 घंटे चले इस सैन्य अभियान का मकसद दुश्मन के शिविरों को नष्ट करना था, खासकर उन ठिकानों को जो पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने पहले साक्षात्कार में डोभाल ने कहा, ‘‘हमने ऑपरेशन का मकसद दुश्मन के शिविरों को नष्ट करना तय कर लिया था, खासकर उनको जो पहलगाम हमले के लिए ज़िम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए संदेश बहुत साफ है। भारत की उदारता या सहनशीलता को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। भारत जोखिम उठा सकता है, भारत कड़ा प्रहार कर सकता है, चाहे नतीजे कुछ भी हों।
डिस्कवरी ने एक बयान में कहा कि दो भाग वाली यह शृंखला भारत के सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नेतृत्व को एक साथ लाती है ताकि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े फैसलों और घटनाओं को बताया जा सके। इसमें उन लोगों के सीधे अनुभव शामिल हैं जिन्होंने भारत की जवाबी कार्रवाई की देखरेख की थी। इसमें कहा गया है कि शो में डोभाल सैन्य जवाबी कार्रवाई के पीछे लिए गए फैसलों और दृढ़ संकल्प के बारे में बताते हैं।
‘‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’’ का प्रीमियर शनिवार रात 9 बजे डिस्कवरी और उसकी इंटरनेट स्ट्रीमिंग सेवा डिस्कवरी+ पर होगा। पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए छह-सात मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। इसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। बाद में पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले किए, और भारत की ओर सेसभी जवाबी कार्रवाई भी ऑपरेशन सिंदूर के तहत ही की गईं। परमाणु शस्त्र संपन्न दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला सैन्य संघर्ष 10 मई की शाम को एक समझौते पर पहुंचने के बाद रुक गया।
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें
National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Continue reading on the app
AIADMK के जनरल सेक्रेटरी एडप्पादी के. पलानीस्वामी शुक्रवार को तंजावुर हेड पोस्ट ऑफिस में एक विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करेंगे। यह प्रदर्शन पूरे तमिलनाडु में किसानों के फसल लोन पूरी तरह माफ़ करने की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा है। तंजावुर में विरोध प्रदर्शन सुबह करीब 9:30 बजे शुरू होने की उम्मीद है और पलानीस्वामी के वहां जमा पार्टी कार्यकर्ताओं और किसानों को संबोधित करने की संभावना है।
AIADMK ने राज्य भर के सभी ज़िला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है, जिसमें किसानों के कल्याण और कावेरी जल विवाद से जुड़ी मांगें उठाई जाएंगी। इन प्रदर्शनों का मकसद मेकेदातु मुद्दे पर TVK सरकार की कथित निष्क्रियता की निंदा करना भी है। AIADMK ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कावेरी नदी के पानी में तमिलनाडु के जायज़ हिस्से की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रही है।
पलानीस्वामी ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था और फसल लोन पूरी तरह माफ़ करने की मांग को प्रदर्शनों के दौरान उठाए जाने वाले मुख्य मुद्दों में से एक बनाया था। उम्मीद है कि पार्टी किसानों को हो रही आर्थिक दिक्कतों को उजागर करेगी और सरकार पर राहत देने के लिए कदम उठाने का दबाव डालेगी। पड़ोसी राज्य कर्नाटक में मेकेदातु प्रोजेक्ट, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु लगातार इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है क्योंकि उसे चिंता है कि इससे कावेरी नदी के पानी में राज्य के हिस्से पर असर पड़ सकता है।
तंजावुर में हो रहा विरोध प्रदर्शन इसलिए अहम है क्योंकि यह ज़िला कावेरी डेल्टा क्षेत्र का हिस्सा है और तमिलनाडु के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र के किसानों के लिए, खासकर धान की खेती के लिए, कावेरी नदी का पानी मिलना बहुत ज़रूरी है।
उम्मीद है कि AIADMK के नेता और कार्यकर्ता किसानों और समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। पलानीस्वामी का भाषण पार्टी की मांगों और किसानों के मुद्दों व कावेरी जल विवाद को संभालने के सरकार के तरीके की आलोचना पर केंद्रित होगा।
Continue reading on the app