अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत, H-1B वीजा पर अब नहीं लगेगी 1 लाख डॉलर फीस
American H-1B Visa: भारतीयों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच लोकप्रिय वीजा H-1B वीजा पर कोर्ट ने ब़ड़ी राहत दी है। अमेरिकी कोर्ट ने वीजा पर लगने वाली 1 लाख डॉलर की फीस को अवैध करार कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने वीजा पर इस फीस का फैसला लिया था। हालांकि कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 21 सितंबर से नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर (लगभग 85-88 लाख रुपये) का भारी शुल्क लगा दिया था। अमेरिका में 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर फीस का विरोध किया था। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था। मामले की सुनवाई करते हुए 8 जून को बोस्टन की एक संघीय अदालत ने ट्रम्प के इस नियम को रद्द और अवैध करार दिया है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज लियो सोरोकिन ने यह फीस को अवैध करार कर दिया।
कांग्रेस से कोई अधिकार प्राप्त नहीं...
मामले की सुनवाई करते हुए जज ने ट्रंप प्रशासन पर तीखी टिप्पणी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोरोकिन ने फैसले में कहा कि नए H-1B वीजा के लिए ली जाने वाली भारी-भरकम फीस जुर्माना नहीं बल्कि एक टैक्स है। इसे जारी करने के लिए रिपब्लिकन राष्ट्रपति को कांग्रेस से कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसे अमेरिकी विदेश विभाग और US Citizenship and Immigration Services लागू नहीं कर सकती थी।
12 साल, 15 दिन और पूर्व पीएम नेहरू का तोड़ा रिकॉर्ड, जानें कैसे नरेंद्र मोदी बने सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित रहने वाले प्रधानमंत्री
Explainer: 9 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज हो गई है. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इसके साथ ही उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो सात दशकों से अधिक समय से कायम था.
यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में जनादेश, राजनीतिक स्थिरता और नेतृत्व की निरंतरता का भी प्रतीक मानी जा रही है. खास बात यह है कि इसी दिन मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष भी पूरे हो रहे हैं.
क्या है यह रिकॉर्ड?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभाली.
9 जून 2026 को मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिन पूरे कर लेंगे. इससे पहले यह रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार 4,397 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था.
यानी मोदी नेहरू के रिकॉर्ड को एक दिन के अंतर से पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रचेंगे.
नेहरू का रिकॉर्ड कैसे बना था?
स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 को देश के प्रधानमंत्री बने थे. हालांकि उस समय तक भारत में आम चुनाव नहीं हुए थे और वे अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे थे.
1951-52 में देश के पहले आम चुनाव संपन्न हुए, जिसके बाद 13 मई 1952 को नेहरू ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. इसके बाद वे अपने निधन तक प्रधानमंत्री बने रहे.
इसी कारण राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 4,397 दिनों का माना जाता है. हालांकि यदि उनके पूरे प्रधानमंत्री कार्यकाल को जोड़ा जाए तो यह लगभग 6,130 दिनों तक पहुंचता है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में लगातार लंबे समय तक सत्ता में बने रहना आसान नहीं होता. हर चुनाव में जनता का नया जनादेश प्राप्त करना पड़ता है. भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश में लगातार तीन आम चुनाव जीतना और सत्ता में बने रहना किसी भी नेता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है.
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में सफलता हासिल की. इन चुनावी जीतों ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल कर दिया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रिकॉर्ड मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता, संगठनात्मक क्षमता और चुनावी रणनीति की सफलता को भी दर्शाता है.
मोदी के नाम दर्ज अन्य बड़े रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी के नाम पहले से ही कई महत्वपूर्ण राजनीतिक रिकॉर्ड दर्ज हैं.
वे देश के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन चुके हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 2,272 दिनों के कार्यकाल को काफी पहले पीछे छोड़ दिया था.
इसके अलावा वे स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री पद संभाला है.
उनके नेतृत्व में केंद्र में लगातार तीसरे कार्यकाल की सरकार बनने से भारतीय राजनीति में गठबंधन युग और बहुमत की राजनीति को लेकर भी नई बहसें शुरू हुई हैं.
मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का लंबा सफर
नरेंद्र मोदी का प्रशासनिक सफर प्रधानमंत्री बनने से काफी पहले शुरू हो गया था.
उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद लगभग 13 वर्षों तक गुजरात का नेतृत्व किया. मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाली.
यदि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके पूरे कार्यकाल को जोड़ा जाए तो वह 9,000 दिनों से अधिक समय तक निर्वाचित सरकारों के प्रमुख रह चुके हैं. यह अपने आप में भारतीय राजनीति का एक असाधारण रिकॉर्ड है.
एनडीए की बैठक में होगा सम्मान
सूत्रों के अनुसार, 10 जून को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि पर विशेष प्रस्ताव पारित किया जा सकता है.
बताया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू इस प्रस्ताव को पेश करेंगे. एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के नेता भी इसका समर्थन करेंगे.
प्रस्ताव में पिछले 12 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल परिवर्तन, आर्थिक सुधारों और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किए जाने की संभावना है.
भारतीय राजनीति के लिए क्या मायने?
नरेंद्र मोदी का यह रिकॉर्ड केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की बदलती राजनीतिक प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है. लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व, लगातार चुनावी सफलता और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक पकड़ ने उन्हें भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं की सूची में शामिल कर दिया है.
आने वाले वर्षों में यह रिकॉर्ड और आगे बढ़ सकता है. फिलहाल 9 जून 2026 भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जब एक निर्वाचित प्रधानमंत्री ने लगातार सबसे लंबे कार्यकाल का नया मानदंड स्थापित किया.
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