Harbhajan Singh ने सफलता का श्रेय ईश्वर को दिया, बायोपिक में Vicky Kaushal को चुना
भारत के लिए 400 से अधिक टेस्ट विकेट, टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनने जैसी उपलब्धियां भले ही उनकी हों लेकिन हरभजन सिंह इन सभी का श्रेय ईश्वर को देते हैं। हरभजन ने अपनी दो दशक से अधिक लंबी क्रिकेट यात्रा में मैदान पर हासिल की गई उपलब्धियों से कहीं अधिक विनम्रता दिखाते हुए कहा, ‘‘करने कराने वाला तो ऊपर वाला है, उसकी रजा से हो रहा है। उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।’’ पीटीआई के साथ पॉडकास्ट साक्षात्कार में 46 वर्षीय हरभजन ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी क्रिकेट उपलब्धियों के कारण खुद को महत्वपूर्ण मानने में विश्वास नहीं किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हम जीवन में कुछ बन जाते हैं तो यह मानने लगते हैं कि हमने कुछ किया है, लेकिन जो कुछ होता है वह ईश्वर की इच्छा होती है।’’ उन्होंने बताया कि उन्होंने जीवन के प्रति अपने नजरिये को व्यक्त करने वाला उर्दू का एक शेर लिखा है जिसे वह पीटीआई के माध्यम से पहली बार सार्वजनिक कर रहे हैं। कुछ देर रुकने के बाद हरभजन ने शेर पढ़ा, ‘‘ये कितना बड़ा वहम था कि मैं अहम था। ओ खुदा के बंदे, उस वाहेगुरु का शुक्र कर, ये तो उसका तेरे ऊपर रहम था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इन उपलब्धियों के लिए मैं चुना हुआ था, चाहे वह 100 टेस्ट खेलना हो या टेस्ट में हैट्रिक लेने वाला पहला भारतीय बनना।
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यह उस ईश्वर की इच्छा थी जो पूरी हुई। उसकी रजा थी।’’ जालंधर के इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा कि अगर उनके माता-पिता और बहनों ने त्याग नहीं किया होता तो वह अपने करियर में यहां तक नहीं पहुंच पाते। उनके पिता सरदार सरदेव सिंह छोटे कारोबारी थे और 2000 में उनका निधन हो गया।
उनकी मां अवतार कौर ने पांच बेटियों की परवरिश करने के साथ-साथ उनके क्रिकेट के सपनों को पूरा करने में मदद के लिए शर्ट की सिलाई-कढ़ाई जैसे छोटे-मोटे काम भी किए। उन्होंने कहा, “पिता साहब का आशीर्वाद था, माता जी का आशीर्वाद था। मेरी बहनों ने बहुत त्याग किया जिसकी वजह से मुझे ये सारी उपलब्धियां और खुशियां मिलीं।
मैं हर चीज के लिए बहुत आभारी हूं।’’ हरभजन मैदान पर भिड़ने के लिए जाने जाते थे और उनके आलोचकों को लगता था कि कई बार वह खुद भी विवाद मोल लेते थे लेकिन मैदान के बाहर यही व्यक्ति कहता है कि वह अपने लिए महत्वपूर्ण रिश्ते को बचाने के लिए खुशी-खुशी बहस हार सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक बार एक पॉडकास्ट में सुना था कि कभी-कभी रिश्ते को बचाने के लिए हारना जरूरी होता है। अगर आप कभी-कभी हार जाते हैं तो अंत में जीत जाते हैं।’’ हालांकि वह यह स्वीकार करते हैं कि क्रिकेट प्रशंसकों ने मैदान पर जिस जुझारू हरभजन को देखा है वह उनके वास्तविक स्वभाव के अधिक करीब था।
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उन्होंने कहा, “वो असली हरभजन था। वह मैदान पर भिड़ता था, लड़ता था और जीतता था। अब खेल लिया, बीवी है, बच्चे हैं जो बड़े हो गए हैं।
अब मेरे लिए क्रिकेट का मैदान नहीं है। लेकिन क्रिकेट की वजह से मैंने कुछ चीजें सीखी हैं, भले ही मैं बहुत पढ़ा-लिखा नहीं हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जीवन में विनम्र होना बहुत जरूरी है। इससे आपको चीजों को समय पर समझने में मदद मिलती है।
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मैं नहीं चाहता कि मुझे मेरे क्रिकेट रिकॉर्ड के आधार पर आंका जाए।’’ हरभजन ने कहा, ‘‘क्योंकि अगर मैं एक अच्छा इंसान नहीं बन पाया तो मेरी जिंदगी व्यर्थ है। अगर कोई मुझे आंकना चाहे तो मैं चाहता हूं कि वह कहे कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसने कितने विकेट लिए, वह एक अच्छा इंसान रहा।’’ इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने 103 टेस्ट में 417 विकेट लिए हैं। हरभजन को अपने जीवन और करियर पर फिल्म बनने में कोई आपत्ति नहीं होगी।
उनके करियर में मैदान और मैदान के बाहर कई ऐसी घटनाएं रही हैं जो सुर्खियों में छाई थीं। मुख्य भूमिका के लिए उनकी पसंद ‘उरी’ के अभिनेता विक्की कौशल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘विक्की कौशल पंजाबी हैं, होशियारपुर क्षेत्र से आते हैं और शानदार अभिनेता हैं।
Roti Benefits: हर रोटी में छिपा है अलग फायदा, जानें गेहूं से बेसन तक किसके लिए कौन सी रोटी बेहतर
Best Roti For Health: रोटी भारतीय थाली का सबसे जरूरी हिस्सा है। दाल हो या सब्जी, रोटी के बिना खाना अधूरा सा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आटा बदलने से रोटी के फायदे भी बदल जाते हैं? गेहूं के अलावा ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का और बेसन की रोटी भी खाने में शामिल की जा सकती है।
अगर आप रोज एक ही तरह की रोटी खाकर बोर हो गए हैं, तो आटे में थोड़ा बदलाव कर सकते हैं। इससे स्वाद में भी नयापन आएगा और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलेंगे। आइए जानते हैं किस आटे की रोटी में क्या खास है।
1.गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी ज्यादातर घरों में रोज बनती है। साबुत गेहूं के आटे की रोटी में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कुछ मात्रा में प्रोटीन मिलता है। यह रोज के खाने का आसान और अच्छा विकल्प है। इसे सामान्य और संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। रोटी के लिए साबुत गेहूं का आटा लेना बेहतर रहता है।
2.ज्वार की रोटी
ज्वार एक मिलेट यानी मोटा अनाज है। इसमें फाइबर पाया जाता है और यह ग्लूटेन-फ्री भी होता है। ज्वार की रोटी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है, जो अपनी थाली में अलग-अलग अनाज शामिल करना चाहते हैं। इसे दाल, सब्जी या दही के साथ खाया जा सकता है।
3.बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी खासकर सर्दियों में खूब पसंद की जाती है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। यह खाने में स्वादिष्ट होने के साथ थाली में एक अलग अनाज जोड़ती है। बाजरे की रोटी को सब्जी या दही के साथ खाना एक अच्छा कॉम्बिनेशन है।
4.रागी की रोटी
रागी यानी नाचनी में कैल्शियम और फाइबर पाया जाता है। इसे रोटी के अलावा चीला और डोसा बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। जो लोग अपनी डाइट में कैल्शियम और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ बढ़ाना चाहते हैं, वे रागी को शामिल कर सकते हैं।
5.मक्के की रोटी
मक्के की रोटी और सरसों का साग देसी खाने का फेमस कॉम्बिनेशन है। मक्के में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर मिलता है। अगर आप गेहूं से अलग अनाज खाना चाहते हैं, तो मक्के की रोटी ट्राई कर सकते हैं।
6.बेसन की रोटी
बेसन चने से बनता है और इसमें प्रोटीन पाया जाता है। बेसन की रोटी या चीला खाने में शामिल करने से डाइट में प्रोटीन का एक और स्रोत जुड़ सकता है। इसे अकेले या किसी दूसरे आटे के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
रोटी के साथ थाली भी रखें बैलेंस
सिर्फ आटा बदलने से खाना पूरी तरह हेल्दी नहीं हो जाता। रोटी के साथ दाल, हरी सब्जी, दही और सलाद जैसी चीजें भी शामिल करें। इससे भोजन ज्यादा संतुलित रहेगा।
रोटी रोज की हो सकती है, लेकिन आटे में बदलाव करके आप स्वाद के साथ खाने में अलग-अलग पोषक तत्व भी डाइट में जोड़ सकते हैं।
(disclaimer): अगर आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी बीमारी है, तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
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