कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 14 अगस्त को उन खबरों पर चिंता जताई कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोक दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए स्थिति को "बेहद चिंताजनक" बताया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। गांधी ने आरोप लगाया कि चीन के खिलाफ़ कार्रवाई करने के बजाय, मोदी सरकार इस मुद्दे पर मीडिया कवरेज को दबाने की कोशिश कर रही है।
X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर हमारी सेना को पेट्रोलिंग करने से रोक दिया है – यह बेहद चिंताजनक है। लेकिन इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात राजनाथ सिंह जी, अमित शाह जी और नरेंद्र मोदी जी की चुप्पी है। चीन को रोकने के बजाय, मोदी सरकार इस खबर को दबाने के लिए मीडिया पर दबाव डाल रही है। उन्होंने गलवान झड़प के बाद प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन ने भारत की कोई ज़मीन नहीं कब्ज़ाई है; गांधी का कहना था कि इस बयान से देश को नुकसान पहुँचा है।
गांधी ने आगे कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय प्रधानमंत्री की छवि बचाने की कोशिशें की जा रही हैं। पोस्ट में लिखा था कि देश को आज भी गलवान के बाद प्रधानमंत्री का वह बयान याद है, जिसमें उन्होंने यह कहकर भारत को भारी नुकसान पहुँचाया कि चीन ने हमारी ज़मीन का एक इंच भी हिस्सा नहीं लिया है। आज भी उनकी छवि बचाने का वही काम जारी है – और जो प्रधानमंत्री देश की सुरक्षा से ज़्यादा अपनी झूठी छवि को अहमियत देता है, वह देश के लिए बेहद खतरनाक है।
इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों में कथित बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग और सीमावर्ती इलाकों तक पहुँच में कथित बदलावों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए। खड़गे ने पूछा कि क्या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने टक्सिंग के पास अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और क्या भारत की पहुँच शेरा-5 (एक तय पेट्रोलिंग पॉइंट) तक नियमित रूप से नहीं रही है।
X पर लिखते हुए खड़गे ने कहा कि गलवान के बाद अब अरुणाचल प्रदेश? चिंताजनक खबरें बताती हैं कि चीन अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में और अंदर आने की कोशिश कर रहा है, जो हमारे देश का अभिन्न अंग है। इस पर मोदी सरकार से तुरंत जवाब की मांग है। क्या PLA ने टक्सिंग के पास अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और क्या भारत की शेरा-5 (जो एक तय पेट्रोलिंग पॉइंट है) तक नियमित पहुंच खत्म हो गई है? इस संवेदनशील इलाके में सर्दियों के दौरान भारतीय पेट्रोलिंग सीमित क्यों रहती है, जबकि PLA पूरे साल वहां मौजूद रहती है? स्थानीय समुदायों के लिए पारंपरिक चरागाह और शिकार के इलाके क्यों पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं?
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ड्रग तस्करी के भगोड़े सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद हिरासत में ले लिया। गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, दिल्ली के सरोजिनी नगर के पिल्लानजी के रहने वाले बसोया को NCB के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड नोटिस के बाद जून 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में गिरफ़्तार किया गया था। भारतीय एजेंसियों और UAE अधिकारियों के बीच लगातार तालमेल के ज़रिए उनकी भारत वापसी संभव हो पाई।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और Ruthless अप्रोच अपनाते हुए उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है। नशीले पदार्थों के ख़िलाफ़ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए NCB ने UAE से फ़रार ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की। अपराधी का पता लगाने के लिए ‘टॉप टु बॉटम' और ‘बॉटम टु टॉप’ अप्रोच के ज़रिए, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय क़ानून की पकड़ से बच नहीं सकते।
यह मामला फरवरी 2024 में पुणे में शुरू हुआ, जब पुणे सिटी पुलिस ने 500 ग्राम मेफेड्रोन ज़ब्त किया। इसके बाद ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क की पहचान और उसे खत्म करने के लिए Top to Bottom और Bottom to Top तक की रणनीति अपनाते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया। बाद की जांच और कार्रवाई के दौरान पुणे से लगभग 867 किलोग्राम और दिल्ली से 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया, जिससे कुल बरामदगी लगभग 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन हो गई। इसके बाद मामले को आगे की जांच के लिए NCB की मुंबई ज़ोनल यूनिट को सौंप दिया गया।
जांच में बसोया की पहचान एक अहम विदेशी ऑपरेटिव और कथित साज़िशकर्ता के तौर पर हुई है। वह विदेश से सिंडिकेट की गतिविधियों को कोऑर्डिनेट करता था और भारत से दूसरे देशों में मेफेड्रोन की खेप भेजने में मदद करता था। दिल्ली में बरामद हुई लगभग 970 किलोग्राम मेफेड्रोन की एक बड़ी खेप, कथित तौर पर उसके जुड़े हुए कूरियर चैनलों के ज़रिए एक्सपोर्ट करने की तैयारी से संबंधित थी। उसकी भूमिका घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और तस्करी नेटवर्क को विदेशी डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों से जोड़ने वाली एक अहम कड़ी के तौर पर सामने आई।
बसोया का नाम इंटरनेशनल कोकीन तस्करी से जुड़े दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक अलग मामले में भी सामने आया है। अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ड्रग तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली, हापुड़ और गाजियाबाद में गोदामों और अन्य जगहों के साथ-साथ गुजरात के अंकलेश्वर में एक फैक्ट्री से भी भारी मात्रा में ड्रग्स ज़ब्त किए गए। इन मिले-जुले ऑपरेशन्स में 1,300 किलोग्राम से ज़्यादा कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई। गिरोह की जांच से पता चला कि कोकीन और अन्य ड्रग्स की खरीद, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन के काम को मैनेज करने में बसोया की कथित भूमिका थी।
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