Silver Rate Today: चांदी में आज आई मामूली गिरावट, जानिये 8 जून का सिल्वर रेट
Silver Price Today: आज हफ्ते के पहले दिन चांदी के भाव में मामूली गिरावट आई है। सोमवार 8 जून को चांदी का रेट 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, केरल के बुलियन मार्केट में चांदी का दाम आज 2,64,900 रुपये प्रति किलोग्राम रहा
Somvati Amavasya 2026: 3 साल बाद बना विशेष संयोग, पितरों की कृपा पाने के लिए करें ये सरल उपाय
Somvati Amavasya 2026: ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या इस वर्ष 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है। सोमवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग बनने से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि पितृ पूजन, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष बात यह है कि अधिकमास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग लगभग तीन वर्षों बाद बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। साथ ही पितरों के निमित्त किए गए दान और तर्पण से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है तथा जीवन में आ रही कई प्रकार की बाधाएं दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर कौन-से उपाय करना शुभ माना जाता है।
जरूरतमंदों को कराएं भोजन
सनातन परंपरा में अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दानों में गिना गया है। माना जाता है कि अमावस्या के दिन किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराने या अन्न का दान करने से पितरों को संतुष्टि प्राप्त होती है। इस दिन आप अपनी क्षमता के अनुसार गरीब, जरूरतमंद या साधु-संतों को भोजन करा सकते हैं। घर पर बने भोजन का दान भी पुण्यदायी माना जाता है। यह उपाय परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।
जूते-चप्पलों का दान करें
सोमवती अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को जूते या चप्पलों का दान करना भी शुभ माना जाता है। आप किसी अनाथालय, वृद्धाश्रम या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को यह उपयोगी वस्तु भेंट कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली कई परेशानियां कम हो सकती हैं। साथ ही यह दान शनि से संबंधित कष्टों को कम करने में भी सहायक माना जाता है।
काले तिल का दान और तर्पण
अमावस्या तिथि पर काले तिल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों के नाम से तर्पण करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त जरूरतमंदों को काले तिल का दान भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष के प्रभाव में कमी आती है और पितरों की कृपा परिवार पर बनी रहती है। यह उपाय मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला भी माना जाता है।
दीपदान का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मंदिर, नदी तट या किसी धार्मिक स्थल पर दीपक प्रज्ज्वलित कर सकते हैं। इसके अलावा पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक विश्वास है कि दीपदान से जीवन में व्याप्त नकारात्मकता दूर होती है और पितरों के साथ-साथ देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
पीपल वृक्ष की पूजा करें
अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष का पूजन विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा के साथ जल अर्पित कर दीपक जलाने और वृक्ष की परिक्रमा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। कई लोग इस दिन पीपल के नीचे बैठकर भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण भी करते हैं। यह उपाय आध्यात्मिक उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है। जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में शिव पूजा, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करने से विशेष शुभ फल मिलने की मान्यता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।




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