Responsive Scrollable Menu

फिजिकल हेल्थ- डिप्थीरिया से 2 बच्चों की मौत:इन 6 लक्षणों को इग्नोर न करें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, बच्चों को वैक्सिन जरूर लगवाएं

बीते दिनों महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव से डिप्थीरिया (गलघोंटू) के तीन मामले सामने आए। इनमें छह महीने और 11 साल के दो बच्चों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों बच्चों को डिप्थीरिया के टीके नहीं लगे थे। डिप्थीरिया एक संक्रामक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो मुख्य रूप से गले और रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित करता है। समय पर टीकाकरण और इलाज न मिलने पर ये जानलेवा हो सकता है। 'नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2022' के मुताबिक, साल 2020 में भारत में डिप्थीरिया के 1586 मामले दर्ज हुए, जिनमें 22 लोगों की मौत हुई। वहीं 2021 में 3677 मामले दर्ज हुए, जिनमें 47 लोगों की जान गई थी। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में हम डिप्थीरिया के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- डिप्थीरिया (गलघोंटू) क्या है? जवाब- यह एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो ‘कोरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया’ (Corynebacterium diphtheriae) नामक बैक्टीरिया से होता है। सवाल- इसे ‘गलघोंटू’ क्यों कहा जाता है? जवाब- डिप्थीरिया में गले और टॉन्सिल पर मोटी लेयर बन जाती है, जो सांस की नली को ब्लॉक कर सकती है। इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है और गला घुटने जैसा महसूस होता है। यही वजह है कि इसे ‘गलघोंटू’ कहा जाता है। सवाल- डिप्थीरिया कैसे फैलता है? जवाब- यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और संपर्क से फैलता है। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या डिप्थीरिया सिर्फ बच्चों को ही होता है? जवाब- नहीं, यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। हालांकि जिन बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है या जिन वयस्कों ने समय पर बूस्टर डोज नहीं ली है, उन्हें रिस्क ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में भी यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। सवाल- किन बच्चों को डिप्थीरिया का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- इन बच्चों को रिस्क ज्यादा होता है- सवाल- डिप्थीरिया के लक्षण क्या हैं? जवाब- डिप्थीरिया के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2-5 दिन में दिखाई देते हैं। कुछ लोगों में लक्षण नहीं दिखते या बहुत हल्के हो सकते हैं। इसके बावजूद वे संक्रमण फैला सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या डिप्थीरिया सिर्फ गले को प्रभावित करता है? जवाब- नहीं, गंभीर मामलों में डिप्थीरिया का टॉक्सिन ब्लड स्ट्रीम के जरिए अन्य अंगों तक पहुंच सकता है। इससे- सवाल- डॉक्टर डिप्थीरिया को कैसे डायग्नोस करते हैं? जवाब- डिप्थीरिया के लक्षण दिखने पर इसकी पुष्टि के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं- थ्रोट स्वैब और कल्चर टेस्ट: शुरुआती स्टेज में गले से सलाइवा/टिश्यू सैंपल लेकर लैब में बैक्टीरिया की पहचान की जाती है। टॉक्सिन टेस्ट: डिप्थीरिया एडवांस स्टेज में होने पर टॉक्सिन्स बनाने लगता है। इस टेस्ट से इसका पता लगाया जाता है। ब्लड टेस्ट: गंभीर मामलों में संक्रमण के शरीर में फैलने का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट कराया जाता है। सवाल- डिप्थीरिया का इलाज कैसे होता है? जवाब- इलाज का उद्देश्य बैक्टीरिया को खत्म करना और उसके टॉक्सिन के असर को रोकना होता है। इसके लिए डॉक्टर- सवाल- डिप्थीरिया से बचने का सबसे असरदार तरीका क्या है? जवाब- इसके लिए DPT (डिप्थीरिया, पर्टुसिस एंड टिटनेस)/पेंटावेलेंट वैक्सिन दी जाती है। यह वैक्सिन शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है और कॉम्प्लिकेशंस से बचाती है। वैक्सिन पूरे देश में ‘राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम’ के तहत फ्री में लगाई जाती है। इसलिए- वैक्सिन से जुड़े जरूरी सवाल सवाल- डिप्थीरिया की वैक्सिन कब लगती है? जवाब- डिप्थीरिया से बचाव के लिए बच्चों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत कई चरणों में वैक्सिन दी जाती है। समय पर सभी डोज और बूस्टर लगवाना जरूरी है। वैक्सिन चार्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर बच्चे की वैक्सिन मिस हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। आमतौर पर छूटी हुई डोज पूरी की जा सकती है। इसके लिए- सवाल- क्या वैक्सिन लगने के बाद भी डिप्थीरिया हो सकता है? जवाब- हां, वैक्सिन लगने के बाद भी कुछ मामलों में डिप्थीरिया हो सकता है। टीका इसके कॉम्प्लिकेशंस से सुरक्षा देता है। इसलिए टीकाकरण कराने वाले लोगों में बीमारी आमतौर पर ज्यादा गंभीर नहीं होती है। सवाल- किन इलाकों में डिप्थीरिया का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- डिप्थीरिया का रिस्क उन इलाकों में ज्यादा होता है, जहां टीकाकरण का कवरेज कम है और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है। भीड़भाड़ और खराब हाइजीन वाले क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। सवाल- क्या डिप्थीरिया के मरीज को आइसोलेट करना जरूरी है? जवाब- हां, मरीज को अलग रखने से संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। सवाल- किन स्थितियों में डॉक्टर को तुरंत दिखाना जरूरी है? जवाब- डिप्थीरिया के कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को बिल्कुल इग्नोर न करें। जैसेकि- सवाल- क्या डिप्थीरिया में कोई घरेलू उपाय किए जा सकते हैं? जवाब- नहीं, यह मेडिकल इमरजेंसी है। इसलिए डॉक्टर की निगरानी जरूरी है। कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- डिप्थीरिया कब जानलेवा हो सकता है? जवाब- समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा हो सकता है। इन स्थितियों में खतरा बढ़ जाता है- ……………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- इबोला वायरस बना ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी: भारत भी अलर्ट पर, क्या आपको भी खतरा है, डॉक्टर से जानें हर सवाल का जवाब ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ (WHO) ने इबोला वायरस को ‘ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया है। इसके बाद भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। कांगो, युगांडा और सूडान की यात्रा करने वालों को खासतौर पर सावधानी बरतने को कहा गया है। पूरी खबर पढ़िए…

Continue reading on the app

घरेलू LPG सिलेंडर ₹29 महंगा, दिल्ली में ₹942 का मिलेगा:टॉप-10-कंपनियों में से 7 की वैल्यू ₹1.25 लाख करोड़ घटी; शाओमी 17T लॉन्च, कीमत ₹54,999

कल की बड़ी खबर सिलेंडर से जुड़ी रही। घरेलू LPG सिलेंडर 29 रुपए महंगा हो गया है। दिल्ली में अब 14.2 किलो वाला गैस सिलेंडर ₹913 से बढ़कर ₹942 का हो गया है। वहीं मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1.25 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा कम हुई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें... 1. घरेलू LPG सिलेंडर आज से ₹29 महंगा: दिल्ली में ₹942, पटना में 1040 का मिलेगा; 3 महीने में दाम ₹89 बढ़े घरेलू LPG सिलेंडर 29 रुपए महंगा हो गया है। नई दरें आज रात 12 बजे से लागू हो गई हैं। दिल्ली में अब 14.2 किलो वाला गैस सिलेंडर ₹913 से बढ़कर ₹942 का हो गया है। तीन महीने में दूसरी बार LPG की कीमत बढ़ाई गई है। इससे पहले 7 मार्च को LPG सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए गए थे। इस तरह 3 महीने के अंदर घरेलू सिलेंडर 89 रुपए महंगा हो गया है। न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी ऊर्जा लागत और घरेलू बिक्री पर नुकसान के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. टॉप-10-कंपनियों में से 7 की वैल्यू ₹1.25 लाख करोड़ घटी: रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹39,718 करोड़ कम हुई; TCS-एयरटेल का मार्केट कैप भी घटा मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1.25 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा कम हुई है। रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹39,718 करोड़ घटकर ₹17.47 लाख करोड़ पर आ गई है। वहीं TCS की मार्केट वैल्यू ₹20,134 करोड़ घटकर ₹7.95 लाख करोड़ रह गई है। इसके अलावा एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, LIC, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर की मार्केट वैल्यू भी घटी है। वहीं बीते हफ्ते SBI, ICICI बैंक और HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. कल गिरावट के साथ खुल सकता है बाजार:विदेशी निवेशकों ने ₹31,120 करोड़ के शेयर बेचे; ईरान-अमेरिका तनाव से जोखिम बढ़ा भारतीय बाजार में कल यानी 8 मई से शुरू होने वाले हफ्ते की शुरुआत गिरावट के साथ हो सकती है। गिफ्ट निफ्टी 350 अंक नीचे है जिससे ये संकेत मिल रहे हैं। वहीं इस हफ्ते भी ट्रेडर्स की नजर विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लेकर ईरान-अमेरिका तनाव जैसे फैक्टर्स पर रहेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. शाओमी 17T लॉन्च, कीमत ₹54,999 से शुरू: 120x जूम के साथ 50MP लाइका कैमरा और 6500mAh की बड़ी बैटरी; शाओमी TV FX मिनी भी पेश टेक कंपनी शाओमी ने भारत में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन शाओमी 17T और शाओमी FX मिनी LED TV लॉन्च की हैं। स्मार्टफोन 120x जूम के साथ 50MP लाइका कैमरा, 6500mAh बैटरी और फ्लैगशिप लेवल फीचर्स के साथ आया है। कंपनी ने इस फोन को खासतौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो प्रीमियम डिजाइन, पावरफुल परफॉरमेंस और हाई-एंड कैमरा एक्सपीरियंस चाहते हैं। शाओमी 17T को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए...

Continue reading on the app

  Sports

Vaibhav Sooryavanshi और यकीन न कर पाने वाला वो यादगार समय, जब मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar भी रह गए हैरान

भारतीय क्रिकेट के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर आसानी से हैरान होने वाले इंसान नहीं हैं। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस अक्सर बहुत सोच-समझकर, नपे-तुले शब्दों और सावधानी भरी राय के साथ की जाती हैं। वे एक ऐसे प्रशासनिक और पेशेवर व्यक्ति हैं जो हर चीज़ को तर्कसंगत और आंकड़ों के नज़रिए से देखते हैं। लेकिन शनिवार, 6 जून को मुंबई में BCCI हेडक्वार्टर में कुछ ऐसा हुआ, जिसने क्रिकेट के स्थापित नियमों और औपचारिकता की भाषा को पीछे छोड़ दिया।
 

इसे भी पढ़ें: INDIA Bloc Meeting in Delhi | ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक, भाजपा से मुकाबले की रणनीति पर होगी चर्चा, जानें कौन-कौन होगा शामिल


अगरकर ने भारत की T20 टीम में 15 साल के एक खिलाड़ी को चुना था—जो राष्ट्रीय टीम के लिए चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी हैं। यहाँ तक कि महान सचिन तेंदुलकर से भी कम उम्र के, जब उन्होंने पहली बार भारत की नीली जर्सी पहनी थी। और जब पत्रकारों ने उनसे इस ऐतिहासिक और हैरान करने वाले फैसले का कारण पूछा, तो अगरकर कुछ इस तरह रुके जो बिल्कुल स्वाभाविक और बिना किसी बनावट के था। उन्होंने अपने कंधे उचकाए और कहा: "मुझे लगता है कि उसने खुद को ही चुन लिया है, सच कहूँ तो। आप ही बताइए, यार?"

'आप ही बताइए।' किसी क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा सालों में कही गई यह शायद सबसे ईमानदार बात थी। कोई आँकड़ा नहीं, कोई रणनीतिक तर्क नहीं। बस एक इंसान का यह मानना ​​कि कुछ चीज़ें सिलेक्शन कमिटी की भाषा और पैमानों से परे होती हैं।
 

इसे भी पढ़ें: Gorakhpur Pregnant Woman Death | प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों ने छह घंटे तक शव रखकर प्रदर्शन किया, अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य मंत्री को घेरा


अगरकर ने खुलकर बताया कि कैसे वैभव ने लगभग अकेले दम पर राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल के प्लेऑफ़ तक पहुँचाया। दुनिया के सबसे ज़्यादा कॉम्पिटिटिव और दबाव वाले क्रिकेट माहौल में एक 15 साल का लड़का खेल रहा था, और उसने न सिर्फ़ एक बार बल्कि लगातार दो पूरे सीज़न तक ऐसा करके दिखाया। अगरकर ने कहा, "वह कितना ज़बरदस्त खेल दिखा सकता है और गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हमने, और हर उस व्यक्ति ने जिसने भारत में T20 क्रिकेट देखा है, उससे बहुत उम्मीदें लगाई हैं।"

उस पल में मुख्य चयनकर्ता एक अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि स्टेडियम की सस्ते टिकट वाली सीट पर बैठे किसी आम क्रिकेट प्रशंसक की तरह बात कर रहे थे।

हैरानी, ​​शोर नहीं: जब सारा आकलन रुक गया
इस गर्मी में भारतीय क्रिकेट के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसे खेल की आम शब्दावली में समझाना मुश्किल है। भारतीय क्रिकेट फ़ैन्स बहुत बारीकी से देखने वाले लोग हैं। हम खेली गई गेंदों को गिनते हैं, खिलाड़ियों के आमने-सामने के मुक़ाबलों का विश्लेषण करते हैं और पावरप्ले खत्म होने से पहले ही स्ट्राइक रेट पर बहस करने लगते हैं। हमारा जुनून सबसे समझदार और साथ ही सबसे थका देने वाला होता है। हम अक्सर चीज़ों को बस महसूस नहीं करते, बल्कि उनका गणितीय आकलन करते हैं।

और फिर वैभव सूर्यवंशी बल्लेबाज़ी करने उतरे, और क्रिकेट प्रेमियों का सारा आकलन थम गया
 मैदानों और प्रेस बॉक्सों के चक्कर काटते हुए, मैंने भीड़ की आवाज़ को समझने के लिए काफ़ी क्रिकेट देखा है-नारे, ढोल-नगाड़े और सुनियोजित समर्थन का शोर। मुझे पता है कि जब भीड़ छक्के पर चीयर करती है या चौका लगने पर दहाड़ती है, तो कैसी आवाज़ आती है। लेकिन सीज़न की शुरुआत में लखनऊ के श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में, मैंने कुछ अलग सुना।

स्टेडियम राजस्थान रॉयल्स के गुलाबी रंग में रंगा हुआ था, लेकिन भीड़ में एक अलग ही ऊर्जा थी। यह किसी खास टीम के समर्थन का शोर नहीं था। इसके नीचे एक शांत अविश्वास था, मानो लोगों को डर हो कि अगर उन्होंने एक पल के लिए भी नज़र हटाई, तो वे वह इतिहास मिस कर देंगे जिसे देखने वे आए थे। और वे जिस लड़के को देखने आए थे, उसने अभी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा भी नहीं दी थी; वह अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज़ों का सामना करने के लिए क्रीज़ पर ऐसे जा रहा था जैसे उसे घबराने के लिए कभी कहा ही न गया हो।

लखनऊ राजस्थान नहीं है। ये किसी खास इलाके के समर्थक नहीं थे। उनमें से कई बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए थे—ऐसे समुदाय जिन्होंने चुपचाप वैभव को अपना मान लिया था। मैदान के आस-पास लोग उसका नाम उसका सरनेम लेकर नहीं, बल्कि बस 'वैभव' कहकर पुकार रहे थे—एक ऐसी आत्मीयता के साथ जिसका भूगोल से कोई लेना-देना नहीं था, बल्कि वह किसी गहरी, बुनियादी भावना से जुड़ा था। वह उनका अपना लड़का था।

साठ से छह तक: पीढ़ियों को जोड़ता एक नाम
यह एहसास न्यू चंडीगढ़ में एलिमिनेटर मैच के दौरान पूरी तरह साफ़ हो गया, जहाँ राजस्थान का मुक़ाबला सनराइजर्स हैदराबाद से था और सब कुछ दांव पर लगा था। मैदान पर छह साल और दस साल के स्कूली बच्चों की एक पूरी पीढ़ी एक जैसी 'सूर्यवंशी' लिखी हुई शर्ट पहने घूम रही थी। बच्चों ने खुद बैनर बनाए थे, जिन पर लिखे अक्षर ऊंचे-नीचे थे, लेकिन उनमें जज्बा साफ दिख रहा था।

उस भीड़ में 6 साल के बच्चे से लेकर 60 साल के बुज़ुर्ग तक शामिल थे। एक ही लड़के ने भारतीय जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर मौजूद लोगों को एक ही जगह पर इकट्ठा कर दिया था।

मैंने वहाँ हरियाणा के एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से बात की, जो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ आए थे। दोनों बच्चों ने वैभव की शर्ट पहनी हुई थी और वे बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। वे सुबह से ही यात्रा कर रहे थे क्योंकि बच्चे हफ़्तों से इसकी ज़िद कर रहे थे। जब मैंने उनसे पूछा कि उन्हें वैभव में क्या खास लगता है, तो उन्होंने जवाब देने से पहले एक पल के लिए अपने बच्चों की ओर देखा। जब उन्होंने जवाब दिया, तो वे असल में क्रिकेट के बारे में बात नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा:

"यह अपनी खुद की कामयाबी जैसा लगता है"
तब से मैंने उन शब्दों के बारे में बहुत सोचा है। वे ऐसी बात समझाते हैं जिसे आँकड़े नहीं समझा सकते। वैभव सूर्यवंशी को सिर्फ़ देखा नहीं जाता, लोग उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। लोग उनके लिए वैसे समर्थन नहीं करते जैसे किसी टीम या खिलाड़ी के लिए करते हैं; वे अपनी कहानी का कुछ हिस्सा उनकी कहानी में जोड़ देते हैं और फिर उम्मीद और बेचैनी के मिले-जुले अहसास के साथ देखते हैं कि आगे क्या होता है।

त्याग और भरोसे की वो पिच
उनकी पृष्ठभूमि ही कुछ ऐसी है कि यह सब होना लगभग तय था। एक पिता जिन्होंने अपने बेटे के सपने के लिए ज़मीन बेची। एक माँ जो पटना तक 100 किलोमीटर की यात्रा से पहले सुबह तीन बजे उठकर नाश्ता तैयार करती थीं। समस्तीपुर के एक गाँव में घर के आँगन में बनी वो पिच। न्यू चंडीगढ़ के उस स्टेडियम में मौजूद हर परिवार की ज़िंदगी में इस कहानी का कोई न कोई रूप मौजूद था—शायद क्रिकेट नहीं, लेकिन त्याग, भरोसा और बच्चे के भविष्य में सब कुछ दांव पर लगाने का वह डरावना अहसास ज़रूर था।

जब वह उस रात बल्लेबाज़ी करने उतरे, तो भीड़ का शोर किसी आम छक्के का शोर नहीं था। वह उस सब का इज़हार था जो अब तक लोगों के दिलों में दबा हुआ था।

जब प्रेस बॉक्स भी अपना काम भूल गया...
यह जादू सिर्फ स्टैंड्स तक सीमित नहीं था, प्रेस बॉक्स भी इससे अछूता नहीं रहा। वहाँ का आम माहौल, बेपरवाही दिखाने का दिखावा, सोच-समझकर अपनाई गई तटस्थता और परवाह ज़ाहिर करने से बचने की पेशेवर आदत—सब कुछ धरा का धरा रह गया। उस शाम जब वैभव एक शानदार प्लेऑफ़ शतक बनाने से बस थोड़ा सा चूक गए, तो कमरे में छाई निराशा उतनी ही साफ़ दिख रही थी जितनी स्टेडियम में बैठे दर्शकों के चेहरों पर। सबके चेहरे उतर गए, लोगों ने अपने लैपटॉप बंद कर दिए। हमने, बिना सोचे-समझे, उनसे उस कहानी से कहीं ज़्यादा की उम्मीद करना शुरू कर दिया था। एक खिलाड़ी किसी रिपोर्टर के साथ ऐसा बहुत कम ही कर पाता है—उन्होंने हमें हमारा पेशेवर काम तक भुला दिया था।

2026 सीज़न में उन्होंने जो खेल दिखाया, वह आंकड़ों के नज़रिए से लगभग अविश्वसनीय था:

कुल रन: 776 रन
स्ट्राइक रेट: 237.00

रिकॉर्ड तोड़ छक्के: 72 छक्के (क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, और वह भी गेल की 456 गेंदों के मुकाबले सिर्फ़ 266 गेंदों में!)

ऐतिहासिक कीर्तिमान: T20 इतिहास के पहले बल्लेबाज़ जिन्होंने एक टूर्नामेंट में 200 से ज़्यादा के स्ट्राइक रेट से 600 से ज़्यादा रन बनाए।

लेकिन वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाज़ी देखने की बात ही कुछ और है; आंकड़े उस अनुभव के साथ न्याय नहीं करते। वे उस चीज़ को सिर्फ़ गणित में बदल देते हैं जो असल में किसी जीवंत कलाकारी जैसी लगती थी।

दुनिया कर रही है वैभव का हौसला बुलंद
पैट कमिंस, जिन्हें उस लड़के के ख़िलाफ़ फेंकी गई पहली ही गेंद पर छक्का खाने का निजी अनुभव था, ने उन्हें बस "मेरा नया पसंदीदा खिलाड़ी" कहा। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान और क्रिकेट के सबसे कामयाब तेज़ गेंदबाज़ों में से एक की तरफ़ से यह कोई साधारण चापलूसी नहीं थी, बल्कि एक ऐसे दिग्गज की स्वीकारोक्ति थी जिसने सब कुछ आज़माया है और अब वह हैरान है। उन्होंने कहा, "वह गेंद को इतनी ज़ोर से मारते हैं कि उन्हें खेलते देखना बहुत अच्छा लगता है।"

यहाँ तक कि लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के बीच समर टेस्ट मैच के दौरान—जिसमें भारत शामिल भी नहीं था—कमेंट्री बार-बार सूर्यवंशी की तरफ़ मुड़ जाती थी। इंग्लिश क्रिकेट की जानी-मानी आवाज़ें—माइकल एथरटन और साइमन डोल—अपने ब्रेक के दौरान समस्तीपुर के इस 15 साल के लड़के के बारे में बात कर रहे थे। वैभव से पहले, सिर्फ़ सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली को ही ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर्स से ऐसी बिना शर्त वाली तवज्जो मिली थी। उनकी मौजूदगी ऐसी थी कि उनसे नज़रें हटाना मुश्किल था।

"लगे रहो, बेटे"
एलिमिनेटर मैच से पहले, ट्रेनिंग सेशन के दौरान एक बेहद खूबसूरत लम्हा कैमरे में कैद हुआ। वैभव मैदान के बीच में ही बिना किसी जल्दबाज़ी के महान सुनील गावस्कर और सबा करीम के पास गए और शालीनता से उनके पैर छुए। पास में एक बड़े-बुज़ुर्ग थे और हमारे संस्कारों में ऐसा करना ही चाहिए—वैभव ने बस वही किया।

यह वीडियो क्लिप कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस वाकये से खुद लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर साफ़ तौर पर भावुक हो गए थे। उन्होंने बाद में याद किया कि उन्होंने उस लड़के की पीठ थपथपा कर बस इतना ही कहा था: "लगे रहो, बेटे। लगे रहो।"

और आज पूरा देश भी वैभव से यही कह रहा है—लगे रहो बेटा, क्योंकि तुम्हारी इस कहानी में हम सब अपनी कामयाबी देख रहे हैं।
 
For the latest scores, match updates, and in-depth coverage, explore Live Cricket Updates in Hindi on Prabhasakshi  
Mon, 08 Jun 2026 10:00:00 +0530

  Videos
See all

Guwahati News: असमिया युवक से मारपीट मामले में 5 गिरफ्तार | Dispur Police Action #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-08T05:36:35+00:00

Khan Sir Coaching News: पटना कोचिंग मामले में इस वक्त की बड़ी खबर | #ytshorts #shorts #khansir #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-08T05:42:10+00:00

INDIA Alliance की बैठक से पहले JDU नेता का बड़ा बयान ! | #shortvideo #shorts #indialliance #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-08T05:42:35+00:00

US-Israel-Iran War News Updates: यमन की और से इजरायल पर हमला | Trump | Top News | Aaj Tak #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-08T05:34:46+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers