श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने पर रिकी पोंटिंग ने जताई खुशी, कही ये बात
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने कहा कि वह लंबे समय से श्रेयस की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा करते हैं। पोंटिंग ने कहा, श्रेयस में टीम को आगे ले जाने की काबिलियत है और उन्हें यह जिम्मेदारी मिलना पूरी तरह से सही फैसला है
Explainer: कौन हैं अंजलि कुलथे? जिनका Bharat Bhhagya Viddhaata फिल्म में किरदार निभा रही हैं कंगना रनौत
Who is Anjali Kulathe: मुंबई में 26 नवंबर 2008 की रात भारत के इतिहास की सबसे भयानक रातों में से एक मानी जाती है. इस दिन हुए आतंकी हमलों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. दस पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया, जिनमें छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST), ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, लियोपोल्ड कैफे, नरीमन हाउस और कामा अस्पताल शामिल थे. इस हमले में 160 से ज्यादा लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग घायल हुए.
जब भी 26/11 हमले की बात होती है, तो लोगों को बहादुर पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे, अशोक कामटे, विजय सालस्कर और एनएसजी कमांडोज की याद आती है. लेकिन इसी हमले में एक ऐसी महिला भी थीं, जिन्होंने बिना किसी हथियार और सुरक्षा के कई जिंदगियां बचाईं. उनका नाम है अंजलि कुलथे. अब बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत अपनी अपकमिंग फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के जरिए इसी अनसुनी और प्रेरणादायक कहानी को बड़े पर्दे पर लेकर आ रही हैं. फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और दर्शकों के बीच इसे लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. तो चलिए जानते हैं कौन हैं अंजलि कुलथे?
कौन हैं अंजलि कुलथे?
अंजलि कुलथे मुंबई के कामा एंड अल्बलेस अस्पताल (Cama and Albless Hospital) में स्टाफ नर्स के तौर पर कार्यरत थीं. 26 नवंबर 2008 की रात जब आतंकियों ने सीएसटी स्टेशन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, तब वहां भारी अफरा-तफरी मच गई. स्टेशन पर नरसंहार करने के बाद आतंकवादी अजमल कसाब और उसका साथी अबू इस्माइल कामा अस्पताल की ओर बढ़ गए. उस समय अस्पताल में कई मरीज भर्ती थे, जिनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं. अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीजों की सुरक्षा थी. इसी दौरान अंजलि कुलथे ने ऐसा साहस दिखाया, जिसने उन्हें देश की असली हीरो बना दिया.
जब गोलियों की आवाज सुनते ही लिया बड़ा फैसला
हमले की रात अंजलि कुलथे अस्पताल में अपनी ड्यूटी पर थीं. अचानक बाहर से गोलियों और धमाकों की आवाजें आने लगीं. कुछ ही देर में अस्पताल प्रशासन को समझ आ गया कि आतंकवादी आसपास पहुंच चुके हैं और अस्पताल भी खतरे में है. ऐसे समय में जहां ज्यादातर लोग अपनी जान बचाने के बारे में सोचते, वहीं अंजलि ने मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी. उन्होंने तुरंत अस्पताल में भर्ती करीब 20 गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को एकत्र किया.
अंजलि ने सभी को अस्पताल के एक सुरक्षित कमरे में पहुंचाया. इसके बाद उन्होंने कमरे की लाइटें बंद कर दीं और सभी को पूरी तरह शांत रहने का निर्देश दिया. बाहर गोलियों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं, लेकिन कमरे के भीतर मौजूद महिलाओं और उनके परिवारों को भरोसा था कि अंजलि उनके साथ हैं.
कई घंटों तक बनी रहीं सुरक्षा कवच
स्थिति बेहद खतरनाक थी. आतंकवादी अस्पताल परिसर के आसपास मौजूद थे और किसी भी समय अंदर घुस सकते थे. इसके बावजूद अंजलि कुलथे ने अपना धैर्य नहीं खोया. उन्होंने कई घंटों तक महिलाओं और उनके परिजनों को शांत रखा. अगर उस समय किसी भी तरह की हलचल या आवाज होती, तो आतंकियों का ध्यान उस कमरे की ओर जा सकता था. लेकिन अंजलि की सूझबूझ और समझदारी ने एक बड़े हादसे को टाल दिया. उनकी बहादुरी की वजह से करीब 20 गर्भवती महिलाएं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे सुरक्षित बच गए. यही कारण है कि आज भी उन्हें 26/11 हमले के अनसुने नायकों में गिना जाता है.
कसाब के खिलाफ बनीं अहम गवाह
हमले के बाद जब जांच शुरू हुई और आतंकवादी अजमल कसाब गिरफ्तार हुआ, तब अंजलि कुलथे ने न्यायिक प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वो इस मामले की अहम गवाहों में शामिल थीं. उन्होंने अदालत में जाकर अपने बयान दर्ज कराए और हमले की रात की घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उनकी गवाही ने जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण और उपलब्ध कराए. इस तरह अंजलि ने सिर्फ हमले के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद न्याय दिलाने की प्रक्रिया में भी अपना योगदान दिया.
क्यों खास है 'भारत भाग्य विधाता' फिल्म?
आमतौर पर आतंकवादी हमलों पर बनने वाली फिल्मों में सुरक्षा बलों, पुलिस अधिकारियों या राजनीतिक घटनाओं पर ज्यादा फोकस किया जाता है. लेकिन 'भारत भाग्य विधाता' एक अलग कहानी लेकर आ रही है. यह फिल्म उन डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को श्रद्धांजलि है, जो संकट के समय अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाते हैं.कोविड-19 महामारी के दौरान भी देश ने ऐसे हजारों स्वास्थ्यकर्मियों की बहादुरी देखी थी. फिल्म के जरिए दर्शकों को ये समझने का मौका मिलेगा कि असली हीरो सिर्फ बंदूक उठाने वाले लोग ही नहीं होते, बल्कि वो भी होते हैं जो कठिन परिस्थितियों में इंसानियत का साथ नहीं छोड़ते.
कंगना रनौत निभाएंगी अंजलि कुलथे का किरदार
फिल्म में कंगना रनौत अंजलि कुलथे की भूमिका निभा रही हैं. ट्रेलर में उन्हें एक समर्पित और साहसी नर्स के रूप में दिखाया गया है, जो खतरे के बावजूद अपने मरीजों को बचाने के लिए डटी रहती है. कंगना इससे पहले भी कई बायोपिक और वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्मों में काम कर चुकी हैं. 'मणिकर्णिका', 'थलाइवी' और 'इमरजेंसी' जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐतिहासिक और राजनीतिक किरदार निभाए हैं. अब वो अंजलि कुलथे जैसी वास्तविक नायिका की कहानी को पर्दे पर जीवंत करने जा रही हैं.
क्यों जरूरी है ऐसी कहानियों का सामने आना?
भारत के इतिहास में कई ऐसे नायक और नायिकाएं हैं, जिनकी बहादुरी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. मीडिया और इतिहास की मुख्यधारा में अक्सर कुछ बड़े नाम ही चर्चा में रहते हैं, जबकि कई गुमनाम लोग असाधारण साहस का परिचय देते हैं. अंजलि कुलथे की कहानी ऐसी ही एक कहानी है. उन्होंने न तो किसी पुरस्कार की उम्मीद की और न ही किसी पहचान की. उन्होंने सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया और दर्जनों लोगों की जान बचाई. ऐसी कहानियां नई पीढ़ी को यह सिखाती हैं कि साहस सिर्फ युद्ध के मैदान में नहीं दिखाया जाता, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी असाधारण फैसले लेकर दिखाया जा सकता है.
कब रिलीज होगी फिल्म?
कंगना रनौत स्टारर 'भारत भाग्य विधाता' 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. ट्रेलर को दर्शकों की पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिल रही है और उम्मीद की जा रही है कि फिल्म 26/11 हमले के एक अनसुने अध्याय को लोगों तक पहुंचाने में सफल होगी.
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