तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सत्ता संभालते ही एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। बीजेपी ने सालभर पहले राज्य में जिस बड़े शराब घोटाले का आरोप लगाया था, उस पर अब टीवीके सरकार की शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सामने आया है कि शराब की बिक्री से होने वाली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा 'पार्टी फंड' में जा रहा था, जिसके करीब 3600 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि शराब की थोक और खुदरा बिक्री में लंबे समय से चल रहे इस अनऑफिशियल कैश कलेक्शन सिस्टम को तुरंत खत्म किया जाए। उन्होंने साफ कहा है कि शराब की बिक्री से आने वाला एक-एक रुपया पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे राज्य सरकार के खजाने में जाना चाहिए। आपको बता दें कि तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन एक सरकारी कंपनी है, जिसका राज्य में शराब बेचने पर पूरा एकाधिकार है। सरकार ने इस पूरे सिस्टम को सुधारने के लिए आईएएस पूजा कुलकर्णी को नया आबकारी आयुक्त बनाया है।
कैबिनेट मीटिंग में सीएम का सख्त आदेश
मुख्यमंत्री विजय ने 5 जून को हुई कैबिनेट की मीटिंग में साफ कर दिया कि जनता के पैसे की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में पता चला है कि शराब की हर पेटी पर 90 रुपये, बीयर के हर कार्टन पर 40 रुपये और वाइन के हर कार्टन पर 20 रुपये अवैध रूप से वसूले जा रहे थे। इससे हर साल सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 5 जून को जारी सरकारी आदेश के बाद से इस अवैध वसूली को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने समझाया कि राज्य में हर साल शराब के लगभग 88 लाख केस खरीदे जाते थे और इसका कमीशन राजनीतिक रसूख वाले लोगों की जेब में जाता था। सीएम विजय ने अब इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ दिया है और चेतावनी दी है कि जो भी इस भ्रष्टाचार में दोषी मिलेगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। आबकारी मंत्री विग्नेश ने भी साफ किया कि बोतलों पर ज्यादा कीमत वसूलने का खेल अब बंद हो चुका है।
हर महीने हो रही थी 102 करोड़ की गड़बड़ी
तमिलनाडु में शराब की सप्लाई के लिए बोतलों के साइज के हिसाब से पेटियां तैयार की जाती हैं। जैसे- 180 मिली की 48 बोतलें, 375 मिली की 24 बोतलें और 750 मिली की 12 बोतलों की एक पेटी बनती है। बीयर की भी 12 बोतलों का एक कार्टन होता है।
इन्हीं पेटियों के हिसाब से वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट और रीटेल दुकानों से अवैध वसूली की जा रही थी। TASMAC के आउटलेट्स से हर महीने करीब 88 लाख ग्राहक शराब खरीदते हैं। इतनी बड़ी बिक्री की वजह से हर महीने कम से कम 102 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जा रही थी, जिसे अब पूरी तरह रोक दिया गया है।
धार्मिक और शैक्षणिक स्थलों के पास की 717 दुकानें बंद
सीएम विजय के आदेश के बाद राज्य में नियमों के खिलाफ चल रही कुल 717 शराब की दुकानों को बंद कर दिया गया है। इनमें मंदिरों और चर्च के पास चल रही 276 दुकानें, स्कूलों-कॉलेजों के पास की 186 दुकानें और बस स्टैंड व ट्रांसपोर्ट हब के पास की 255 दुकानें शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 290 दुकानें मदुरै में बंद की गई हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 179, तिरुचि में 84, चेन्नई में 82 और सलेम में 82 दुकानें बंद हुई हैं।
सरकार ने माना है कि इन दुकानों के बंद होने से राज्य को हर साल करीब 8,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान होगा। लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने साफ कर दिया है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए न तो कोई नई दुकान खोली जाएगी और न ही शराब के दाम बढ़ाए जाएंगे। TASMAC से रोजाना लगभग 150 करोड़ रुपये की बिक्री होती है और बंद की गई दुकानें कुल आउटलेट्स का करीब 15 प्रतिशत हैं।
बिना बायोमेट्रिक और आईडी चेक के नहीं मिलेगी शराब
दुकानें बंद करने के अलावा टीवीके सरकार ने युवाओं को नशे से बचाने के लिए शराब खरीदने की उम्र सीमा को सख्ती से 21 साल कर दिया है। अब काउंटर पर बायोमेट्रिक और आईडी प्रूफ की जांच अनिवार्य होगी। अगर कोई कर्मचारी कम उम्र के लोगों को शराब बेचते या तय कीमत से ज्यादा पैसे लेते पकड़ा गया, तो उसे सीधे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इन बड़े सुधारों पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। आबकारी मंत्री विग्नेश ने यह भी साफ किया है कि शराब बिक्री के प्राइवेटाइजेशन का सरकार का कोई इरादा नहीं है। फिलहाल राज्य में TASMAC की करीब 4,048 रजिस्टर्ड दुकानें बची हैं।
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया के दौरे पर रहने वाले हैं। जिनपिंग के इस दौरे और प्योंगयांग में उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन से उनकी होने वाली मुलाकात पर इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। ये दोनों नेता पिछले साल ही बीजिंग में मिले थे, जब चीनी सेना ने एक बहुत बड़ी परेड का आयोजन किया था। लेकिन इस बार खास बात यह है कि खुद शी जिनपिंग उत्तर कोरिया जा रहे हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपने विदेशी दौरे बहुत कम कर दिए हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आए थे, लेकिन 2019 के बाद यह पहली बार है जब चीनी राष्ट्रपति खुद प्योंगयांग जा रहे हैं।
क्यों बेहद खास है जिनपिंग का यह दौरा?
'अल जजीरा' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट विलियम यांग का कहना है कि जिनपिंग अब ज्यादा विदेश यात्राएं नहीं करते हैं। आज के समय में यह एक ट्रेंड बन गया है कि दुनिया भर के बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आते हैं। ऐसे में शी जिनपिंग का खुद चलकर उत्तर कोरिया जाना यह दिखाता है कि चीन इस यात्रा को कितनी ज्यादा अहमियत दे रहा है। आंकड़ों की मानें तो साल 2013 से 2019 के बीच जिनपिंग हर साल औसतन 14 विदेशी दौरे करते थे, लेकिन 2022 से 2025 के बीच यह संख्या घटकर हर साल सिर्फ छह रह गई है।
चीन और उत्तर कोरिया के रिश्ते
अगर पारंपरिक रूप से देखें, तो चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में हमेशा से चीन का पलड़ा भारी रहा है। अमेरिका की एक संस्था 'नेशनल कमिटी ऑन नॉर्थ कोरिया' के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया अपने बिजनेस और व्यापार के लिए 95 परसेंट तक अकेले चीन पर निर्भर था। लेकिन साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब इस पूरे इलाके के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
रूस के करीब आ रहा है उत्तर कोरिया
यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस की खुलकर मदद की है। उसने रूस को बड़े पैमाने पर खतरनाक हथियार, तोपें और अपने सैनिक तक उपलब्ध कराए हैं, जिससे रूस को इस युद्ध में काफी मदद मिली है। साल 2023 के बाद से मॉस्को ने सैनिकों की तैनाती, तोपखाने, गोले और बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदने के बदले उत्तर कोरिया को करीब 14.4 अरब डॉलर का भारी-भरकम भुगतान किया है। यही वजह है कि अब इस क्षेत्र की राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
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