Census 2027 Phase 2: जनगणना 2027 के लिए 40 सवालों की सूची जारी; आजादी के बाद पहली बार दर्ज होगी हर नागरिक की जाति
केंद्र सरकार ने बहुप्रतीक्षित 16वीं राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्ष 2021 में वैश्विक महामारी के चलते स्थगित हुई यह कवायद देश के इतिहास की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना बनने जा रही है।
रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने इस महाअभियान के तहत नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े आंकड़ों को संकलित करने के लिए विस्तृत खाका तैयार किया है, जिसके आधार पर आने वाले वर्षों में देश की विकास नीतियां तय होंगी।
गृह मंत्रालय ने जारी की 40 सवालों की आधिकारिक प्रश्नावली
रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत 'हाउसहोल्ड शेड्यूल' की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस प्रश्नावली में कुल 40 बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनके जरिए प्रगणक घर-घर जाकर हर परिवार के सदस्यों की विस्तृत जानकारी दर्ज करेंगे। इन सवालों में मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय आयु, शैक्षणिक योग्यता, मातृभाषा, धर्म और रोजगार से जुड़े सभी बुनियादी मानक शामिल किए गए हैं।
आजादी के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा संग्रह
इस बार की जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहलू जातिगत विवरण का संग्रह है। स्वतंत्र भारत में 1951 से अब तक केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े ही अलग से दर्ज किए जाते थे, लेकिन इस बार प्रश्नावली में जाति के लिए एक खुला कॉलम दिया गया है।
इसमें उत्तरदाता द्वारा अपनी जो भी जाति बताई जाएगी, प्रगणक उसे सीधे सिस्टम में प्रविष्ट करेंगे, जिससे देश में सभी सामाजिक वर्गों की वास्तविक जनसांख्यिकीय स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कोरोना टीकाकरण और डिजिटल सुविधाओं से जुड़े नए सवाल शामिल
बदलते दौर की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रश्नावली में स्वास्थ्य और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े नए सवाल जोड़े गए हैं। नागरिकों से कोविड-19 रोधी टीके की स्थिति और टीका लगवाने के स्थान की जानकारी मांगी जाएगी।
इसके साथ ही मोबाइल फोन के उपयोग, इंटरनेट कनेक्टिविटी, वाहन, एलपीजी कनेक्शन, पेयजल के मुख्य स्रोत और बैंकिंग सुविधाओं के इस्तेमाल से जुड़े विवरण भी संकलित किए जाएंगे ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच का सटीक आकलन हो सके।
बर्फीले और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग समय सारिणी
भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों को देखते हुए जनगणना का काम दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के गैर-समान व बर्फीले इलाकों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर तक चलेगी, जहां नागरिकों को 17 से 31 अगस्त के बीच खुद ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।
वहीं देश के शेष सभी मैदानी व गैर-पहाड़ी क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का यह मुख्य चरण फरवरी 2027 में एक साथ संचालित किया जाएगा।
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