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अवैध पेड़ कटाई से जुड़ी दो याचिकाओं का हाई कोर्ट ने किया निराकरण, याचिकाकर्ता को दिए ये निर्देश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अवैध पेड़ कटाई से जुड़ी 2018 से लंबित दो याचिकाओं का आज निराकरण कर दिया, अदालत ने कहा दोनों याचिकाओं को दाखिल हुए करीब नौ वर्ष हो चुके हैं, और इस दौरान प्रदेश में कई नए हाईवे भी बन चुके हैं। याचिकाओं में यह स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि कितने पेड़ काटे गए और उनके बदले कितने पौधे लगाए गए, इसलिए याचिकाकर्ता पहले इसका अध्ययन करें फिर जरुरत लगे तो नई याचिका दाखिल कर सकता है।

मध्यप्रदेश में अंधाधुध हो रही अवैध कटाई को लेकर 2018 में नीमच और जबलपुर से दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में बताया गया था कि प्रदेश भर में हो रही पेड़ों की कटाई में रोक लगाई जाए। मामले पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को पहले खुद 25-25 फलदार पौधे लगाने और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा।

अदालत ने कहा कि इसके बाद आप यह बताएं कि कितने पेड़ प्रदेश में कटे और कितने लगे। बेंच ने कहा कि सड़क निर्माण के नाम पर काटे गए पेड़ और उनके बदले लगाए गए पौधों की वास्तविक संख्या का अध्ययन करें। आकड़े जुटाने के बाद यदि आवश्यकता महसूस हो तो नई याचिका दायर कर सकते है, यह कहते हुए कोर्ट ने 2018 से लंबित याचिका का निराकरण कर दिया।

याचिकर्ताओं के तरफ से कोर्ट के सामने ये रखा गया तर्क 

जबलपुर निवासी विवेक कुमार शर्मा और नीमच निवासी आनंद मनावत की ओर से 2018 में दो अलग-अलग याचिका एमपी हाईकोर्ट में दायर करते हुए मांग की गई थी कि प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि तीन जजों की फुल बेंच ने 1 मार्च 2025 को 24 सितंबर 2015 की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत 53 प्रजातियों के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।

दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिकाओं का निराकरण कर दिया 

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि सड़कों के निर्माण के लिए पेड़ काटे जा रहे है, लेकिन उसके बदले पर्याप्त संख्या में पौधे लगाए नहीं जा रहे है। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाओं को दाखिल हुए करीब नौ वर्ष हो चुके हैं, और इस दौरान प्रदेश में कई नए हाईवे भी बन चुके हैं। याचिकाओं में यह स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि कितने पेड़ काटे गए और उनके बदले कितने पौधे लगाए गए। ऐसे में बेहतर होगा कि याचिकाकर्ता पहले इस संबंध में अध्ययन करें और ठोस आंकड़े जुटाएं। इसके बाद वे नई याचिका दाखिल कर सकते हैं।

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VVS Laxman बनेंगे BCCI के Director of Cricket? भारतीय क्रिकेट में होगा बड़ा फेरबदल!

भारत के पूर्व बल्लेबाज़ VVS लक्ष्मण को BCCI में एक बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है, क्योंकि बोर्ड इस साल के आखिर में अपने क्रिकेट ऑपरेशन्स में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, BCCI अहम पदों की व्यापक समीक्षा के तहत लक्ष्मण के लिए 'डायरेक्टर ऑफ़ क्रिकेट' का पद बनाने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीनियर पुरुष चयन समिति के चेयरमैन के तौर पर अजीत अगरकर का कार्यकाल, जो सितंबर में खत्म होने वाला है, उसे या तो जून 2027 तक बढ़ाया जा सकता है या फिर बोर्ड के भीतर चल रहे बड़े फेरबदल का हिस्सा बनाया जा सकता है।
 

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लक्ष्मण अभी बेंगलुरु में BCCI सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के हेड के तौर पर काम कर रहे हैं, जहाँ वे अलग-अलग उम्र के खिलाड़ियों के लिए हाई-परफ़ॉर्मेंस प्रोग्राम, खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन और टैलेंट डेवलपमेंट का काम देखते हैं। 'डायरेक्टर ऑफ़ क्रिकेट' बनने पर उन्हें शायद ज़्यादा बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव और स्ट्रैटेजिक भूमिका मिल सकती है, जिससे सीनियर नेशनल टीम, सेलेक्टर, कोचिंग स्टाफ़ और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस एक बेहतर तालमेल वाले स्ट्रक्चर के तहत जुड़ सकेंगे।

हालांकि BCCI की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन CoE के अलावा भारतीय क्रिकेट में लक्ष्मण की बढ़ती भागीदारी की वजह से ऐसी भूमिका की संभावना पर चर्चा हो रही है। जब भी सीनियर टीम का रेगुलर कोचिंग स्टाफ़ उपलब्ध नहीं रहा है, तब-तब लक्ष्मण ने अंतरिम हेड कोच की भूमिका निभाई है। हाल ही में, जब इंग्लैंड दौरे के बाद गौतम गंभीर और रेगुलर सपोर्ट स्टाफ़ को ब्रेक दिया गया था, तब लक्ष्मण ने युवा भारतीय टीम को ज़िम्बाब्वे में 3-0 से T20I सीरीज़ जिताई थी।
 

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'डायरेक्टर ऑफ़ क्रिकेट' के प्रस्तावित पद पर रोज़मर्रा की कोचिंग के बजाय लंबे समय की प्लानिंग पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। इस भूमिका में टैलेंट की पहचान की देखरेख करना, जूनियर और सीनियर टीमों के बीच तालमेल बनाए रखना, वर्कलोड मैनेजमेंट में समन्वय करना और 2027 के वनडे वर्ल्ड कप समेत बड़े ICC टूर्नामेंट के लिए भारत की तैयारियों को आकार देने में मदद करना शामिल हो सकता है।
 
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