भारत का पड़ोसी बांग्लादेश इस वक्त बहुत बुरे हाल में है। जहां बिजली का संकट खड़ा हो गया है और हालात इतने ज्यादा बदतर हो चुके हैं कि बांग्लादेशी सरकार ने फरमान जारी कर दिया है कि रात के 8:00 बजते ही पूरे देश के मॉल्स और बाजारों को ताला लग जाना चाहिए। वह बांग्लादेश जो भारत के साथ शेख हसीना के मामले पर अपनी तल्खी रख रहा था। अब वही भारत के सामने अपने हाथ फैलाकर मदद मांग रहा है। दरअसल बांग्लादेश इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। ढाका से लेकर खुलना तक 10-10 12-12 घंटों की बिजली कटौती हो रही है। जिसने वहां के लोगों का जीना बदहाल कर दिया। भीषण गर्मी और उमस के बीच पंखे और एसी सब कुछ बंद हो गए हैं। जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है। कई इलाकों में पावर ग्रेड और सबस्टेशंस पर हिंसक हमले भी शुरू हो गए हैं। स्थिति को संभालने के लिए तारिक रहमान की सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए हर रात 8:00 बजे तक दुकानों और मॉल्स को बंद कर देने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। यानी कि रात के 8:00 बजते ही पूरा बांग्लादेश मानो कर्फ्यू के सन्नाटे में डूब जाता है।
यह सिर्फ बिजली का संकट नहीं है। यह बांग्लादेश की बर्बाद होती हुई अर्थव्यवस्था का संकेत भी है। वहां पर जो झीगा निर्यात होता है यानी कि शिमप एक्सपोर्ट जो कि दुनिया में दूसरे नंबर पर है वो अब बर्बादी के कगार पर खड़ा है क्योंकि तालाबों में ऑक्सीजन की मशीनें चलनी बंद हो गई हैं। यही हाल रहा तो जो गारमेंट इंडस्ट्री बांग्लादेश की रीड है उसमें भी भारी समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। फैक्ट्रियों में उत्पाद आधा हो जाएगा। किसान महंगे डीजल के लिए तरस गए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो बांग्लादेश के पास अब इस अंधेरे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। इस तबाही की जड़ में विदेशी ईंधन पर बांग्लादेश की भारी निर्भरता है। जहां पर 90% तेल और 30% गैस बांग्लादेश के बाहर से आता है। और इन सबके बीच में हाल ही में अमेरिकी कंपनी के एलएनजी टर्मिनल में लगी हुई आग ने और समंदर में खराब मौसम ने रही सही कसर भी बांग्लादेश के लिए पूरी कर दी। और अब जब बांग्लादेश में चारों ओर अंधेरा छा गया है, तो ढाका ने फिर एक बार दिल्ली को याद किया है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात करके अतिरिक्त डीजल की गुहार भारत से लगा दी है। ताकि बांग्लादेश में बिजली उत्पादन हो सके।
भारत बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन जो कि साल 2017 से दोनों देशों को जोड़ती है, अब बांग्लादेश के लिए लाइफ लाइन बन गई है। शेख हसीना के मुद्दे पर भले ही दोनों देशों के बीच में तनाव हो, लेकिन हकीकत यह है कि जबजब बांग्लादेश डूबने लगता है, तो उसे सिर्फ भारत की याद आती है और भारत ने ही उसे कई बार बचाया भी है। भारत ने हमेशा से ही अपने पड़ोसियों के लिए नेबरहुड फर्स्ट की नीति अपनाई है। संकट के समय में मदद करना भारत की संस्कृति का हिस्सा है और भारत ने हर बार अपने पड़ोसियों की मदद की है। ढाका में तारिक रहमान से मुलाकात भी की थी जिसके बाद से ही दोनों देशों के संबंध में अब वापस से अच्छे आसार दिखने लगे हैं और अब बांग्लादेश ने भारत से मदद की गुहार लगा दी है।
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हरिंदर मिश्रा
यरुशलम, 14 अगस्त इजराइल में ‘‘सुधारात्मक स्वास्थ्य सेवा’’ विषय पर आयोजित पहले भारत-इजराइल हैकाथॉन को युवा नवोन्मेषकों की शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इसमें प्रतिभागी स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित उपाय विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इजराइल में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने इस सप्ताह हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया।
इजराइल में विजेता घोषित किए गए समाधानों में एक ऐसा उपकरण भी शामिल है, जो व्हीलचेयर पर लगाया जा सकता है और अंगों की गतिविधि को सुगम बनाता है। यह उपकरण व्हीलचेयर के आगे वाले पहिये के स्वाभाविक घूमने की गति का इस्तेमाल करता है और बिजली के उपयोग के बिना व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति के पैरों की नियंत्रित गतिविधि में मदद करता है। इस समाधान का मकसद अंगों की हरकत में मदद करने और पुनर्वास के लिए एक आसान और सुलभ तरीका उपलब्ध कराना है।
भारत में चुने गए सफल समाधानों में एक ऐसा उपकरण भी शामिल है जो वास्तविक समय के वीडियो प्रसंस्करण और स्वचालित गतिविधि विश्लेषण का उपयोग कर घायल मरीजों के अंगों की गतिविधियों का आकलन करता है। भारतीय दूतावास ने बताया कि इजराइल में भारतीय यहूदी समुदाय के सदस्य ओरी कडविल ने इस हैकाथॉन की पहल की थी, जबकि समुदाय के अन्य सदस्यों ने इसके आयोजन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। दूतावास ने एक बयान में कहा, ‘‘इस पहल ने समुदाय को भारत और इजराइल के लोगों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने का एक मंच प्रदान किया।
साथ ही, इसने युवा छात्रों की रचनात्मकता और तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करके ऐसे समाधान खोजने का मौका दिया, जिनका समाज पर व्यापक असर हो।’’
हैकाथॉन के लिए समस्याओं का चयन दोनों देशों के अस्पतालों, स्टार्ट-अप और विश्वविद्यालयों से लिया गया था। इजराइल की तरफ से चार समस्याएं चुनी गईं, जबकि भारत की तरफ से 10 समस्याओं को देखा गया। इसमें भारत में थापर यूनिवर्सिटी नोडल साझेदार थी।
दूतावास के अनुसार, इस हैकाथॉन में दोनों देशों के 1300 छात्र और अन्य लोग शामिल हुए और 14 तरह की समस्याओं के समाधान के विषय पर चर्चा हुई।
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