Responsive Scrollable Menu

सुल्तानपुर के इटिहवा टीला, इसौली किला और डीह मझगंवा में ASI ने खोजे प्राचीन स्थल, जानें जिले का समृद्ध इतिहास

सुल्तानपुर में राजपूतों के आगमन के बाद भरों की सत्ता कमजोर होती गई. पश्चिम से आए राजपूतों ने पहले भर शासकों के यहां नौकरी की और बाद में सत्ता पर अधिकार कर लिया. मुस्लिम बादशाहों ने भी भरों पर आक्रमण किए. अलाउद्दीन खिलजी ने इसौली के भर राजा को हराने के लिए बैस राजपूतों को भेजा था. उन्होंने अपना काम पूरा किया, जिसके बदले में बादशाह ने उन्हें भाले सुलतान का खिताब दिया. इसी नाम से जिले के पश्चिमी भाग में एक राजपूत जाति आज भी मौजूद है.

Continue reading on the app

Supreme Court ने NALSAR छात्रों पर BCI के परिपत्र पर जताई नाराजगी, कहा विरोध का अधिकार

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के उस परिपत्र पर कड़ा रुख अपनाया जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया गया था कि वे नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के किसी भी स्नातक को अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत नहीं करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में बीसीआई की कोई भूमिका नहीं है क्योंकि यह उनके और छात्रों के बीच बातचीत का मामला था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उन्हें (छात्रों को) विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्हें कौन रोक सकता है?’’ इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘यह मेरे और छात्रों के बीच बातचीत का मामला है।

वे (बीसीआई) दखल देने वाले कौन होते हैं?’’ ये टिप्पणियां तब आईं जब बीसीआई के सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया। पीठ ने बीसीआई को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा और निर्देश दिया कि बीसीआई या किसी अन्य राज्य बार काउंसिल के कहने पर नालसार के छात्रों या शिक्षकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। बीसीआई की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि परिपत्र वापस ले लिया गया है।

पीठ ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए तय की। बीसीआई ने 13 अगस्त को सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे अगले आदेश तक नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के किसी भी स्नातक को वकील के तौर पर पंजीकृत नहीं करें, लेकिन सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद कुछ ही घंटों में यह आदेश वापस ले लिया गया। अपने पहले बयान में, बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा था कि वे यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की भागीदारी के खिलाफ चलाए गए अभियान से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे हैं और उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने वाली रिपोर्ट मांगी है।

वकीलों के शीर्ष वैधानिक निकाय ने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय 19 अगस्त को उसके सामने पेश की गई सामग्री पर विचार करने के बाद लिया जाएगा। इसके बाद, सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद बीसीआई ने अपना निर्णय बदल दिया और राज्य बार काउंसिल को नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के स्नातकों को वकील के तौर पर पंजीकृत करने की अनुमति दे दी। नई अधिसूचना में पिछले आदेश में बदलाव करते हुए कहा गया कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और कुछ लोगों के कथित गलत व्यवहार के लिए उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

Continue reading on the app

  Sports

IND vs SL: 3 से 5 मीटर वाला चक्रव्यूह… श्रीलंकाई स्पिनर्स के जाल में ऐसे उलझी टीम इंडिया

IND vs SL 1st Test: श्रीलंकाई स्पिनर्स ने गॉल टेस्ट के दूसरे दिन कमाल का खेल दिखाया. पहले दिन सिर्फ 1 विकेट हासिल करने वाले श्रीलंका स्पिनर्स दूसरे दिन 6 शिकार करने में कामयाब रहे. Sun, 16 Aug 2026 20:38:04 +0530

  Videos
See all

UP Caste Politics: UP में इस वक्त चुनावी चर्चा ब्राह्मणों को लेकर खूब जोर शोर से चल रही | BJP | SP #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-16T15:47:06+00:00

‘BJP का कोई भी कार्यकर्ता इस भ्रष्टाचार का शिकार नहीं’, पार्टी प्रवक्ता का बड़ा दावा | #BJP #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-16T15:45:19+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers