गोमुखासन से दूर करें गर्दन-पीठ का दर्द, सुधारें पोस्चर
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। योग दिवस अब सिर्फ 15 दिन दूर है। 21 जून को पूरा देश और दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएगी। ऐसे में आयुष मंत्रालय गोमुखासन जैसे आसान और प्रभावी आसन की सलाह दे रहा है। यह आसन रोजाना थोड़ा समय निकालकर किया जा सकता है। इससे शरीर लचीला बनता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रोजमर्रा की थकान दूर होती है।
गोमुखासन का नाम गाय के मुंह की तरह दिखने वाले घुटनों और पैरों की स्थिति से पड़ा है। यह आसन खासतौर पर कंधे, पीठ, गर्दन और पैरों पर काम करता है। इसमें शरीर को अच्छी तरह स्ट्रेच मिलता है। शुरुआती लोग भी आसानी से सीख सकते हैं।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय बताता है कि गोमुखासन का अभ्यास कैसे करें। इसके लिए सबसे पहले आराम से फर्श पर बैठ जाएं। बाएं पैर को मोड़कर दाएं कूल्हे के पास रखें। दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर रखें ताकि घुटने एक-दूसरे के ऊपर आएं। अब दाएं हाथ को पीछे की तरफ से कमर की ओर ले जाएं और बाएं हाथ को ऊपर से कमर की ओर ले आएं। दोनों हाथों की उंगलियां एक-दूसरे को पकड़ने की कोशिश करें। सीधे बैठकर 30 सेकंड से शुरू करके धीरे-धीरे 1-2 मिनट तक रहें। इस दौरान सांस सामान्य रखें। फिर पैर और हाथ बदलकर दूसरी तरफ दोहराएं।
गोमुखासन शरीर को स्ट्रेच करता है और मजबूत बनाता है। यह लचीलापन बढ़ाता है और शरीर की पोस्चर को सुधारता है। कंधों, गर्दन और पीठ की अकड़न दूर होती है। पैरों में ऐंठन कम होती है और पैर लचीले बनते हैं। यह फ्रोजन शोल्डर, गर्दन के दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जैसी समस्याओं में बहुत कारगर है। पीठ और बाइसेप्स की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
यही नहीं यह रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है। फेफड़ों की अच्छी एक्सरसाइज होती है, जिससे सांस की बीमारियां कम होती हैं। रोजाना 5-10 मिनट इस आसन का अभ्यास करने से शरीर में मजबूती और स्थिरता आती है। सुबह खाली पेट या शाम को हल्का भोजन करने के बाद इसे किया जा सकता है।
गोमुखासन जैसे आसनों से आप अपनी दिनचर्या की शुरुआत कर सकते हैं। यह व्यस्त जीवनशैली में तनाव कम करने और सेहत सुधारने का आसान तरीका है। रोजाना 10-15 मिनट अभ्यास करने से सेहत को कई लाभ मिलते हैं। गोमुखासन न सिर्फ शरीर बल्कि मन को भी शांत करता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसे कर सकते हैं। अगर कोई गंभीर बीमारी है तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
--आईएएनएस
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Bhanu Saptami 2026: आज भानु सप्तमी के दिन बन रहा बेहद शुभ संयोग, जानें कब और कैसे करें सूर्यदेव की पूजा
Bhanu Saptami 2026: सनातन धर्म में भानु सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व भगवान सूर्यदेव को समर्पित होता है. जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तब उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्यदेव की विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इस साल भानु सप्तमी का पर्व आज यानी 07 जून 2026, को मनाया जा रहा है. ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में किया गया पूजा-पाठ और दान कई गुना अधिक फल देता है. ऐसे में इस बार की भानु सप्तमी श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास मानी जा रही है.
अधिक मास में भानु सप्तमी का महत्व
इस साल भानु सप्तमी का संयोग अधिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर बना है. अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है. इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता आती है. आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली बनी रहती है. साथ ही कुंडली में सूर्य ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव भी कम होता है.
भानु सप्तमी पर बन रहे हैं दो शुभ योग
इस बार भानु सप्तमी के दिन दो महत्वपूर्ण शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहे हैं. पहला द्विपुष्कर योग सुबह 5:23 बजे से शुरू होकर सुबह 7:55 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में इस योग को अत्यंत शुभ माना गया है. इस अवधि में किए गए पूजा-पाठ, जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. दूसरा रवि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है. यह योग सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. इस दौरान की गई पूजा से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं और जीवन में उन्नति के रास्ते खुलते हैं.
भानु सप्तमी पूजा मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, भानु सप्तमी का पर्व भगवान सूर्यदेव का जयंती पर्व है. इसलिए इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से पूजा और व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में पूजा करना बेहद शुभ होगा.
भानु सप्तमी की पूजा विधि
भानु सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद सूर्यदेव की पूजा करें. फिर तांबे के पात्र में जल भरें. उसमें रोली, लाल फूल, गुड़ और तिल मिलाएं. उगते सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करें. पूजा के बाद सूर्यदेव की आरती करें. सूर्य चालीसा या सूर्य स्तोत्र का पाठ करें. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है. व्रत के दौरान नमक का सेवन न करें. जरूरतमंदों को अपनी क्षमता अनुसार दान अवश्य दें.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भानु सप्तमी पर दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र, गुड़, तिल, घी
अन्न का दान करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा गाय को रोटी और गुड़ खिलाना भी पुण्यदायी माना जाता है.
भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान सूर्यदेव का प्राकट्य सप्तमी तिथि और रविवार के दिन हुआ था. इसी कारण जब भी रविवार को सप्तमी तिथि आती है, उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लोककल्याण के लिए प्रकट हुए थे. इसलिए इसे सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. भानु सप्तमी पर व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को धन, यश, सम्मान और सफलता की प्राप्ति होती है. नौकरी और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. स्वास्थ्य बेहतर रहता है और रोगों से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है. सूर्यदेव की कृपा से जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है. इसी वजह से शास्त्रों में भानु सप्तमी को अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी पर्व बताया गया है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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