हीरो की सुपरहिट बेटी, विद्या बालन-सुशांत सिंह राजपूत को दिया बड़ा ब्रेक, कहलाई टीवी की 'गॉडमदर'
हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, वे भारतीय टेलीविजन की 'कॉन्टेंट क्वीन' हैं. वे पिछले तीन दशकों से टीवी पर राज कर रही हैं. उन्होंने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे ब्लॉकबस्टर शोज दिए और मिहिर और कोमोलिका जैसे आइकॉनिक किरदार गढ़े. उन्हें इंडस्ट्री का बड़ा 'स्टारमेकर' माना जाता है. उन्होंने विद्या बालन और दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत जैसे दिग्गजों को पहला बड़ा ब्रेक दिया.
बांग्लादेश लौटने के लिए खुद सामने आ रहे अवैध प्रवासी:बंगाल में रोज 200-300 लोगों का वेरिफिकेशन; बॉर्डर पर दोनों देशों में एक जैसा तनाव
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की हकीमपुर चेकपोस्ट पर इन दिनों अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जुट रही है। ये लोग खुद अपनी पहचान बताकर बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि, सीमा सुरक्षा बल (BSF) उन्हें सीधे सीमा पार भेजने के बजाय बायोमीट्रिक और अन्य पहचान पत्र लेकर बंगाल में बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में भेज रही है। हकीमपुर बॉर्डर पर वेरिफिकेशन सेंटर पर रोजाना करीब 200 से 300 लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोग सालों पहले अवैध रूप से भारत आए थे और अब बदलते हालात के बीच अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई लोगों के पास भारतीय दस्तावेज हैं, लेकिन बांग्लादेशी पहचान संबंधी कागजात नहीं हैं। अधिकारी बोले- पहली बार अवैध प्रवासियों को ढूंढना नहीं पड़ रहा BSF के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब अवैध प्रवासियों को तलाशने की जरूरत नहीं पड़ रही। लोग खुद वेरिफिकेशन कराने और अपनी पहचान दर्ज कराने के लिए चेकपोस्ट पर पहुंच रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, सुबह से शाम तक लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं और वेरिफिकेशन में काफी समय लग रहा है। स्थानीय संगठन ‘भूखा मानुसेर अधिकार अभियान’ के अध्यक्ष मोहर मंडल के अनुसार, वेरिफिकेशन कराने पहुंच रहे अधिकांश लोग बांग्लादेश के छह जिलों से हैं और अवैध रूप से भारत आए थे। प्रवासी ने कहा- भारत में रह नहीं पा रहे, बांग्लादेश जा नहीं सकते मुंबई में रह रहे मोहम्मद अख्तर शेख ने बताया कि वह 22 साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे। उनके पास भारतीय आधार कार्ड है, लेकिन बांग्लादेश का कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें डर है कि अब वे न बच्चों के साथ रह पाएंगे और न ही बांग्लादेश जा सकेंगे।’ वहीं, दिल्ली में रहने वाले इस्लाम सरदार ने कहा कि उन्हें सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगर भारत और बांग्लादेश दोनों ही उन्हें स्वीकार नहीं करते तो उनका भविष्य क्या होगा। जितने वेरिफिकेशन हुए, होल्डिंग सेंटर में उससे कम ही गए गृह मंत्रालय के निर्देश पर बंगाल में 11 जगह होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। उत्तर 24 परगना सबसे प्रभावित जिला है, यहां के तेतुलिया में एक होटल पाथेर सारथी भवन को होल्डिंग सेंटर बनाया गया है। राज्य सरकार के आंकड़ों की मानें तो 11 होल्डिंग सेंटरों पर मौजूद अभी अवैध प्रवासियों की संख्या एक हजार से कम है। होल्डिंग सेंटर में इन्हें नाश्ता, खाना, डॉक्टर, बच्चों के लिए बुनियादी व्यवस्था जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इस बीच, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) ने BSF पर अवैध बांग्लादेशियों को सीमा में धकेलने (पुश-इन) की कोशिश का आरोप लगाया है। BGB का दावा है कि उसने पिछले 24 घंटों में ऐसी 10 कोशिशों को विफल किया है। बांग्लादेश ने सीमा पर गश्त और जवानों की संख्या भी बढ़ा दी है। 29 मई को पश्चिम बंगाल की एजेंसियों द्वारा 386 संदिग्ध अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद बांग्लादेश ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबायद इस्लाम ने भी चेतावनी दी थी कि किसी भी व्यक्ति को एकतरफा तरीके से सीमा में धकेलने की कोशिश तनाव बढ़ा सकती है।
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