जुलाई में थोक महंगाई मामूली घटी:WPI महंगाई जून के 9.87% से घटकर 9.78% हुई, सरकारी डेटा में जानकारी सामने आई है
जुलाई में थोक महंगाई दर मामूली घटकर 9.78% हो गई। एक महीने पहले जून में WPI महंगाई दर 9.87% थी। जुलाई की दर जून के मुकाबले 0.09% कम रही। होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।
स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त को खुलेगा:प्राइस बैंड ₹131-₹138 तय; कंपनी ₹216.78 करोड़ का कर्ज चुकाएगी
स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। कंपनी ने प्राइस बैंड 131 से 138 रुपए तय किया है। निवेशक इस इश्यू में 27 अगस्त तक बोली लगा सकेंगे। इश्यू में कम से कम 100 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद 100 के मल्टीपल में बिड बढ़ा सकते हैं। 2.88 करोड़ नए शेयर जारी होंगे, प्रमोटर्स भी बेचेंगे हिस्सेदारी कंपनी 2,88,98,300 नए शेयर जारी करेगी। इसके अलावा OFS यानी ऑफर फॉर सेल के जरिए मौजूदा शेयर होल्डर कुल 1,33,33,300 शेयर बेचेंगे। नए शेयरों की बिक्री से जुटाए जाने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और बिजनेस बढ़ाने में करेगी: लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 1984 से काम कर रही 1984 में स्थापित यह कंपनी भारत के एयर फ्रेट फॉरवर्डिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में काम कर रही है। वर्ल्ड एसीडी के डेटा के मुताबिक, एयरवे बिल्स जनरेशन के मामले में स्काईवेज एयर सर्विसेज लगातार चार साल- 2022, 2023, 2024 और 2025 से नंबर-1 पोजीशन पर काबिज है। इसका मतलब है कि कंपनी देश से दुनिया भर में भेजे जाने वाले एयर कार्गो के सबसे ज्यादा कंसाइनमेंट प्रोसेस करती है। कंपनी एयर फ्रेट के साथ ओशियन फ्रेट फॉरवर्डिंग, ट्रकिंग, वेयरहाउसिंग, कस्टम ब्रोकिंग, टेक्नोलॉजी बेस्ड एक्सप्रेस कार्गो और पार्सल डिलीवरी की सर्विसेज देती है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स प्लानिंग, कार्गो हैंडलिंग, वेयरहाउसिंग सॉल्यूशंस, डॉक्यूमेंटेशन, कस्टम्स क्लीयरेंस और ग्लोबल कनेक्टिविटी जैसी वैल्यू एडेड सेवाएं भी ऑफर करती है। ग्लोबल एयरलाइंस से पार्टनरशिप और इन-हाउस टेक प्लेटफॉर्म्स कंपनी ने सऊदी कार्गो, एयर इंडिया कार्गो, एमिरेट्स, लुफ्थांसा और कतर एयरवेज (रिन्यूअल प्रक्रिया में) जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के साथ परफॉर्मेंस-बेस्ड करार किए हैं। लॉजिस्टिक्स काम को आसान बनाने के लिए कंपनी अपने खुद के विकसित किए गए टेक प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करती है। ये प्लेटफॉर्म फ्रेट बुकिंग, शिपमेंट ट्रैकिंग, ऑटोमेशन और रिपोर्टिंग का काम संभालते हैं। दो साल में मुनाफा ₹34.5 करोड़ से बढ़कर ₹63.5 करोड़ हुआ क्या होता है AWB: एयर वे-बिल एक तरह की कानूनी रसीद और दस्तावेज होता है, जिसे एयरलाइन या फ्रेट फॉरवर्डर माल की ढुलाई के लिए जारी करता है। इसमें सामान का पूरा ब्योरा, भेजने वाले और पाने वाले की जानकारी और रूट दर्ज होता है। जिस कंपनी के पास जितने ज्यादा AWB होते हैं, उसका मतलब है कि वह उतने ही ज्यादा कार्गो कंसाइनमेंट संभाल रही है।
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