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'माफी से मिटेगा विवाद या होगी सिर्फ लीपापोती'? पेड्डी में जान्हवी कपूर के कॉन्ट्रोवर्शियल सीन बदलने का फैसला, डायरेक्टर ने मांगी माफी

By Shristi Jha 

Peddi Controversy: इस समय साउथ इंडिया की चर्चित फिल्म पेड्डी (Peddi) को लेकर ऑडियंस के बीच जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. इस फिल्म ने पहले ही दिन रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर ये साबित कर दिया कि ये मूवी आने वाले दिनों में अच्छा-खासा बिजनेस करेगी. फिल्म को लेकर जहां एक तरफ पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है. वहीं. दूसरी तरफ फिल्म की फीमेल कास्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस फिल्म की रिलीज के बाद जान्हवी कपूर के किरदार को लेकर सबसे ज्यादा विवाद देखने के लिए मिला कि एक्ट्रेस जान्हवी कपूर को ऑब्जेक्टिफाइ किया गया है. इसके अलावा कई लोगों का कहना है कि उनका फिल्म में कोई अहम रोल नहीं रखा गया. अब इस मुद्दे पर फिल्म के डायरेक्टर का बयान समाने आया है. आइए जानते हैं कि उन्होंने इस पर क्या कहा है.

जानिए क्या है पूरा मामला ?

फिल्म के कुछ सीन और उससे जुड़ी चीजे सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई दर्शकों और कुछ संस्था ने आरोप लगाया कि पेड्डी फिल्म में कुछ सीन महिलाओं के प्रदर्शन और सामाजिक परिस्थिति के लिहाज से सही नहीं हैं. विवाद बढ़ने के साथ ही फिल्म को लेकर टिप्पणी का दौर शुरू हो गया. इसको मामला तब और गंभीर हो गया. जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #PeddiControversy जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. कई यूजर्स ने फिल्ममेकर से सफाई मांगी है. जबकि कुछ ने कॉन्ट्रोवर्शियल सीन को हटाने की मांग की.

निर्देशक ने माफी मांगी

फिल्म को लेकर बढ़ते दबाव के बीच डायरेक्टर बुची बाबू सना ने एक बयान जारी कर कहा कि उनका इरादा किसी की इमोशन को ठेस पहुंचाना नहीं था. उन्होंने कहा कि अगर फिल्म के किसी भी हिस्से से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं तो इसके लिए माफी मांगते हैं. 
डायरेक्टर ने यह भी बताया कि दर्शकों की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया गया है और जिन सीन पर आपत्ति जताई जा रही है.उनमें आवश्यक बदलाव किए जाएंगे. उनका कहना है कि सिनेमा सोसाइटी के लिए होता है और दर्शकों की भावनाएं उनके लिए अहम है.

आखिर जान्हवी कपूर का नाम क्यों हैं चर्चा में?

फिल्म को लेकर विवाद बढ़ने के बाद एक्ट्रेस जान्हवी कपूर भी चर्चा में आ गई हैं. हालांकि उनकी ओर से इस पूरे मामले में कोई रिएक्शन देखने को नहीं मिला. फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विवाद मुख्य रूप से कुछ विशेष सीन को लेकर है, न कि एक्ट्रेस के पर्सनल बेहेवियर या एक्टिंग को लेकर है. फिर भी सोशल मीडिया पर बहस का बड़ा हिस्सा जान्हवी कपूर के किरदार और उसकी प्रस्तुति पर केंद्रित रहा है. कुछ लोगों ने एक्ट्रेस का सपोर्ट किया और कहा कि कलाकार केवल निर्देशक के विजन के मुताबिक काम करते हैं, जबकि कुछ ने फिल्म निर्माण टीम की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं.

फिल्म पर क्या पड़ेगा असर?

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि विवाद किसी भी फिल्म के लिए दो-तरफा तलवार साबित हो सकता है. एक ओर नेगेटिव पब्लिसिटी फिल्म की इमेज को नुकसान पहुंचाता है. वहीं दूसरी ओर लगातार चर्चा फिल्म को ज्यादा पब्लिसिटी भी दिलाती है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म जान्हवी के सीन में किए जाने वाले बदलाव दर्शकों को संतुष्ट कर पाते हैं या नहीं. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फिल्म की कहानी और प्रेजेंटेशन पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है.

सोशल मीडिया पर बटी राय 

डायरेक्टर की माफी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बटी हुई है. कुछ यूजर्स का मानना है कि गलती स्वीकार कर  विवादित सीन में बदलाव करना पॉजिटिव कदम है. वहीं कई लोगों ने इसे सिर्फ विवाद शांत करने की कोशिश बताया है. उनका कहना है कि जब आलोचना बढ़ी तब जाकर मेकर्स ने माफी मांगी. इसी वजह से सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे 'डैमेज कंट्रोल' और 'लीपापोती' करार दिया.

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अदाणी ग्रुप ने छत्तीसगढ़ की सरगुजा खदान को हरित क्षेत्र में बदला, लगाए 16 लाख से अधिक पेड़-पौधे

अहमदाबाद, 6 जून (आईएएनएस)। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) ने छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले स्थित परसा ईस्ट और कांता बासन (पीईकेबी) खदान क्षेत्र में 568 हेक्टेयर भूमि पर 16 लाख से अधिक पेड़ और पौधे लगाए हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र को एक हरित परिदृश्य में बदल दिया गया है।

जो क्षेत्र कभी सक्रिय खनन स्थल था, वह अब हरे-भरे प्राकृतिक वातावरण में तब्दील हो चुका है। पारिस्थितिक पुनर्स्थापन कार्यक्रम के तहत खनन के लिए हटाए गए प्रत्येक पेड़ के बदले 40 नए पेड़ लगाए जा रहे हैं।

साल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सिधा जैसी स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को दोबारा लगाया गया है। कंपनी के अनुसार, लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर लगभग 88 प्रतिशत रही है।

अदाणी एंटरप्राइजेज इस खदान का संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरवीयूएनएल) के लिए डेवलपर और ऑपरेटर के रूप में करती है।

अधिकारियों के अनुसार, कंपनी की हरित विकास परियोजना ने यह दिखाया है कि कोयला खनन पूरा होने के बाद भी भूमि को दोबारा विकसित और पुनर्जीवित किया जा सकता है। कंपनी का लक्ष्य इस दशक के अंत तक यहां 40 लाख से अधिक पेड़ लगाने का है।

अदाणी ग्रुप ने 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में एक नर्सरी भी विकसित की है, जिसमें लगभग 5 लाख पौधे मौजूद हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में साल के जंगलों का सफल पुनर्जीवन भी किया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी ने सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडलों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण का कार्य किया है। इसके अलावा, वनीकरण, वन्यजीव प्रबंधन और अन्य पर्यावरणीय उपायों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के पास 259 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराई गई है।

कोयला मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कोयला खनन समाप्त होने के बाद किसी खदान की यात्रा खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और सतत विकास की नई शुरुआत होती है।

मंत्रालय ने कहा, छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित परसा ईस्ट और कांता बासन (पीईकेबी) खदान इस प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण है। कभी सक्रिय खनन क्षेत्र रहा यह इलाका आज हरे-भरे परिदृश्य में बदल गया है, जो दर्शाता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा कि आज पीईकेबी खदान इस बात का जीवंत उदाहरण है कि खदान बंद होने के बाद भी उस क्षेत्र को हरित और टिकाऊ भविष्य की दिशा में विकसित किया जा सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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