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दोनों हाथ नहीं, फिर भी पैरों से लिखकर पढ़ती है लक्ष्मी, बच्ची का जज्बा देख सोनू सूद ने बढ़ाया मदद का हाथ

बिहार के कटिहार जिले के एक छोटे से गांव की लक्ष्मी ने साबित कर दिया है कि सपनों के लिए शरीर से ज्यादा मजबूत हौसले की जरूरत होती है। हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया में कक्षा 4 में पढ़ने वाली लक्ष्मी जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग है।

इसके बावजूद वह रोज स्कूल जाती है और अपने पैरों से लिखकर पढ़ाई करती है। उसके सामने कई मुश्किलें हैं, लेकिन पढ़ने की इच्छा उससे कहीं बड़ी है। लक्ष्मी की कहानी अब सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंची और अभिनेता सोनू सूद ने भी उसकी मदद करने की बात कही है।

पैरों से लिखकर बना रही पढ़ाई में अपनी राह

लक्ष्मी कटिहार के हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया में कक्षा 4 की छात्रा है। जन्म से ही उसके दोनों हाथ नहीं हैं। इसके बावजूद उसने पढ़ाई को अपने जीवन से अलग नहीं होने दिया। वह अपने पैरों की मदद से लिखती है और स्कूल में दूसरे बच्चों की तरह पढ़ने की कोशिश करती है।

दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद पढ़ाई नहीं छोड़ी

लक्ष्मी की कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा यही है कि उसने अपनी शारीरिक कमी को पढ़ाई के रास्ते में दीवार नहीं बनने दिया। जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बाद भी उसने लिखने का अपना तरीका खोज लिया।

आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जारी है लक्ष्मी की पढ़ाई

लक्ष्मी की जिंदगी में सिर्फ शारीरिक चुनौती ही नहीं है। उसके परिवार के सामने आर्थिक परेशानियां भी हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में दिव्यांग बच्चे के लिए अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करना परिवार के लिए और बड़ी चुनौती बन सकता है।

दिव्यांग बच्चों को कई बार सामान्य पढ़ाई के साथ अतिरिक्त सुविधाओं की जरूरत होती है। स्कूल आने-जाने की सुविधा, पढ़ने-लिखने के लिए सही साधन, सहायक उपकरण और जरूरत पड़ने पर विशेष प्रशिक्षण उनके लिए पढ़ाई को आसान बना सकते हैं।

सोनू सूद ने लक्ष्मी की मदद करने की बात कही

लक्ष्मी की कहानी सोशल मीडिया के जरिए सामने आने के बाद अब अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने भी उसकी मदद करने की बात कही है। सोनू सूद पहले भी जरूरतमंद बच्चों और परिवारों की मदद को लेकर चर्चा में रहे हैं।

लक्ष्मी के मामले में सोनू सूद की ओर से मदद की बात सामने आना उसके परिवार और उसके भविष्य के लिए उम्मीद की खबर है। हालांकि, मदद के किस रूप में और किस स्तर पर की जाएगी, इसकी पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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ट्रम्प ने ड्रोन इम्पोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाया:चीन पर निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया; UK-EU समेत 7 देशों पर शुल्क बढ़ा

अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनमैन्ड ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स के आयात यानी इंपोर्ट पर 100% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रम्प प्रशासन ने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों और मुख्य रूप से चीन के वर्चस्व वाले इस सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से अमरीका में ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम होगी। ड्रोन के वजन और क्षमता के हिसाब से टैरिफ तय हुआ व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। लागू होने की समय-सीमा और छूट के नियम नया टैरिफ स्ट्रक्चर अलग-अलग समय-सीमा में लागू किया जाएगा… विशेष छूट: हस्ताक्षर के 20 दिनों के भीतर अमरीकी युद्ध विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर द्वारा FCC की कवर्ड लिस्ट से छूट प्राप्त प्रोडक्ट्स और कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ 180 दिनों बाद प्रभावी होगा। ब्रिटेन और यूरोप समेत 7 सहयोगी देशों पर भी टैरिफ अमेरिका ने केवल विरोधी देशों पर ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन पर भी टैरिफ लागू किया है… चीन की ड्रोन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रम्प प्रशासन चीनी ड्रोन तकनीक पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है। पिछले साल दिसंबर में फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीनी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की थी और विरोधी देशों के ड्रोन को वायरलेस कम्युनिकेशंस की मंजूरी देने पर रोक लगा दी थी। वैश्विक बाजार में शेनझेन स्थित कंपनी DJI टेक्नोलॉजीज का दबदबा है, जिसकी पिछले साल तक अमरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में लगभग 70% हिस्सेदारी थी। इसके अलावा, हाल ही में चीन ने भी अमरीकी व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरीका को ड्रोन एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध और हाइब्रिड वॉर से बढ़ी चिंता ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। दोनों देशों द्वारा इलाके की रक्षा और उस पर कब्जा करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल ने एक नए हाइब्रिड वॉर को जन्म दिया है। ट्रम्प ने अपने आधिकारिक पत्र में अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम को अमरीका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी करार दिया है। एक्सपर्ट्स की राय: कॉमर्शियल मार्केट का ढांचा पूरी तरह बदलेगा अमरीका-चीन टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा के विशेषज्ञ क्रेग सिंगलेटन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह फैसला कॉमर्शियल मार्केट को पूरी तरह से नया आकार देगा। क्रेग सिंगलेटन ने कहा कि अमरीकी कॉमर्शियल और सरकारी खरीदारों को तुरंत एक बड़े पूंजीगत बदलाव की जरूरत होगी। उन्हें अब अमरीका या सहयोगी देशों के सप्लायर्स की तरफ रुख करना होगा, भले ही उनके प्रोडक्ट्स की कीमत ज्यादा क्यों न हो। यह फैसला चीन के ड्रोन बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और ट्रम्प तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले तनाव बढ़ा सकता है। क्या है अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS)? अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) को सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है। ये ऐसे विमान होते हैं जिन्हें बिना किसी इंसानी पायलट के रिमोट कंट्रोल या ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए उड़ाया जाता है। इनका इस्तेमाल फोटोग्राफी, सामान की डिलीवरी से लेकर मिलिट्री सर्विलांस और सटीक हमलों तक में किया जाता है। ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाओ: ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

Shubman Gill ने Sri Lanka के खिलाफ Prasidh Krishna और गुरनूर बरार को बताया बेहतरीन तेज गेंदबाज

भारत के कप्तान शुभमन गिल ने संकेत दिया है कि शनिवार से श्रीलंका के खिलाफ शुरू हो रहे पहले टेस्ट में अनुभवी मोहम्मद सिराज के साथ प्रसिद्ध कृष्णा नई गेंद साझा कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने कर्नाटक के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध और युवा गुरनूर बरार में से किसी एक को चुनने को ‘मुश्किल फैसला’ बताया। भारत इस दौरे पर बाएं हाथ के तीन स्पिनरों रविंद्र जडेजा, मानव सुथार और कुलदीप यादव के साथ उतर रहा है।

वहीं चार तेज गेंदबाजों में सिराज की जगह लगभग तय है। आकिब नबी दौड़ में नहीं हैं जबकि छह फुट पांच इंच लंबे गुरनूर और उनसे एक इंच छोटे प्रसिद्ध के बीच चयन होना है। प्रसिद्ध सात टेस्ट खेल चुके हैं और उनके नाम 25 विकेट हैं।

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पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर गिल ने कहा, ‘‘गुरनूर बरार ने पुरानी गेंद से शानदार गेंदबाजी की है क्योंकि वह अच्छी रफ्तार से उछाल हासिल कर सकते हैं। लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा ने पिछले कुछ समय में अच्छी गेंदबाजी की है, जैसा कि हमने अभ्यास मैच में देखा। इसलिए यह मुश्किल फैसला है।’’ गिल ने कहा कि यह श्रृंखला जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में प्रसिद्ध और गुरनूर जैसे खिलाड़ियों के लिए अपनी दावेदारी पेश करने का मौका है।

बुमराह घुटने की चोट के कारण टीम में नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जसप्रीत बुमराह यहां नहीं हैं, लेकिन यह किसी और के लिए आगे बढ़ने का मौका है। यह खेल की रफ्तार को समझने की बात है।’’ बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को एक अन्य बाएं हाथ के बल्लेबाज साई सुदर्शन की गैरमौजूदगी में नंबर तीन पर उतारे जाने की उम्मीद है।

वहीं दबाव में चल रहे ध्रुव जुरेल के पिछले कुछ टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बावजूद मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने की संभावना है। इस संदर्भ में गिल ने कहा, ‘‘खिलाड़ी अपने आप आगे बढ़ेंगे। हमें उन्हें समय देना होगा।

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कुछ खिलाड़ियों को थोड़ा समय चाहिए।’’ उन्होंने बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम प्रबंधन के बीच कथित तौर पर संवाद में कमी की अटकलों को भी खारिज किया। गिल ने कहा, ‘‘उनके साथ लगातार संवाद होता रहता है। दुर्भाग्य से साई सुदर्शन में उतना सुधार नहीं हुआ जितना हम चाहते थे, क्योंकि टेस्ट में हम जोखिम नहीं ले सकते।

लेकिन हमें अपने 15 खिलाड़ियों पर भरोसा है।’’ टेस्ट कप्तान के रूप में एक साल पूरा कर चुके गिल का मानना है कि वह हर मैच के साथ इस भूमिका में बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह श्रृंखला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के उस अभियान को फिर पटरी पर लाने के बारे में होगी जिसे पिछली कुछ श्रृंखलाओं में झटके लगे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं कप्तान की भूमिका में सहज हूं।

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हमारा लक्ष्य विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह की दौड़ में बने रहना है। इसके लिए हमें छह या सात टेस्ट जीतने होंगे। इसलिए हम यहां से शुरुआत करना चाहते हैं।’’ शनिवार से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाला पहला टेस्ट भारत का पारंपरिक प्रारूप में 600वां मैच होगा।

भारत ने 1932 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। गिल ने कहा, ‘‘600वें टेस्ट में अपने देश की अगुआई करना सम्मान की बात है और स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा करना इससे भी बड़ा सम्मान है।

Fri, 14 Aug 2026 16:27:00 +0530

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