पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत की तैयारी: पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बड़ी बैठक, भविष्य की रणनीति पर मंथन
PM-Economic Advisory Council Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी 'प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद' (EAC-PM) के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा आपूर्ति चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक विकास दर को मजबूती प्रदान करना है।
आर्थिक सुधार और 'ईज ऑफ लिविंग' पर जोर
सूत्रों के अनुसार, बैठक में चर्चा का केंद्र देश की आर्थिक गति को बनाए रखने और विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के उपाय रहे। पीएम मोदी ने विशेष रूप से ऐसे सुधारों पर चर्चा की, जिनसे आम नागरिकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन की सुगमता) बेहतर हो सके और देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का माहौल और अधिक सरल बने। परिषद ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए विकास की गति को तेज करने के रास्तों पर मंथन किया।
PM Narendra Modi chairs a meeting with members of the PM-Economic Advisory Council.
— ANI (@ANI) June 6, 2026
PM and the EAC discussed various ideas and measures to further boost India’s economic growth in times of global turmoil. Various reforms to improve ease of living and ease of doing business were… pic.twitter.com/8eDoam9Jut
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक चुनौतियां
बैठक में परिषद के सदस्यों ने बदलते अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिवेश और भारत पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया। चर्चा में विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष का वैश्विक बाजारों, व्यापार प्रवाह, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि पर पड़ने वाले असर को प्राथमिकता दी गई। विशेषज्ञों ने साझा किया कि कैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का सामना कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
क्या है वर्तमान स्थिति?
अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने शुक्रवार को ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे थे। इसके बाद, अमेरिकी बलों ने ईरान के तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये ड्रोन समुद्री यातायात के लिए खतरा थे। इस क्षेत्र से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस का आयात-निर्यात करता है। इस ताजा टकराव ने संघर्ष विराम के टूटने और दोनों देशों के बीच फिर से सीधी जंग शुरू होने के डर को बढ़ा दिया है।
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