सीएम योगी ने इस जिले को दी 516 करोड़ की सौगात, 262 परियोजनाओं का किया शिलान्यास
UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में लगातार विकास की नई-नई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं. सीएम योगी ने शनिवार (6 जून, 2026) को गोंडा में 516 करोड़ रुपये 262 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इस दौरान सीएम योगी ने कई लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), प्रधानमंत्री मत्य संपदा योजना, मैकनाइजेशन योजना, पीएम सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना समेत कई योजनाएं के लाभार्थयों को चेक और प्रमाण पत्र वितरण किए.
सीएम योगी ने की गोंडा के किसानों की तारीफ
इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि गोंडा अत्यंत ऊर्जावान जनपद है. यहां के युवा ऊर्जावान हैं, यहां के किसान परिश्रमी है. यहां की बहनें और बेटियां प्रतिभाशाली हैं. सीएम योगी ने कहा कि यहां के शिल्पकारों को जब भी अवसर मिला है अपने हुनर की छाप देश और दुनिया में पहुंचाने में कोई कमी नहीं की है. सीएम योगी ने आगे कहा कि गोंडा का अपना पौराणिक इतिहास है. उन्होंने कहा कि गोंडा ने देश के स्वाधीनता आंदोलन में कड़ी भूमिका निभाई, लेकिन आजादी के बाद जो विकास यहां होना चाहिए था वह विकास तुष्टिकरण की भेंट चढ़ गया.
'गोंडा का नौजवान अब सरकार नौकरी हासिल कर सकता है'
सीएम योगी ने कहा कि यहां कि विकास भाई-भतीजे बाद और जातिवाद की भेंट चढ़ गया. उन्होंने कहा कि उसी का खामियाजा गोंडा को भुगतना पड़ा. सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के नौजवानों को नौकरी मिल रही है, सरकारी नौकरी, पुलिस में 60244 भर्ती हुई जिसमें गोंडा के सैकड़ों नौजवान भर्ती हुए. सीएम योगी ने आगे कहा कि आज कोई भी सरकार भर्ती आती है में नियुक्ति पत्र देने जाता हूं तो सबसे पहले उसकी सूची देखता हूं. सीएम योगी ने कहा कि मुझे अच्छा लगता है कि अब गोंडा का नौजवान भी सरकारी नौकरी प्राप्त करता है.
अब गोंडा में भी आ रहा निवेश- सीएम योगी
सीएम योगी ने कहा कि अब निवेश केवल गौतमबुद्ध नगर, नोएडा और गाजियाबाद में और मेरठ में नहीं हो रहा है अब निवेश गोंडा में भी हो रहा है. जिससे यहां के नौजवानों को रोजगार भी आ रहा है. सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है. हर पात्र व्यक्ति को वह किसी जाति का हो, किसी मत संप्रदाय को हो अगर वह पात्रता की श्रेणी में आता है तो उसके साथ कोई भेदभाव नहीं होगी.
एनएफएचएस-6 डेटा को लेकर जेपी नड्डा ने खड़गे को घेरा, कहा- 'अधूरी जानकारी खतरनाक'
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर तीखा हमला करते हुए उनकी स्वास्थ्य संबंधी टिप्पणियों को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर नड्डा ने कहा कि अधूरी जानकारी जन-स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम पैदा कर सकती है। उन्होंने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों का बचाव किया।
नड्डा ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “खड़गे जी की अधूरी जानकारी खतरनाक है। जन-स्वास्थ्य का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। चुनिंदा जानकारी से राजनीति तो सध सकती है, लेकिन देश का भला तथ्यों से ही होता है।”
केंद्रीय मंत्री ने एनएफएचएस-3 (2005-06) और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9 फीसदी से बढ़कर 76.2 फीसदी हो गया है। संस्थागत प्रसव 38.7 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 46.6 फीसदी से बढ़कर 91.3 फीसदी हो गया है।
उन्होंने कहा कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1 फीसदी दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9 फीसदी से बढ़कर 60.2 फीसदी तक पहुंच गया है। वहीं, बच्चों में कुपोषण के प्रमुख संकेतकों में से एक स्टंटिंग की दर 48 फीसदी से घटकर 29.3 फीसदी रह गई है।
नड्डा ने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि लाखों माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की कहानी हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल को लेकर भी आलोचना की और उसे नीतिगत विफलता का दौर बताया।
विवाद की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक पोस्ट से हुई थी। खड़गे ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार न सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि अहम डेटा को भी दबा रही है।”
खड़गे ने दावा किया कि हर पांच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है, एक-तिहाई बच्चों का वजन कम है और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। साथ ही, उन्होंने सरकार पर चुनिंदा आंकड़े प्रस्तुत कर असफलताओं को छिपाने का आरोप लगाया।
--आईएएनएस
एससीएच/एएस
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