JSSC-CGL Exam Row: 14वीं JPSC रद्द पर CGL से इनकार! जानिए परीक्षा रद्द करने पर सरकार के 3 बड़े कानूनी पेंच
रांची की सड़कों पर लाठियां खाने और हफ्तों से धरने पर बैठे लाखों युवाओं के बीच यह सवाल सबसे तेज है कि जब सरकार 14वीं जेपीएससी रद्द कर सकती है, तो जेएसएससी-सीजीएल को रद्द करने में उसके हाथ क्यों कांप रहे हैं?
हाल ही में हेमंत सोरेन सरकार के प्रतिनिधि और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने छात्र प्रतिनिधिमंडलों के साथ करीब 6 घंटे तक लंबी वार्ता की। सरकार का दावा है कि उन्होंने छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली हैं, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर पेच पूरी तरह से फंसा हुआ है।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द न करने के पीछे सरकार के 3 बड़े पेंच
1. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का कानूनी कवच
सरकार की ओर से सबसे बड़ा तर्क अदालती प्रक्रियाओं का दिया जा रहा है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा का आयोजन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और उनकी सीधी निगरानी में कराया गया था।
सरकार का कहना है कि जब कोई मामला शीर्ष अदालतों की निगरानी में हुआ हो, तो राज्य सरकार के पास इसे एकतरफा रद्द करने का अधिकार नहीं होता। बिना किसी ठोस कानूनी आधार के इसे रद्द करने पर फैसला सीधे जुडिशियल रिव्यू में फंस जाएगा।
2. रिजल्ट आ चुका है और चयनितों की हो चुकी है जॉइनिंग
सरकार का दूसरा प्रमुख तर्क प्रशासनिक स्थिति से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, सीजीएल परीक्षा की भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। परिणाम घोषित किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में सफल उम्मीदवार अपनी-अपनी पोस्टिंग पर जॉइन भी कर चुके हैं।
सरकार का मानना है कि ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द होने पर चयनित अभ्यर्थी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया सालों-साल के लिए लटक जाएगी।
3. सीबीआई जांच से इनकार, सीआईडी और ईडी का विकल्प
छात्रों की स्पष्ट मांग है कि पूरी परीक्षा रद्द की जाए और एजेंसी की भूमिका की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए। हालांकि, सरकार ने सीबीआई जांच की मांग ठुकराते हुए सीआईडी (CID) जांच जारी रखने और रिटायर्ड जज की निगरानी का प्रस्ताव दिया है।
सरकार ने कहा है कि यदि सीआईडी जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो मामले में प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच का आग्रह किया जाएगा, लेकिन परीक्षा रद्द नहीं की जाएगी।
छात्रों का पलटवार: 'सरकार 98% का झूठ बोल रही है'
दूसरी तरफ, आंदोलनकारी छात्र सरकार के दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार 98% मांगें मानने का झूठा भ्रम फैला रही है। हकीकत यह है कि 13 विवादित परीक्षाओं में से सिर्फ 3 परीक्षाओं (14वीं JPSC प्रीलिम्स और JPSC बैकलॉग 2023, 2025) को ही रद्द किया गया है।
छात्रों का आरोप है कि जब पेपर लीक और परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के फर्जीवाड़े के साफ सबूत मौजूद हैं, तो अदालती प्रक्रिया का बहाना बनाकर केवल सिंडिकेट को बचाने की कोशिश की जा रही है।
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