UNGA में कश्मीर मुद्दे पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, कहा- ये झूठ फैलाने का मंच नहीं
भारत को एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए देखा गया। यूएन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल हुए। यहां उन्होंने साफतौर पर कहा कि पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर के लिए उठाए जा रहा मुद्दा पूरी तरह से गलत है।वो ये भी कहते दिखाई दिए की इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे देश को कुछ कहने का अधिकार नहीं है क्योंकि यह भारत का अहम हिस्सा है।
पर्वथनेनी हरीश ने सिक्योरिटी काउंसिल की सालाना रिपोर्ट पर यूएनजी में 2027 28 के लिए 5 नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई भी दी है। इन सदस्यों में जिंबॉब्वे, पुर्तगाल, ऑस्ट्रिया, किर्गिस्तान, टोबैगो और त्रिनिदाद शामिल है। वह यह कहते नजर आए कि सुरक्षा परिषद पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है इसलिए भारत कुछ बातें साफ-साफ रखना चाहता है।
पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश
हरीश ने अपने भाषण में कहा कि पाकिस्तान ने पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले जम्मू कश्मीर का जिक्र किया है। इस वजह से मुझे जवाब देना पड़ रहा है। पाकिस्तान ने अपने विभाजनकारी राजनीतिक हितों के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मंच का गलत इस्तेमाल करने की अपनी आदत को इस मंच पर भी जारी रखा। उन्होंने कहा सुरक्षा परिषद में अपनी मौजूदगी का पाकिस्तान ने पूरी तरह से गलत इस्तेमाल किया और गुमराह करने वाली बातें भी फैलाई। ये रवैया बिल्कुल ठीक नहीं है। मैं पाकिस्तान को याद दिलाना चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होना बड़ी जिम्मेदारी है। यह झूठी और पक्षपाती बातें फैलाने का मंच नहीं है।
PR @AmbHarishP delivered ????????’s statement at the @UN General Assembly Plenary on Annual Report of the Security Council.
Full remarks here: https://t.co/7ezoeMjYJ1
@MEAIndia @IndianDiplomacy @PMOIndia @PIB_India pic.twitter.com/QWaDkTacmm— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) June 5, 2026
कश्मीर भारत का अहम हिस्सा
हरीश ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि मैं ये बात साफ तौर पर जोर देकर कहना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य और अभिन्न हिस्सा था और हमेशा रहेगा। इसके विपरीत कोई भी दावा बेबुनियाद और ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है। पाकिस्तान की बयानबाजी और झूठी बातों से सच्चाई नहीं बदलेगी।
परिषद को लेकर क्या कहा
पी हरीश ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट विश्लेषणात्मक होनी चाहिए इसे तथ्यों के आधार पर तैयार नहीं किया जाना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनी रहे यह परिषद का मुख्य दायित्व है। इसे पूरा करने के संबंध में जो सुधार के क्षेत्र और कमियां है उन्हें रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। मौजूदा ढांचा 1945 की भू राजनीतिक सच्चाई दिखाता है। भविष्य में भी ऐसा रहा तो काम प्रभावी ढंग से नहीं होगा।
बंगवार माइंस में मौत का मंजर, अचानक धंसी खदान की छत, 2 श्रमिकों ने गंवाई जान
शहडोल जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र स्थित एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की बंगवार भूमिगत कोयला खदान में शुक्रवार दोपहर हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर उस समय स्टॉपिंग वॉल निर्माण में जुटे थे, तभी अचानक छत का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। हादसा इतना अचानक हुआ कि मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दुर्घटना की खबर मिलते ही खदान परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में बल्लू बैगा और गोलू बैगा की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं प्रेमलाल विश्वकर्मा, राजकुमार यादव, अमित यादव और अंजनी बैगा घायल हो गए। घायलों को तत्काल रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ श्रमिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। घटना के बाद मृतक मजदूरों के परिवारों में शोक का माहौल है।
कैसे हुआ हादसा और क्या है शुरुआती जांच?
जानकारी के मुताबिक हादसा शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे दूसरी पाली के दौरान हुआ। मजदूर खदान के अंदर स्टॉपिंग वॉल तैयार कर रहे थे। इसी दौरान खदान की छत का कमजोर हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। मलबे की चपेट में कई मजदूर आ गए। राहत की बात यह रही कि रेस्क्यू टीम ने तेजी दिखाते हुए घायलों को समय पर बाहर निकाल लिया।
हादसे के बाद एसईसीएल प्रबंधन, सुरक्षा अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि छत की चट्टानों का कमजोर हिस्सा दबाव नहीं झेल पाया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पूरी तकनीकी जांच के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट हो सकेगा। खदान के प्रभावित क्षेत्र को फिलहाल सुरक्षित घेरा बनाकर बंद कर दिया गया है ताकि जांच और सुरक्षा संबंधी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे किए जा सकें।
कोयला खदान सुरक्षा पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट का इंतजार
इस हादसे के बाद भूमिगत खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत खदानों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, छत की मजबूती की जांच और आधुनिक निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। यदि किसी हिस्से में संरचनात्मक कमजोरी के संकेत मिलते हैं तो वहां काम शुरू करने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए।
एसईसीएल प्रबंधन ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतक मजदूरों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जा रही है।
फिलहाल खदान में राहत और तकनीकी जांच का काम जारी है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल दो परिवारों को गहरा दुख दिया है, बल्कि खदानों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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