हिमाचल प्रदेश में लगे भूकंप के तेज झटके, रिक्टर पैमाने पर 4.8 रही तीव्रता
हिमाचल और हरियाणा के कई इलाकों में महसूस किए गए भूकंप के झटके, जानें कितनी रही तीव्रता
हिमाचल में देर रात आए भूकंप के झटकों ने लोगों को कुछ देर के लिए दहशत में जरूर डाल दिया, लेकिन राहत की बात यह रही कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है. कांगड़ा, चंबा, धर्मशाला, शिमला और कुल्लू समेत प्रदेश के कई हिस्सों में लोगों ने कंपन महसूस किया और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए. यह घटना एक बार फिर हिमाचल प्रदेश की भूकंपीय संवेदनशीलता की याद दिलाती है. इसके अलावा हरियाणा के भी कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. हालांकि किसी भी तरह की जान-माल की हानि की कोई खबर नहीं है.
हिमाचल में भूकंप से हिली धरती, रात में महसूस हुए तेज झटके
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी. रात करीब 10 बजकर 4 मिनट पर आए इस भूकंप को प्रदेश के कई जिलों में महसूस किया गया. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप का केंद्र धर्मशाला और चंबा क्षेत्र के आसपास बताया गया, जबकि इसकी तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं.
भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों, होटलों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकल आए. कुछ इलाकों में लोग देर रात तक खुले स्थानों पर मौजूद रहे. हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.
चंबा और कांगड़ा में सबसे अधिक असर
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र चंबा जिले के आसपास था. इसकी गहराई जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई, जिसके कारण झटके अपेक्षाकृत अधिक महसूस हुए. कांगड़ा, धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने कुछ सेकंड तक धरती को हिलते हुए महसूस किया.
स्थानीय लोगों के अनुसार कई घरों में पंखे और अन्य सामान हिलने लगे, जिससे लोग घबराकर बाहर निकल आए. सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भूकंप के अनुभव साझा किए.
क्यों संवेदनशील है हिमाचल प्रदेश?
हिमाचल प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जो भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं. राज्य का बड़ा हिस्सा भूकंप के उच्च जोखिम वाले जोन-4 और जोन-5 में आता है. विशेष रूप से कांगड़ा, चंबा और धर्मशाला क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र लगातार भूगर्भीय बदलावों से गुजर रहा है. भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच होने वाली हलचल के कारण यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं.
प्रशासन ने लोगों से की अपील
भूकंप के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है. अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है. इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत संपर्क करने की सलाह दी गई है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है.
क्या सीख देता है यह भूकंप?
हालांकि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयार रहने की आवश्यकता को रेखांकित करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा उपायों की जानकारी होनी चाहिए और भवन निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है.
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