गुजरात में खिलाड़ियों को बड़ा तोहफा, ‘शक्तिदूत 2.0’ में सहायता राशि बढ़कर 50 लाख रुपये
गुजरात सरकार ने राज्य के खिलाड़ियों और इंटरनेशनल स्तर पर देश का नाम रौशन करने के लिए शक्तिदूत योजना में बड़े सुधार किए हैं. सरकार ने शक्तिदूत 2.0 लॉन्च कर दिया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की लीडरशिप में यह योजना खिलाड़ियों को नई सुविधाएं देगी. योजना रमशे गुजरात, जीतशे गुजरात के संकल्प के साथ काम करेगी.
12 अगस्त को राजधानी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में योजना के राज्यव्यापी शुभारंभ किया गया, जिसमें 799 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया. इसके साथ ही विभिन्न जिलों में 388 करोड़ रुपये से अधिक की खेल और पुस्तकालय परियोजनाओं का ई-भूमिपूजन और ई-लोकार्पण भी किया. शक्तिदूत योजना का उद्देश्य उभरती खेल प्रतिभाओं को उनकी जरूरत के अनुसार, बेहतर खेल सुविधाएं, आधुनिक उपकरण, पौष्टिक आहार, स्पेशलाइज्ड कोच, मेडिकल मदद और देश-विदेश में ट्रेनिंग उपलब्ध करवाना है. साल 2015 से अब तक योजना से जुड़े खिलाड़ियों ने 1,604 पदक जीते हैं, जिसमें 831 नेशनल और 773 इंटरनेशनल लेवल के पदक शामिल हैं.
खिलाड़ियों को अब 50 लाख तक सहायता
‘शक्तिदूत 2.0’ में खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है. दिव्यांग, पैरा, बधिर और दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को भी समान अवसर और सहायता दी जाएगी. नई व्यवस्था में प्रतिभाओं की पहचान जमीनी स्तर से करने के लिए आवेदन की न्यूनतम आयु 12 वर्ष से घटाकर 9 वर्ष से अधिक कर दी गई है. खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर लगातार सहायता मिलेगी और पहले की तरह निश्चित समय सीमा नहीं होगी.
सिलेक्शन प्रोसिजर को बनाया जाएगा ट्रांसपेरेंट
चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए वैज्ञानिक पॉइंट-बेस्ड सिस्टम लागू किया गया है. ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं को विशेष महत्व दिया जाएगा. इसके अलावा, योजना से बाहर रहने वाले लेकिन सालभर में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ‘शक्तिदूत B’ के तहत तत्काल आर्थिक सहायता मिलेगी.
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा फोकस
राज्य में 11 तालुका स्तरीय खेल परिसर, 7 जिला स्तरीय खेल परिसर, पुस्तकालय, स्टडी हॉल, स्पोर्ट्स हॉस्टल, 400 मीटर सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक और एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान सहित कई परियोजनाओं पर काम होगा. सरकार का लक्ष्य बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सहयोग के जरिए गुजरात की खेल प्रतिभाओं को ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे बड़े मंचों के लिए तैयार करना है.
ईरान पर कब तक रहेगी अमेरिका की नाकेबंदी? युद्ध सचिव हेगसेथ ने खुद दी जानकारी
US blockade on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमने के बाद भी शांति नहीं है. अमेरिका लगातार होर्मुज और समुद्री क्षेत्र से ईरान के लिए नाकेबंदी किए बैठा है. अमेरिका होर्मुज में 100 प्रतिशत कंट्रोल का दावा कर रहा है. वहीं ईरान लगातार अमेरिकी नाकेबंदी का विरोध कर रहा है. ईरान का कहना है कि नाकेबंदी हटने तक वह होर्मुज को नहीं खोलेगा. इसी बीच अमेरिका ने नाकेबंदी पर बयान दिया है.
अमेरिकी युद्ध सचिव हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी अनिश्चित काल तक जारी रख सकता है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार (स्थानीय समय) को ईरानी बंदरगाहों पर संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी को अनिश्चित काल तक और जब तक आवश्यक हो, जारी रखने की चेतावनी दी. हालांकि अभी तक इस बयान पर ईरान की टिप्पणी सामने नहीं आई है.
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हेगसेथ ने बताया- कैसे जाएंगे जहाज?
पनामा सिटी में पत्रकारों से बात करते हुए, हेगसेथ ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी नौसेना आवश्यकतानुसार क्षेत्र में जहाजों को बारी-बारी से भेजकर नाकाबंदी को बरकरार रख सकती है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना अनिश्चित काल तक इस तरह की नाकाबंदी बनाए रख सकती है क्योंकि हम जहाजों को बारी-बारी से अंदर-बाहर भेजते रहेंगे, जैसा कि हम करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे.
ट्रंप ने 100 प्रतिशत कंट्रोल का किया दावा
हेगसेथ का यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा. ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर बातचीत रुकी हुई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी को लोग ‘स्टील की दीवार’ बता रहे हैं और ईरान इसे रोकने की स्थिति में नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है और हालात लगातार खराब हो रहे हैं।
ईरान ने खारिज किया दावा
ट्रंप के मुताबिक, ईरान सिर्फ बयान देता है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा और अब वह मध्य पूर्व में पहले जैसा प्रभावशाली नहीं रहा है. हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा.
PGSA ने अमेरिका को दिया सख्त संदेश
फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGSA) ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार यह कहने से कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब बंद नहीं है, जमीनी स्थिति नहीं बदली है. PGSA के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें माने जाने तक इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा.
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क्यों खास है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है. यहां पहले भी कई बार सैन्य तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और बड़े संघर्ष का खतरा पैदा हुआ है. मौजूदा तनाव के बीच नौसैनिक गश्त बढ़ा दी गई है और कई वाणिज्यिक जहाजों ने अपने रास्ते बदल दिए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील भी की जा रही है.
फिलहाल इस अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षा के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बातचीत के जरिए अस्थायी युद्धविराम हो सकता है, जिससे संघर्ष का खतरा कम हो और समुद्री व्यापार सामान्य बना रहे.
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