TMC बोली- ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाना अवैध:स्पीकर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे; अभिषेक बनर्जी पार्टी महासचिव बने रहेंगे
TMC में टूट के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पहली बार सीनियर नेताओं के साथ मीटिंग की। पार्टी ने विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के फैसले को अवैध बताया है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि स्पीकर के फैसले के खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगें। बागी विधायकों को पहले अपने-अपने क्षेत्रों की जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए। ममता बनर्जी के घर हुए मीटिंग में 8 विधायक और 6 सांसद पहुंचे। ममता के भतीजे अभीषेक बनर्जी पार्टी के महासचिव बने रहेंगे। वहीं, ममता बनर्जी अध्यक्ष बनी रहेंगी। 3 जून को TMC के 58 बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपा था। स्पीकर ने उन्हें नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। ऋतब्रत बनर्जी बोले- आगे बहुत कुछ हो सकता है इधर, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि TMC के 20 से 23 सांसद बागी खेमे और BJP के संपर्क में हैं। हालांकि, इसपर ऋतब्रत बनर्जी ने शुक्रवार को कहा, "मैं पिछले सात दिनों से किसी सांसद के संपर्क में नहीं हूं। इसलिए यह नहीं कह सकता कि सांसद क्या करेंगे। 3 जून को 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता चुना था 3 जून को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। ये विधायक अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं। पार्टी में विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष चुनने के प्रस्ताव पर फर्जी साइन का आरोप लगाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। TMC के विधानसभा में कुल 80 विधायक है। वहीं, संसद में कुल 41 सांसद हैं। इनमें 28 लोकसभा और 13 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं। TMC से अलग गुट बनाने वाले दो बड़े चेहरे… ममता ने पार्टी कमेटियां भंग कर दी थीं पार्टी के भीतर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने 3 जून को ही राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था। फर्जी साइन की शिकायत करने पर निकाले गए थे 2 विधायक ममता बनर्जी ने TMC से 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया था। दोनों ने स्पीकर से शिकायत की थी कि पार्टी ने शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव में उनके उनके फर्जी साइन किए थे। साहा और बनर्जी का आरोप है कि यह शिकायत करने पर ही दोनों TMC से निकाले गए। बीते 10 साल में देश के 4 बड़े राज्यों में पांच दलों में टूट हुई ----------- ये खबर भी पढ़ें… 13 दिन में टूटी 28 साल पुरानी TMC:निष्कासित विधायक बोले-अभिषेक के खिलाफ बोल नहीं सकते थे; बगावत हुई क्योंकि फैसले थोपे जा रहे थे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच, पार्टी से निकाले गए नेता संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर किसी को भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं थी। TMC की हार के बावजूद, नेताओं को डायमंड हार्बर के सांसद की तारीफ करने का निर्देश दिया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तराखंड SIR: 8 जून से घर-घर जाएंगे BLO, गणना फॉर्म का करेंगे वितरण, 15 सितंबर को आएगी अंतिम मतदाता सूची
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम ने अब गति पकड़ ली है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने हाल ही में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि प्रदेशभर में इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का तीन चरणों में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है, साथ ही गणना फॉर्मों की शत-प्रतिशत प्रिंटिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।
यह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर संपन्न की जाएगी। इस क्रम में, 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक, यानी पूरे एक महीने की अवधि में, बीएलओ घर-घर जाकर गणना फार्मों का वितरण और संकलन करेंगे। इसी दौरान, एकत्रित किए गए मतदाताओं के गणना फार्मों को बीएओ (बूथ असिस्टेंट ऑफिसर) ऐप के माध्यम से डिजिटलाइज कर अपलोड करने का कार्य भी किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित होगी।
15 सितंबर 2026 को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
जोगदंडे ने आगे जानकारी दी कि 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल (प्रारंभिक मतदाता सूची) का प्रकाशन किया जाएगा। इसके साथ ही, मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक का एक माह का समय दिया जाएगा। इन दावों और आपत्तियों का निस्तारण 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 के बीच सभी आवश्यक नोटिस जारी करने के बाद किया जाएगा। अंततः, भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
79.60 लाख मतदाताओं को मिलेगा गणना फार्म
प्रदेश में कुल 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं को गणना फार्म उपलब्ध कराए जाएंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए, वे स्वयं भी ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से अपना गणना फार्म ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं और इसे भरकर अपलोड कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, यदि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाना चाहता है, तो वह अपने बीएलओ से संपर्क कर फार्म 6 भर सकता है। इन फार्मों पर दावे-आपत्तियों के निस्तारण के समय विचार किया जाएगा।
‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ से मतदाताओं की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए “बुक ए कॉल विद बीएलओ” नामक एक नई सुविधा शुरू की है। इसके माध्यम से मतदाता केवल एक क्लिक पर अपने बीएलओ के साथ फोन कॉल बुक करा सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को https://voters.eci.gov.in वेबसाइट पर विजिट करना होगा या ECI-NET मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। कॉल बुक कराने के बाद, संबंधित बीएलओ द्वारा दो दिनों के भीतर स्वयं मतदाता से संपर्क किया जाएगा, जिससे उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
2003 की मतदाता सूची अब ऑनलाइन
इसके अतिरिक्त, मतदाताओं की सुविधा के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर उपलब्ध कराई गई है। यहां मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र, अपने नाम तथा अपने पिता/पति के नाम के आधार पर मतदाता क्रमांक और बूथ संख्या की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। गली, मोहल्लों और एरिया के नाम से भी मतदाता सूची खोजने की विशेष सुविधा प्रदान की गई है, जिससे जानकारी तक पहुंच और सुगम हो गई है।
इस विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में हाल ही में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। डॉ. जोगदंडे ने सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) नियुक्त करें। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में 11733 पोलिंग बूथ के सापेक्ष राजनैतिक दलों द्वारा कुल 22823 बीएलए की तैनाती की जा चुकी है, जो कार्यक्रम की सफलता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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