Summer Face Pack: गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। कई लोगों को टैनिंग, ऑयली स्किन, पिंपल्स और चेहरे की चमक कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बजाय कुछ घरेलू चीजों से तैयार फेस पैक आपकी स्किन को राहत देने में मदद कर सकता है।
ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्राकृतिक सामग्री से बने फेस पैक त्वचा को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ उसे हाइड्रेटेड और फ्रेश रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप गर्मी में नेचुरल ग्लो पाना चाहते हैं, तो घर में मौजूद सिर्फ 4 चीजों से तैयार यह फेस पैक आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
4 चीजों से तैयार करें नेचुरल फेस पैक
2 चम्मच दही
1 चम्मच बेसन
1 चम्मच खीरे का रस
1 चम्मच गुलाब जल
कैसे बनाएं फेस पैक?
सबसे पहले एक साफ बाउल में दही, बेसन, खीरे का रस और गुलाब जल डालें। इन सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार कर लें। ध्यान रखें कि मिश्रण ज्यादा पतला या ज्यादा गाढ़ा न हो।
लगाने का सही तरीका
चेहरे को साफ पानी से धो लें और हल्के हाथों से सुखा लें। अब तैयार फेस पैक को पूरे चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं। इसे 15 से 20 मिनट तक सूखने दें। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
इस फेस पैक के फायदे
त्वचा को ठंडक पहुंचाए खीरे का रस और गुलाब जल त्वचा को ठंडक देने में मदद करते हैं। गर्मियों में यह स्किन को फ्रेश महसूस कराते हैं।
नेचुरल ग्लो बढ़ाए दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है, जिससे चेहरे की चमक बढ़ सकती है।
टैनिंग कम करने में सहायक धूप के कारण होने वाली हल्की टैनिंग को कम करने में यह फेस पैक मददगार साबित हो सकता है।
ऑयल कंट्रोल में मदद बेसन त्वचा से अतिरिक्त तेल को हटाने में मदद करता है, जिससे चेहरा साफ और तरोताजा दिखाई देता है।
त्वचा को हाइड्रेट रखे दही और गुलाब जल त्वचा में नमी बनाए रखने में सहायक होते हैं, जिससे स्किन रूखी नहीं लगती।
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6 जून को दिल्ली में आखिर क्या होने वाला है? एक तरफ लाखों समर्थकों का दावा करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन पर अड़ी हुई है। तो वहीं दूसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना पुलिस अनुमति के आंदोलन कैसे होगा? पार्टी कह रही है कि पहले दिल्ली पहुंचेंगे फिर परमिशन मांगेंगे। लेकिन अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? 6 जून से पहले यही सवाल राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक गूंज रहा है। दरअसल 6 जून को दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रस्ताविक प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। पार्टी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग को लेकर आंदोलन का प्रचार कर रही है। लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि जिस प्रदर्शन का ऐलान कई दिनों पहले कर दिया गया था, उसके लिए अभी तक दिल्ली पुलिस से अनुमति क्यों नहीं ली गई है? क्रॉकर जनता पार्टी जो सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी हुई है।
नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 6 जून को राजधानी में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। पार्टी का दावा है कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहती है। लेकिन आमतौर पर दिल्ली में किसी बड़े धरना प्रदर्शन के लिए पहले से पुलिस की अनुमति लेना जरूरी माना जाता है। इसी मुद्दे पर जब पार्टी से सवाल पूछा गया तो नवनियुक्त प्रवक्ता विजेता दहिया ने इसे पार्टी की रणनीति का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन से लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और समर्थक सीधे संस्थापक अभिजीत दीपके से जुड़े हुए हैं। इसलिए फैसला लिया गया है कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए खुद अभिजीत दीपके ही 6 जून को दिल्ली पहुंचकर आवेदन करेंगे। पार्टी के अनुसार अभिजीत दीपके अमेरिका से शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि उनके समर्थक एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद समर्थकों के साथ वह संसद स्ट्रिक्ट पुलिस स्टेशन जाकर जंतरमंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। अनुमति मिलने के बाद प्रदर्शन शुरू करने की योजना है।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक मुहिम ने बेहद कम समय में बड़ी लोकप्रियता हासिल की है। पार्टी का दावा है कि उसके करोड़ों फॉलोअर्स हैं और बड़ी संख्या में छात्र तथा युवा उसके अभियान का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक वर्ग का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति के प्रदर्शन की घोषणा करना विवाद को जन्म दे सकता है। तो वहीं उनका तर्क है कि यदि पुलिस कारवाई करती है तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है और बाद में इसे लोकतांत्रिक [संगीत] अधिकारों के मुद्दों के रूप में पेश किया जा सकता है। वहीं पार्टी समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। उनका सवाल है कि जब प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना है तो फिर अनुमति की प्रक्रिया को लेकर इतना विवाद क्यों होना चाहिए? फिलहाल 6 जून के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर चल रही यह बहस लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
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