'टॉक्सिक' के सेट पर कियारा आडवाणी की प्रेग्नेंसी ने बढ़ाई यश की टेंशन, बोले- 'हम बाउंसर बनकर घूमते थे'
‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की शूटिंग के दौरान कियारा आडवाणी ने प्रेग्नेंसी के बावजूद अपने काम के प्रति पूरा समर्पण दिखाया. उनकी प्रोफेशनलिज्म और जुनून ने को-स्टार यश को काफी प्रभावित किया. फिल्म के ऑडियो लॉन्च पर यश ने बताया कि वह और डायरेक्टर गीतू मोहनदास कियारा की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित रहते थे कि सेट पर बाउंसर और बॉडीगार्ड की तरह उनका ख्याल रखते थे. उन्होंने कियारा की मेहनत को फिल्म के लिए खास बताया.
ग्लोबल स्पेस मार्केट का 10 फीसदी हिस्सा हासिल कर सकता है भारत : अमेरिकी वाणिज्य विभाग
वॉशिंगटन, 14 अगस्त (आईएएनएस)। अगले सात सालों में ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पॉलिसी में सुधार और अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों से भारत के प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री की वृद्धि में तेजी आएगी। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने दी है।
अभी ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। लेकिन विभाग के इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने अगस्त के एयरोस्पेस एंड डिफेंस एक्सपोर्टर अलर्ट में अनुमान लगाया है कि अगले पांच से सात सालों में यह हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
विभाग ने कहा, भारत का प्राइवेट सेक्टर स्पेस इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और भारत सरकार के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों से इंटरनेशनल स्पेस कंपनियों के लिए भी मौके बनेंगे। इस अलर्ट में भारत के स्पेस सेक्टर को मार्केट ऑफ द मंथ बताया गया है। इसमें अमेरिकी कंपनियों के लिए सैटेलाइट सिस्टम, एडवांस्ड स्पेसफ्लाइट, कनेक्टिविटी, मैन्युफैक्चरिंग और संबंधित टेक्नोलॉजी में निवेश के मौकों पर जोर दिया गया।
1963 में भारत के पहले रॉकेट लॉन्च के समय से ही अमेरिका और भारत स्पेस के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। वह रॉकेट अमेरिका में बना नाइक-अपाचे था। तब से यह साझेदारी वैज्ञानिक आदान-प्रदान, संयुक्त वर्किंग ग्रुप और मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स के जरिए बढ़ी है। नासा और अमेरिकी कंपनियों ने इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स भी सप्लाई किए हैं।
विभाग ने कहा कि भारत के नए स्पेस स्टार्टअप्स अमेरिका में अपने कामकाज और मैन्युफैक्चरिंग की मौजूदगी को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फरवरी 2026 में बिजनेस काउंसिल फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग ने इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन से सर्टिफाइड अमेरिकी कमर्शियल स्पेस मिशन की बेंगलुरु यात्रा का नेतृत्व किया। अलर्ट में इसे सफल बताया गया है।
विभाग ने कहा, स्पेस अमेरिका और भारत के बीच सहयोग का एक अहम क्षेत्र है, जिससे व्यापार, टेक्नोलॉजी और संयुक्त नीतिगत प्रयासों के ज़रिए दोनों देशों को फायदा होता है। व्यावसायिक संबंध अमेरिका-इंडिया सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप के जरिए विकसित किए जा रहे हैं। अलर्ट के अनुसार, 2025 में शुरू की गई ट्रस्ट पहल से भी सहयोग मजबूत हुआ है।
कमर्शियल स्पेस सब-वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व संयुक्त रूप से अमेरिकी वाणिज्य विभाग और भारत के अंतरिक्ष विभाग द्वारा किया जाता है। इसका मकसद दोनों देशों की कंपनियों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करना है। इसके काम में बाजार तक पहुंच, खरीद, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) और निर्यात नियंत्रण शामिल हैं। फरवरी 2025 में दोनों देशों के नेताओं के संयुक्त बयान में अंतरिक्ष अन्वेषण, सुरक्षा और पेशेवर आदान-प्रदान में और मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया गया था।
वाणिज्य विभाग ने भारत में प्रवेश करने की इच्छुक अमेरिकी कंपनियों से 7 से 9 सितंबर तक होने वाले बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में शामिल होने का आग्रह किया। यह कार्यक्रम उद्योग के नेताओं और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाएगा और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी क्षमताएं दिखाने का मौका देगा।
--आईएएनएस
ओपी/एएस
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