भुट्टा चाहिए मोटा और दाने चाहिए भरपूर, तो मक्का के खेत में इन कामों को भूलकर भी न भूलें
मक्का की अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ सिंचाई ही नहीं बल्कि समय पर निराई-गुड़ाई, जल निकासी, मिट्टी चढ़ाना, संतुलित पोषण और कीट नियंत्रण भी जरूरी है. भुट्टा निकलने, सिल्क आने और दाने भरने की अवस्था में खेत में नमी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. वहीं बारिश के दौरान जलभराव से बचाव और फॉल आर्मी वर्म की समय पर पहचान भी फसल को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाती है.
धान की पत्तियां पड़ने लगीं हैं पीली और कत्थई, तो हो सकता है खैरा रोग, जानें बचाव का तरीका
धान की फसल में खैरा रोग जिंक की कमी के कारण हो सकता है. इसकी वजह से पौधे छोटे और कमजोर रह जाते हैं और पत्तियों पर पीले या कत्थई धब्बे दिखाई देने लगते हैं. कृषि वैज्ञानिक के अनुसार समय रहते जिंक सल्फेट का उचित मात्रा में छिड़काव करने से जिंक की कमी दूर करने और फसल की बढ़वार सुधारने में मदद मिल सकती है.
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