वांगचुक बोले- 2047 तक भारत विकसित देश नहीं बन पाएगा:नए शिक्षा मंत्री से बदलाव की उम्मीद नहीं, दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू करने की अपील
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय का जिक्र करते हुए कहा कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही, तो 2047 तक भारत विकसित देश नहीं बन पाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी उन्हें नए मंत्री से बड़े बदलाव की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। देश की तरक्की उसकी शिक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़ी हुई है। जब तक शिक्षा पीछे रहेगी, देश का भविष्य भी पीछे रहेगा। उन्होंने गुरुवार देर रात को एक वीडियो किया। इसमें उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इस दौरान उन्होंने देश और उसके भविष्य को लेकर काफी सोचा। वांगचुक ने कहा- पड़ोसी देश भारत से आगे निकल चुका वांगचुक 170 दिन जेल में रहे वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उन पर आरोप था कि अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। -------------- ये खबर भी पढ़ें… पेपर लीक आंदोलन को 4 चेहरों ने क्रांति में बदला:दीपके ने डिजिटल समर्थन जुटाया; वांगचुक के अनशन ने भीड़ को एक किया मई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी वायरल हुई। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अगर कॉकरोच कहे जा रहे युवा एकजुट हो जाएं तो क्या होगा?’ पूरी खबर पढ़ें…
भास्कर अपडेट्स:सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल में देरी को लेकर FSSAI को फटकार लगाई; पूछा- लोगों की सेहत की चिंता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लगाने में देरी को लेकर FSSAI को फटकार लगाई। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें। कोर्ट में 3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही थी। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज वार्निंग लेबल (FOPL) अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग की गई है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए FOPL जरूरी हैं। खासकर बच्चों के लिए, जो तेजी से जंक फूड के आदी हो रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि लेबलिंग के मुद्दे पर उसके पहले दिए गए आदेश के बावजूद अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। याचिका में भारत में गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के बढ़ते बोझ का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि FOPL के जरिए पैकेज्ड फूड में मौजूद अधिक चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा लोगों को साफ तौर पर पता चल सकेगी। आज की अन्य बड़ी खबरें… दिल्ली के पंजाबी बाग में फ्लाईओवर से गिरने से महिला की मौत; परिवार को बिना बताए घर से निकली थी दिल्ली के पंजाबी बाग में ब्रिटानिया चौक के पास फ्लाईओवर से गिरने के बाद 29 साल की महिला की मौत हो गई। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, घटना की सूचना पीसीआर कॉल के जरिए मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद लोगों ने महिला को मोती नगर के आचार्य श्री भिक्षु अस्पताल पहुंचाया। महिला उस समय बोल नहीं पा रही थी। बाद में उसकी पहचान शकूरपुर निवासी के रूप में हुई। उसकी शादी 2019 में हुई थी और उसके दो बच्चे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि महिला की पिछले एक हफ्ते से तबीयत ठीक नहीं थी। वह मानसिक रूप से भी परेशान बताई जा रही थी। महिला दोपहर करीब 1 बजे परिवार को बताए बिना घर से निकली थी। घटना की जांच के लिए क्राइम टीम ने मौके का मुआयना किया। इसके बाद महिला को आरएमएल अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। इतिहासकार सुमित सरकार का निधन, 87 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में जाने जाते थे इतिहासकार सुमित सरकार का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 87 साल के थे। इतिहासकार और परिवार की करीबी मित्र अरुणिमा ने यह जानकारी दी। अरुणिमा ने बताया कि प्रोफेसर सरकार लंबे समय से बीमार थे। कुछ समय से उम्र संबंधी परेशानियों के कारण उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी। सुमित सरकार का जन्म 1939 में इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की थी। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में लेक्चरर और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान में रीडर के तौर पर पढ़ाया। इतिहास के प्रोफेसर के रूप में उनका सबसे लंबा कार्यकाल दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहा। उनकी प्रमुख किताबों में द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल, मॉडर्न इंडिया 1885-1947 और राइटिंग सोशल हिस्ट्री शामिल हैं। इन किताबों ने उन्हें औपनिवेशिक शासन, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन को अलग-अलग सामाजिक समूहों, वर्गों और जन आंदोलनों के नजरिए से समझने वाले प्रमुख इतिहासकार के रूप में स्थापित किया। सुमित सरकार मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन पर महत्वपूर्ण अध्ययन किया और भारतीय राष्ट्रवाद के केवल बड़े नेताओं पर केंद्रित पारंपरिक इतिहास को चुनौती दी। वह सबाल्टर्न स्टडीज कलेक्टिव के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे, हालांकि बाद में उन्होंने इस विचारधारा की आलोचना भी की। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर अपने काम के लिए सुमित सरकार को 2003 में इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी का सरित चटर्जी मेमोरियल अवॉर्ड मिला था। 2004 में उनकी किताब राइटिंग सोशल हिस्ट्री के लिए उन्हें रवींद्र पुरस्कार दिया गया। हालांकि, 2007 में उन्होंने पश्चिम बंगाल की CPI(M) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के किसानों के साथ व्यवहार के विरोध में यह पुरस्कार लौटा दिया था।
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