राज्यसभा चुनाव 2026: मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के नाम पर मुहर, भाजपा ने 11 उम्मीदवारों का किया ऐलान, देखें सूची
देश के सियासी गलियारों में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने कुल ग्यारह उम्मीदवारों के नाम जारी किए हैं, जिनमें द्विवार्षिक चुनाव और एक उपचुनाव के लिए प्रत्याशी शामिल हैं। इस घोषणा के साथ ही भाजपा ने आगामी चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया है, जिसमें विभिन्न राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने का लक्ष्य है।
भाजपा ने मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और रजनेश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया है। ये दोनों नाम पार्टी के भीतर अनुभवी और विश्वसनीय चेहरों में गिने जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश से ताई तागाक को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है। मणिपुर से ए. शारदा देवी को मौका दिया गया है, जो पूर्वोत्तर में पार्टी की पकड़ को मजबूत करने में सहायक होंगी। राजस्थान से दो प्रमुख नाम डॉ. अलका गुर्जर और डॉ. सतीश पूनिया को प्रत्याशी बनाया गया है। इन नामों के जरिए भाजपा ने विभिन्न राज्यों में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।
गुजरात में राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा
गुजरात में राज्यसभा की चार सीटों के लिए भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जीतेंद्र मेघजीभाई कंजारिया को गुजरात से उम्मीदवार बनाया गया है। इन सभी चारों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है, क्योंकि राज्य विधानसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल है। गुजरात के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब कांग्रेस पार्टी का कोई भी सदस्य राज्यसभा में प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। यह भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो राज्य में उसकी मजबूत पकड़ और कांग्रेस के कमजोर होते जनाधार को दर्शाती है।
ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव के लिए देबाशीष सामंतराय का नाम
ओडिशा में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए देबाशीष सामंतराय को भाजपा का प्रत्याशी घोषित किया गया है। यह उपचुनाव उसी सीट के लिए हो रहा है जो स्वयं देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे से रिक्त हुई थी। सामंतराय पहले बीजू जनता दल (बीजेडी) के राज्यसभा सांसद थे। उन्होंने हाल ही में बीजेडी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। भाजपा ने उन्हें तत्काल प्रभाव से उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बनाकर उनके प्रति विश्वास जताया है। यह कदम ओडिशा में भाजपा की रणनीतिक विस्तार का भी संकेत देता है, जहां पार्टी अपने जनाधार को बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा ने अनुभवी और नए चेहरों को दिया मौका
इन ग्यारह प्रत्याशियों की घोषणा को भाजपा की दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए अनुभवी और नए चेहरों का मिश्रण प्रस्तुत किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। राज्यसभा में अपनी संख्या बल को मजबूत करना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पारित होने होते हैं। इन प्रत्याशियों के चयन में पार्टी नेतृत्व ने गहन विचार-विमर्श किया है, जिसमें संबंधित राज्यों के स्थानीय नेताओं से भी राय ली गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां राजनीतिक समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं, इन प्रत्याशियों का चयन पार्टी की स्थिरता और भविष्य की योजनाओं को दर्शाता है। गुजरात में कांग्रेस के शून्य प्रतिनिधित्व का होना भाजपा के लिए एक बड़ी जीत है, जो राज्य में पार्टी के निर्विवाद वर्चस्व को स्थापित करता है। ओडिशा में उपचुनाव के माध्यम से एक पूर्व बीजेडी नेता को टिकट देना भी भाजपा की गठबंधन और विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। इस प्रकार, यह घोषणा केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पैठ मजबूत करने की व्यापक योजना का एक महत्वपूर्ण चरण है। आगामी दिनों में इन प्रत्याशियों के नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके बाद राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
पूर्व कर्मचारी के धर्मांतरण के लिए दबाव डालने के आरोप पर विप्रो ने कहा- जांच में कर रहे पूरा सहयोग
पुणे/नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। पूर्व कर्मचारी के धर्मांतरण के लिए दबाव डालने और जबरन इस्तीफे के कथित आरोपों पर आईटी कंपनी विप्रो ने गुरुवार को कहा कि उसने पुणे पुलिस के साथ सभी जरूरी दस्तावेजों को शेयर कर दिया है और इस मामले की जांच में पूरा सहयोग कर रही है।
कंपनी ने कहा कि वह चल रही जांच में पूरा सहयोग कर रही है और एक सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
आईटी कंपनी ने कहा,“विप्रो में, कर्मचारियों का कल्याण, गरिमा और सम्मान सर्वोपरि है। हम किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, भेदभाव, उत्पीड़न या ऐसे कार्यों के प्रति जीरो-टोलरेंस की नीति अपनाते हैं जो किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता को खतरे में डालते हैं।”
कंपनी ने आगे कहा कि मामला फिलहाल जांच के अधीन है, इसलिए हम मामले की विशिष्टताओं पर टिप्पणी नहीं कर सकते। हम अपने सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कंपनी का यह बयान पूर्व महिला कर्मचारी की शिकायत के बाद आया है, जो उसके हिंजवाड़ी ऑफिस में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर तैनात थी।
पुलिस के पास दर्ज शिकायत में महिला ने कहा कि उसे धार्मिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया और उसके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उस पर इस्तीफा देने का दबाव डाला गया।
शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया है कि एक महिला सहकर्मी ने बार-बार उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव डाला, यह कहते हुए कि इससे उसकी जीवनशैली और भविष्य के अवसर बेहतर होंगे।
उसने यह भी आरोप लगाया कि सहकर्मी ने उसे एक मुस्लिम परिचित से संबंध बनाने और हिंदू धर्म छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कई बार यह मुद्दा उठाने के बावजूद सहकर्मी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
उनके वकील विवेक भोसले ने आरोप लगाया है कि उनका इस्तीफा दबाव में और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए लिया गया था।
शिकायत हिंजवाड़ी पुलिस को सौंप दी गई है, जिसने कंपनी को नोटिस जारी कर कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ बहाली, मुआवजे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, यह मामला धार्मिक उत्पीड़न से संबंधित नहीं है।
--आईएएनएस
एबीएस
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