Explainer: आमिर खान ने किससे की थी पहली और दूसरी शादी? जानें क्यों हुआ तलाक और अब क्या कर रहीं दोनों एक्स पत्नियां
Aamir Khan Wedding: बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान न सिर्फ अपनी फिल्मों बल्कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहते हैं. जी हां, अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में देने वाले आमिर की पर्सनल लाइफ भी लंबे समय तक सुर्खियों में रही है. जी हां, आमिर खान जल्द ही अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी करने जा रहे हैं. वहीं आमिर खान ने अब तक दो शादियां की हैं और दोनों ही शादियां तलाक पर खत्म हुईं. हालांकि, तलाक के बाद भी उन्होंने अपनी दोनों एक्स पत्नियों के साथ सम्मानजनक रिश्ते बनाए रखे हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आमिर खान की पहली और दूसरी पत्नी कौन थीं, दोनों से उनका रिश्ता कैसे शुरू हुआ, तलाक की वजह क्या रही और आज उनकी एक्स वाइफ्स क्या कर रही हैं. तो आइए इस पूरे मामले को डिटेल में जानते हैं.
आमिर खान ने किससे की थी पहली शादी?
आमिर खान की पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी. दोनों की प्रेम कहानी बॉलीवुड की चर्चित लव स्टोरीज में गिनी जाती है. बताया जाता है कि आमिर और रीना एक-दूसरे के पड़ोसी थे और यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई थी. धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई. उस समय आमिर अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहे थे. परिवार की सहमति मिलने में मुश्किलें थीं, इसलिए दोनों ने साल 1986 में गुपचुप तरीके से शादी कर ली. बाद में परिवारों को इस रिश्ते की जानकारी दी गई और शादी को स्वीकार कर लिया गया. रीना दत्ता आमिर के संघर्ष के दिनों में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं. जब आमिर की फिल्म 'कयामत से कयामत तक' रिलीज हुई और उन्हें बड़ी सफलता मिली, तब भी रीना उनके जीवन का अहम हिस्सा थीं. शादी के बाद दोनों के दो बच्चे हुए बेटा जुनैद खान और बेटी आइरा खान.
16 साल बाद क्यों टूटी आमिर की पहली शादी?
आमिर खान और रीना दत्ता की शादी करीब 16 साल तक चली. लेकिन साल 2002 में दोनों ने तलाक लेने का फैसला किया. उस समय यह खबर फिल्म इंडस्ट्री के लिए काफी चौंकाने वाली थी क्योंकि दोनों को आदर्श कपल माना जाता था. हालांकि, आमिर और रीना ने कभी सार्वजनिक रूप से तलाक के पीछे किसी एक बड़ी वजह का खुलासा नहीं किया. मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाओं में कई तरह के कयास लगाए गए, लेकिन दोनों ने हमेशा निजी मामलों को सम्मानजनक तरीके से संभाला. आमिर ने कई इंटरव्यू में कहा कि रीना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं और वो उनका बहुत सम्मान करते हैं. तलाक के बाद बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर भी दोनों ने परिपक्वता दिखाई. दोनों ने मिलकर बच्चों की परवरिश की और पारिवारिक रिश्तों को बनाए रखा. आज भी कई पारिवारिक कार्यक्रमों में आमिर और रीना को साथ देखा जाता है.
तलाक के बाद क्या कर रहीं रीना दत्ता?
रीना दत्ता लंबे समय से लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं. हालांकि, वो समय-समय पर आमिर खान और अपने बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं. रीना ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी काम किया है और कुछ प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रही हैं. हाल के वर्षों में रीना दत्ता को बेटे जुनैद खान के करियर और बेटी आइरा खान के जीवन के महत्वपूर्ण मौकों पर परिवार के साथ देखा गया. वो सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखती हैं, लेकिन अपने परिवार के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं.
आमिर खान की दूसरी शादी
रीना दत्ता से तलाक के कुछ साल बाद आमिर खान की जिंदगी में किरण राव की एंट्री हुई. किरण राव फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हुई थीं और उन्होंने कई फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया था. बताया जाता है कि दोनों की नजदीकियां फिल्म 'लगान' के दौरान बढ़ीं. हालांकि, उस समय दोनों के बीच कोई प्रेम संबंध नहीं था. बाद में बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे.
साल 2005 में आमिर खान और किरण राव ने शादी कर ली. ये शादी बॉलीवुड की सबसे चर्चित शादियों में से एक थी. शादी के बाद दोनों को अक्सर एक मजबूत और समझदार जोड़ी के रूप में देखा गया. दोनों ने कई सामाजिक और क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम किया. साल 2011 में सरोगेसी के जरिए उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ. बेटे के जन्म के बाद परिवार और भी मजबूत नजर आया और लंबे समय तक दोनों की शादी सफल मानी जाती रही.
दूसरी शादी में क्यों आया अलगाव?
आमिर खान और किरण राव ने करीब 15 साल साथ रहने के बाद जुलाई 2021 में अलग होने की घोषणा की. दोनों ने जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर बताया कि वो पति-पत्नी के रूप में अलग हो रहे हैं, लेकिन अपने बेटे और काम के प्रति साझेदारी जारी रखेंगे. तलाक की घोषणा के दौरान भी दोनों ने किसी विवाद या आरोप-प्रत्यारोप की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं और आगे भी परिवार के रूप में जुड़े रहेंगे. तलाक के बाद भी आमिर और किरण कई मौकों पर साथ दिखाई दिए हैं. दोनों अपने बेटे आजाद की परवरिश मिलकर कर रहे हैं. इसके अलावा कई प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स में भी उनकी साझेदारी बनी हुई है.
आज क्या कर रही हैं किरण राव?
किरण राव फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखिका के रूप में सक्रिय हैं. उन्होंने फिल्म निर्माण और क्रिएटिव कार्यों में अपनी अलग पहचान बनाई है. सामाजिक मुद्दों पर भी उनकी रुचि रही है और वो कई अभियानों से जुड़ी रही हैं. हाल के वर्षों में किरण राव निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में ज्यादा एक्टिव दिखाई दी हैं. उनकी फिल्मों और क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स को समीक्षकों से सराहना मिलती रही है. तलाक के बाद भी उन्होंने अपने प्रोफेशनल जीवन पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है और इंडस्ट्री में लगातार काम कर रही हैं.
तलाक के बाद भी कायम है सम्मानजनक रिश्ता
आमिर खान की दोनों शादियां भले ही तलाक पर खत्म हुईं, लेकिन उनकी कहानी अन्य सेलिब्रिटी रिश्तों से काफी अलग मानी जाती है. आमिर, रीना दत्ता और किरण राव के बीच आज भी सम्मान और सौहार्द का रिश्ता देखने को मिलता है. कई बार परिवार से जुड़े आयोजनों में तीनों को एक साथ देखा गया है.
FAQ
Q1. आमिर खान की पहली पत्नी कौन थीं?
A. आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता थीं. दोनों ने साल 1986 में प्रेम विवाह किया था और उनके दो बच्चे जुनैद खान और आइरा खान हैं.
Q2. आमिर खान और रीना दत्ता का तलाक कब हुआ था?
A. आमिर खान और रीना दत्ता ने करीब 16 साल साथ रहने के बाद साल 2002 में तलाक लिया था.
Q3. आमिर खान की दूसरी पत्नी कौन थीं?
A. आमिर खान ने साल 2005 में फिल्ममेकर किरण राव से दूसरी शादी की थी. दोनों का एक बेटा आजाद राव खान है.
Q4. तलाक के बाद क्या आमिर और किरण राव साथ काम करते हैं?
A. हां, तलाक के बाद भी आमिर खान और किरण राव प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स और बेटे आजाद की परवरिश में साथ नजर आते हैं.
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आईएमईसी से भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी को मिलेगी नई ताकत, समृद्ध भविष्य का मार्ग बनेगा आर्थिक गलियारा
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) एक प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पहल है, जिसका उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के एकीकृत ढांचे के माध्यम से भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है। एक लेख के अनुसार, इस परियोजना को आंशिक रूप से चीन की वैश्विक बुनियादी ढांचा परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
सितंबर 2023 में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित जी20 समिट के दौरान आईएमईसी की घोषणा की गई थी। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट में प्रकाशित लेख के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाला एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला नेटवर्क तैयार करना है।
यह गलियारा वस्तुओं, ऊर्जा और डेटा के परिवहन के लिए विकसित किया जाएगा, जिससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और स्वेज नहर पर निर्भरता कम हो सकेगी। प्रस्तावित परियोजना के तहत आधुनिक बंदरगाह, एकीकृत ऊर्जा ग्रिड, रेल नेटवर्क और समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबलें शामिल होंगी। इससे व्यापार, ऊर्जा और डेटा ट्रांसमिशन के लिए एक अधिक प्रभावी और तेज वैकल्पिक मार्ग तैयार होगा।
आईएमईसी के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता देशों में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, इजरायल, जॉर्डन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। वहीं कतर, ओमान, तुर्की, इराक और ईरान इस पहल का हिस्सा नहीं हैं।
लेख में कहा गया है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण फिलहाल आईएमईसी परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि, परियोजना की घोषणा के करीब ढाई साल बाद इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे आईएमईसी हो या कोई अन्य प्रतिस्पर्धी परियोजना, क्षेत्रीय देश भविष्य में अधिक जुड़ा हुआ और समृद्ध आर्थिक ढांचा बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर काम जारी रखेंगे।
लेख में कहा गया है कि 2021 में स्वेज नहर में जहाज फंसने की घटना और 2023 के अंत से लाल सागर क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने वैश्विक व्यापार मार्गों की कमजोरियों को उजागर किया है। आईएमईसी इन चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकता है।
इस गलियारे के जरिए भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने का समय काफी कम हो सकता है, जिससे परिवहन लागत में लगभग 30 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है।
हालांकि यह परियोजना मुख्य रूप से परिवहन नेटवर्क पर आधारित है, लेकिन इसके सबसे बड़े लाभ ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में देखने को मिल सकते हैं। इस मार्ग के साथ बिछाई जाने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबलें बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में मौजूद डेटा ट्रैफिक की बाधाओं को कम करेंगी और भारत के बढ़ते डिजिटल क्षेत्र को अतिरिक्त क्षमता प्रदान करेंगी।
इसके अलावा, आईएमईसी क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत कर अमेरिका के रणनीतिक हितों को भी बढ़ावा देगा और अब्राहम समझौते के तहत शुरू हुई सामान्यीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
लेख में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तकनीकी और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष जोर दिया है। ऐसे में आईएमईसी के फाइबर-ऑप्टिक और ऊर्जा नेटवर्क केवल अतिरिक्त सुविधा नहीं हैं, बल्कि यही इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं।
भारत वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत डेटा उत्पन्न करता है, लेकिन उसके पास दुनिया की कुल डेटा सेंटर क्षमता का केवल लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा है। इस अंतर को कम करने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक और समुद्र के नीचे केबल नेटवर्क में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
भारत की बड़ी औद्योगिक कंपनियां पहले से ही खाड़ी देशों के साथ बंदरगाह, रेलवे और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग करती रही हैं। वर्तमान समय में तकनीक और सेमीकंडक्टर उद्योग भारत-खाड़ी संबंधों का प्रमुख केंद्र बन गए हैं।
लेख के अनुसार, आईएमईसी के तहत बिछाई जाने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबलें यूरोप, खाड़ी देशों और भारत के बीच अत्यधिक क्षमता, कम विलंबता (लो-लेटेंसी) और तेज डेटा ट्रांसमिशन उपलब्ध कराएंगी। ऐसे समय में जब डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है, यह परियोजना भारत के डिजिटल और आर्थिक विकास को नई गति दे सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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