Explainer: क्या है 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम, जिसे वापस ले रही दिल्ली सरकार, क्यों उठे इस योजना पर सवाल?
Explainer: दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी की आवासीय और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ‘फ्लरिश स्टे बीएंडबी’ में लगी आग में 21 लोगों की मौत के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उस ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B) योजना की हो रही है, जिसके तहत यह प्रतिष्ठान संचालित हो रहा था. हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस योजना को वापस लेने और इसके तहत लाइसेंस प्राप्त सभी प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच कराने जा रही है.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह योजना क्या थी, इसे शुरू करने का उद्देश्य क्या था और अब इसे लेकर विवाद क्यों खड़ा हो गया है?
क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) योजना?
बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना मूल रूप से पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का अवसर देने के लिए बनाई गई थी. इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपने घर के एक या अधिक कमरों को पर्यटकों या यात्रियों को किराए पर दे सकता था.
इस मॉडल में मेहमानों को होटल जैसा माहौल नहीं, बल्कि स्थानीय परिवार के साथ रहने का अनुभव मिलता है. यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में यह व्यवस्था लोकप्रिय रही है. दिल्ली में भी इसे पर्यटन को बढ़ावा देने के एक विकल्प के रूप में देखा गया था. हालांकि, इसके लिए कई नियम और शर्तें निर्धारित थीं. मकान मालिक को संबंधित विभागों से अनुमति लेनी होती थी और सुरक्षा सहित अन्य मानकों का पालन करना अनिवार्य था.
कब शुरू हुई थी यह योजना?
दिल्ली में यह योजना वर्ष 2007 में शुरू की गई थी। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं. सरकार का उद्देश्य था कि राजधानी आने वाले पर्यटकों को कम खर्च में बेहतर आवास उपलब्ध कराया जाए.
हालांकि शुरुआती वर्षों में योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. बाद के वर्षों में भी यह सीमित स्तर पर ही संचालित होती रही. वर्ष 2023 तक इस योजना के तहत लगभग 432 मकान पंजीकृत थे, जिनमें 2,200 से अधिक कमरे शामिल थे.
नई सरकार क्या बदलाव करने जा रही थी?
दिल्ली सरकार ने 26 मई 2026 को इस योजना का नया मसौदा जारी किया था. इसका मकसद व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बनाना था. नए ड्राफ्ट में बीएंडबी इकाइयों को दो श्रेणियों गोल्ड और सिल्वर में बांटने का प्रस्ताव रखा गया था.
गोल्ड श्रेणी
- न्यूनतम 120 वर्ग फुट का कमरा
- बेहतर फर्नीचर और सुविधाएं
- उच्च स्तर की स्वच्छता और सुरक्षा
सिल्वर श्रेणी
- न्यूनतम 100 वर्ग फुट का कमरा
- बुनियादी सुविधाएं
- निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन
सरकार अधिकतम आठ कमरों और 16 बिस्तरों तक की अनुमति देने पर विचार कर रही थी.
सुरक्षा को लेकर क्या थे नियम?
इसके तहत:
- प्रत्येक अतिथि का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य था.
- पुलिस सत्यापन जरूरी था.
- विदेशी मेहमानों से जुड़े नियमों का पालन करना होता.
- आग बुझाने वाले यंत्र उपलब्ध होना अनिवार्य था.
- प्राथमिक उपचार किट रखना जरूरी था.
- आपातकालीन संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती.
- सीसीटीवी कैमरे केवल प्रवेश द्वार और सार्वजनिक क्षेत्रों में लगाने की अनुमति थी.
इसके अलावा नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने की भी शर्त रखी गई थी.
फिर विवाद क्यों खड़ा हुआ?
मालवीय नगर अग्निकांड के बाद जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरी योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए. प्रारंभिक जांच के अनुसार, जिस फ्लरिश स्टे को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, वहां कथित तौर पर 20 से अधिक कमरे बनाए गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक यह संख्या स्वीकृत क्षमता से लगभग चार गुना अधिक थी.
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि प्रतिष्ठान के पास अनिवार्य अग्निशमन एनओसी नहीं थी. यानी कागजों पर कुछ और था और वास्तविक संचालन कुछ और.
क्या यह केवल एक होटल की गलती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक प्रतिष्ठान की लापरवाही का मामला नहीं है. यह निगरानी और निरीक्षण प्रणाली की भी परीक्षा है. यदि किसी प्रतिष्ठान को छह कमरों की अनुमति थी और वह वर्षों तक कई गुना अधिक क्षमता के साथ संचालित होता रहा, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की. इसी वजह से अब सरकार सभी पंजीकृत बीएंडबी इकाइयों की जांच कराने की तैयारी में है.
सरकार का अगला कदम क्या होगा?
दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि सरकार आधिकारिक रूप से इस योजना को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी. उन्होंने कहा है कि...
- सभी लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों की जांच होगी.
- नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस रद्द किए जाएंगे.
- स्वीकृत सीमा से अधिक कमरे संचालित करने वालों पर कार्रवाई होगी.
- सुरक्षा मानकों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
क्या योजना पूरी तरह बंद हो जाएगी?
यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. सरकार के सामने दो विकल्प हैं या तो मौजूदा स्वरूप में योजना समाप्त कर दी जाए, या फिर इसे और अधिक कठोर नियमों के साथ दोबारा लागू किया जाए. पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि बीएंडबी मॉडल अपने आप में गलत नहीं है. दुनिया भर में यह सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है. समस्या तब पैदा होती है जब नियमों का पालन नहीं होता और निगरानी कमजोर पड़ जाती है.
कुल मिलाकर मालवीय नगर अग्निकांड ने केवल एक होटल की सुरक्षा खामियों को उजागर नहीं किया, बल्कि दिल्ली की बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. वर्ष 2007 में पर्यटन और स्थानीय आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है.
आने वाले दिनों में सरकार की जांच और रिपोर्टें तय करेंगी कि बीएंडबी मॉडल दिल्ली में जारी रहेगा या इतिहास का हिस्सा बन जाएगा. फिलहाल इतना तय है कि इस हादसे ने सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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