Fashion Face-off: कंगना की शाही साड़ियां या विद्या की क्लासी पसंद, किसे मिलेंगे ज्यादा नंबर?
Kangana vs Vidya: साड़ी सिर्फ एक आउटफिट नहीं, बल्कि पर्सनैलिटी का आईना भी होती है। कंगना रनौत और विद्या बालन दोनों इसे अलग अंदाज में पहनती हैं। एक का स्टाइल रॉयल है, तो दूसरी की खूबसूरती सादगी में नजर आती है।
आवारा कुत्ते के लिए भिड़े दो देश:मेक्सिको ने इसे अपना बताया, ब्राजील में नाराजगी; 300 नस्लों से मिलकर बना कैरामेलो डॉग
ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कैरामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कैरामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत। मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कैरामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से कैरामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है। कैरामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था। ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश कैरामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को 'कैरामेलो' कहा जाता है। 2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कैरामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए। इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कैरामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है। इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए। 100 साल में विकसित हुआ कैरामेलो शोध के अनुसार कैरामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए। 1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए। शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कैरामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए। मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कैरामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है। मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है। उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कैरामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है। गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कैरामेलो कुत्ते ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं। कई कैरामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है कैरामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते। एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कैरामेलो हैं। जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कैरामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे।
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