IPO News: खराब क्वॉलिटी के इस IPO ने निवेशकों को किया बर्बाद, अब कंपनी के एमडी और सीईओ ने भी दिया इस्तीफा
IPO News: 3 साल पहले यह आईपीओ आया था। यह कंपनी बफेलो मीट एक्सपोर्ट करने के कामकाज में है। यह पूरी तरह से एक्सपोर्ट पर निर्भर है। कंपनी का आईपीओ इश्यू 480 करोड़ रुपए का था। इसका फ्रेश इशू साइज 150 करोड़ रुपए था। इसका मतलब है कि 330 करोड़ रुपए यानी आईपीओ का तकरीबन 70% हिस्सा ओएफएस का था जो सीधे प्रमोटरों की जेब में चला गया
Explainer: 'कॉकरोच' कहे जाने से जन्मी पार्टी, क्या CJP बनेगी युवाओं के गुस्से की नई आवाज या इंटरनेट का एक और ट्रेंड?
Cockroach Janta Party Explained: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 6 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की घोषणा की है. वहीं, 3 जून को CJP ने अपनी पार्टी की बात समर्थकों, मीडिया और अन्य लोगों तक पहुंचाने के लिए तीन आधिकारिक प्रवक्ताओं की घोषणा की है. अब यहां बड़ा सवाल ये उठता है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी से जन्मी ये पार्टी क्या सच में ही देश में नया आंदोलन खड़ा करने वाली है, क्या ये पार्टी देश में बदलाव की नई चिंगारी पैदा करेगी?
राजनीतिक विशलेषकों का कहना है कि सोशल मीडिया से जन्मी पार्टी और आंदोलन के सामने सबसे बड़ी परीक्षा ये रहती है कि जब नेटवर्क की रोशनी बुझती है तो जमीन पर ऐसे संगठन का कोई अस्तित्व नहीं मिलता. यही वजह है कि CJP के लिए असली इम्तिहान अभी बाकी है और अभी पार्टी के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी.
Sonam Wangchuk is set to join the peaceful protest led by Cockroach Janta Party at Jantar Mantar, New Delhi on June 6.
— Cockroach Janta Party (@CJP_is_back) June 2, 2026
Supporters and “Cockroaches” are being urged to participate in large numbers and strengthen the movement.
The message from the campaign remains clear: come… pic.twitter.com/7RSzjniZwE
पहले जानें वो एक टिप्पणी जिससे जन्मी ये पार्टी, अब तक क्या-क्या हुआ...
जानकारी के अनुसार 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की कोर्ट में फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई चल रही थी. इस दौरान एक पक्ष को सुनते हुए भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ बेरोजगार युवा "कॉकरोच" की तरह हैं जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता और वे मीडिया, RTI और सोशल मीडिया के जरिए सभी पर हमला करते हैं. हालांकि उनकी ये टिप्पणी जब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई तो बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह टिप्पणी फर्जी डिग्री वालों के लिए थी न कि आम बेरोजगार युवाओं के लिए. लेकिन तब तक कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हो चुका था.
चंद घंटों में मुहिम का हिस्सा बने लाखों युवा, सोशल मीडिया पर करने लगा था ट्रेंड
जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर की पढ़ाई कर रहे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक छोटा सा सवाल पोस्ट किया जो था "क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?" इसके बाद तो मानों सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया. बता दें दीपके ने उसी दिन एक वेबसाइट और गूगल फॉर्म लाइव कर दिया और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) बनाई. इसके पांच दिन के भीतर इसके इंस्टाग्राम पर 90 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए. X पर एक लाख से अधिक लोग इसे फॉलो करने लगे और देश-विदेश के मीडिया में CJP की चर्चा होने लगी.
???? Attention All Cockroaches ????
— Cockroach Janta Party (@CJP_is_back) June 4, 2026
You are invited to attend a Press Conference today, 4 June, at 1:30 PM at the Indian Women's Press Corps, New Delhi.
CJP spokespersons Saurav Das, Ashutosh Ranka, and Vijeta Dahiya will address the media on the ongoing education crisis, the… pic.twitter.com/2mK1bA8o68
अरविंद केजरीवाल से जुड़ा नाम, वायरल होने लगीं दीपके की पुरानी तस्वीरें
हो हल्ला मचने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से पुराना नाता होने की बात सामने आई. रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपके ने 2020 से 2022 के बीच AAP के सोशल मीडिया और चुनावी अभियान से जुड़कर काम किया था. मनीष सिसोदिया के साथ उनकी पुरानी तस्वीर भी वायरल हुई. लेकिन दीपके ने CJP को पूरी तरह स्वतंत्र आंदोलन बताया और किसी पार्टी से संबंध होने की बात से इनकार किया. बता दें दीपके महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और पढ़ाई के लिए अमेरिका गए हुए हैं, जो अब 6 जून को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए इंडिया आ सकते हैं.
पहले भी बन चुकी हैं अजीब नाम की ऐसी पार्टियां, जानें अब उनका क्या हाल...
जानकारी के अनुसार भारतीय लोकतंत्र में व्यंग्यात्मक या अजीबोगरीब नाम वाली पार्टियां कोई नई बात नहीं हैं. इंडियन लवर्स पार्टी, रायता भारत, देवता दल, अंजान आदमी पार्टी, गरीब बेरोजगार विकास पार्टी ऐसी सैकड़ों पार्टियां चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं. इनमें से ज्यादातर का हश्र यही हुआ कि वे कुछ चुनावों में उम्मीदवार उतारने के बाद खामोश हो गईं. न जमानत राशि वापस मिली, न कोई खास जनाधार बना.
CJP ने जानबूझकर अपनी पार्टी का ब्यौरा रखा व्यंग्यात्मक, ये "आलसी, बेरोजगा और पुरानी सोच वाले नागरिकों कौन?
CJP ने जानबूझकर अपनी पार्टी का ब्यौरा व्यंग्यात्मक रखा है. बता दें पार्टी खुद को "आलसियों, बेरोजगारों और पुरानी सोच वाले नागरिकों" का प्रतिनिधित्व करने वाली बताया है. वह सोशल मीडिया पर NEET पेपर लीक, CUET और CBSE परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बढ़ती बेरोजगारी और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर आवाज उठा रही है. पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का केंद्र बनाया है. हाल ही में पार्टी ने सौरव दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया है. सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी प्रदर्शन में साथ देने का ऐलान किया है.
???? Attention All Cockroaches ????
— Cockroach Janta Party (@CJP_is_back) June 4, 2026
Today is not just a press conference — it’s a moment to raise the voice of students and demand accountability.
Join us on 4 June | 1:30 PM at Indian Women’s Press Corps, New Delhi.
CJP spokespersons Saurav Das, Ashutosh Ranka, and Vijeta Dahiya… pic.twitter.com/oUhMiG7tgL
ये भी जानें कि राजनीतिक पार्टी बनाने से पहले क्या है जरूरी?
जानकारी के अनुसार CJP अभी तक कानूनी रूप से कोई राजनीतिक दल नहीं है. लेकिन अगर भविष्य में यह कदम उठाया जाए, तो प्रक्रिया क्या होगी? बता दें भारत में कोई भी राजनीतिक दल जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकरण करा सकता है. इसके लिए जरूरी है पार्टी के गठन के 30 दिनों के भीतर आयोग को आवेदन भेजना होता है. इस समय सीमा के बाद आवेदन स्वतः अमान्य हो जाता है. आवेदन के साथ पार्टी का संविधान, नियम, सिद्धांतों की प्रति और भारत के संविधान के प्रति निष्ठा का शपथपत्र देना होता है. पार्टी का नाम किसी पहले से मौजूद पंजीकृत दल से मिलता-जुलता नहीं होना चाहिए. बता दें पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त दल चुनाव तो लड़ सकते हैं, लेकिन उनका कोई आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं होता. वे चुनाव आयोग द्वारा जारी मुक्त चिह्नों में से चुनते हैं.
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