Khaskhas Halwa: दिमाग में तरावट ला देगा खसखस का हलवा! इस तरीके बनाएं, स्वाद के साथ मिलेंगे कई फायदे
Khaskhas Halwa: खसखस का हलवा भारतीय घरों की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। छोटे-छोटे खसखस के दानों से तैयार होने वाला यह हलवा स्वाद में भरपूर होने के साथ-साथ ऊर्जा और कुछ जरूरी पोषक तत्व भी देता है। खसखस में वसा, प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे सीमित मात्रा में संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अगर आपको मीठा पसंद है और घर पर कुछ अलग बनाना चाहते हैं तो खसखस का हलवा अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे बनाने के लिए खसखस को भिगोकर पीसा जाता है और फिर घी, दूध तथा ड्राई फ्रूट्स के साथ पकाया जाता है। हालांकि यह कैलोरी से भरपूर व्यंजन है, इसलिए इसे स्वाद और पोषण के लिए सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है।
खसखस हलवा बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप खसखस
- 3 से 4 बड़े चम्मच देसी घी
- 1 कप दूध
- आधा कप चीनी या स्वादानुसार
- 2 बड़े चम्मच मावा
- 8-10 बादाम
- 8-10 काजू
- 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर
- थोड़े से पिस्ता और किशमिश
खसखस हलवा बनाने का तरीका
पहले खसखस को करें तैयार
खसखस को साफ करके अच्छी तरह धो लें और करीब 4 से 5 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद अतिरिक्त पानी निकालकर खसखस को मिक्सर में पीस लें। इसे बहुत ज्यादा बारीक पेस्ट करने की जरूरत नहीं है। हल्का दरदरा पेस्ट हलवे को अच्छा टेक्सचर देता है।
ऐसे पकाएं खसखस का हलवा
कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें खसखस का पेस्ट डाल दें। इसे धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। खसखस का कच्चापन दूर होने और हल्की खुशबू आने तक इसे पकाना जरूरी है। जल्दबाजी में तेज आंच पर भूनने से पेस्ट कड़ाही में चिपक सकता है।
अब इसमें दूध डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को धीमी आंच पर पकने दें और बीच-बीच में चलाते रहें। जब दूध काफी हद तक सूख जाए और मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब मावा और चीनी डालें। चीनी घुलने के बाद हलवा फिर से थोड़ा पतला होगा, इसलिए इसे तब तक पकाएं जब तक यह कड़ाही छोड़ने न लगे।
ड्राई फ्रूट्स और इलायची से बढ़ाएं स्वाद
अब कटे हुए बादाम, काजू, पिस्ता और किशमिश डालें। आखिर में इलायची पाउडर मिलाकर गैस बंद कर दें। गर्मागर्म खसखस का हलवा परोसें। ऊपर से थोड़े ड्राई फ्रूट्स डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो जाते हैं।
खसखस के हलवे से मिल सकते हैं ये फायदे
ऊर्जा देने में मददगार
घी, दूध, खसखस और ड्राई फ्रूट्स की वजह से यह हलवा ऊर्जा और कैलोरी से भरपूर होता है। इसलिए इसे थोड़ी मात्रा में खाने से डाइट में ऊर्जा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। खासकर शारीरिक मेहनत वाले दिन इसे संतुलित मात्रा में लिया जा सकता है।
कैल्शियम का स्रोत
खसखस में कैल्शियम पाया जाता है, जबकि दूध भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। शरीर को पर्याप्त कैल्शियम हड्डियों और दांतों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। हालांकि केवल खसखस का हलवा कैल्शियम की पूरी जरूरत पूरी नहीं करता।
फाइबर से भरपूर
खसखस में आहार फाइबर मौजूद होता है। संतुलित डाइट में फाइबर शामिल करने से पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में हलवा खाने से कैलोरी और शुगर का सेवन भी बढ़ सकता है।
प्रोटीन भी देता है
खसखस और दूध में प्रोटीन पाया जाता है। प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों समेत कई ऊतकों के निर्माण और रखरखाव के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसलिए यह हलवा संतुलित भोजन का एक छोटा हिस्सा हो सकता है।
हेल्दी फैट और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स
खसखस और ड्राई फ्रूट्स में वसा के साथ कई सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए तो ये रोजाना की डाइट में विविधता और पोषण जोड़ सकते हैं।
स्वाद के साथ मूड फ्रेश करने वाला डेजर्ट
गर्मागर्म हलवे की खुशबू और स्वाद मन को अच्छा महसूस करा सकते हैं। हालांकि इसे सीधे तौर पर दिमाग की थकान दूर करने या किसी मानसिक समस्या का इलाज मानना सही नहीं है। पर्याप्त नींद, पानी, संतुलित आहार और नियमित गतिविधि मानसिक ताजगी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Jamun Plantation Tips: घर के आंगन, बड़े गमले या किचन गार्डन में अगर कोई ऐसा फलदार पौधा लगाना चाहते हैं जो लंबे समय तक साथ दे, तो जामुन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जामुन का पेड़ गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है और एक बार ठीक से स्थापित होने के बाद ज्यादा नखरे नहीं करता। हालांकि शुरुआत में पौधे की जगह, मिट्टी, पानी और धूप का सही ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
जामुन का पौधा लगाने के लिए बीज के बजाय अच्छी नर्सरी से स्वस्थ पौधा लेना ज्यादा सुविधाजनक रहता है। सही देखभाल मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ सकता है और कुछ वर्षों बाद फल देना शुरू कर सकता है। अगर आप घर पर जामुन उगाने की तैयारी कर रहे हैं, तो प्लांटेशन से लेकर सिंचाई और खाद तक इन बातों का ध्यान रखें।
जामुन उगाने और देखभाल के टिप्स
सही जगह का करें चुनाव
जामुन का पौधा लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां पर्याप्त धूप आती हो। पौधे को रोजाना कई घंटे सीधी धूप मिलने से उसकी ग्रोथ बेहतर हो सकती है। अगर जमीन में लगा रहे हैं तो दीवार, पाइप या दूसरी संरचनाओं से पर्याप्त दूरी रखें, क्योंकि जामुन का पेड़ समय के साथ काफी बड़ा हो सकता है।
कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
जामुन के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें पानी आसानी से निकल सके। बहुत ज्यादा पानी जमा रहने वाली मिट्टी जड़ों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाएं। इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और पौधे को शुरुआती पोषण मिल सकता है।
ऐसे करें जामुन के पौधे की प्लांटेशन
जमीन में पौधा लगाने के लिए उसकी जड़ के आकार से थोड़ा बड़ा गड्ढा तैयार करें। इसमें मिट्टी और कंपोस्ट का मिश्रण डालकर पौधे को सावधानी से लगाएं। पौधे की जड़ों को मोड़ें नहीं और लगाने के बाद आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबा दें। इसके बाद पर्याप्त पानी दें, लेकिन मिट्टी को लगातार दलदली न रहने दें।
अगर गमले में जामुन उगाना चाहते हैं तो बड़ा और मजबूत कंटेनर चुनना जरूरी है। ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए पर्याप्त ड्रेनेज होल जरूर हों। पौधा बढ़ने के साथ जरूरत पड़ने पर इसे बड़े कंटेनर में शिफ्ट किया जा सकता है।
शुरुआत में सिंचाई का रखें खास ध्यान
नए लगाए गए पौधे को शुरुआत में नियमित पानी की जरूरत होती है। लेकिन हर बार पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत की नमी जरूर जांचें। अगर मिट्टी पहले से गीली है तो तुरंत पानी न दें। पौधा अच्छी तरह स्थापित होने के बाद उसकी पानी की जरूरत मौसम और मिट्टी के अनुसार बदल सकती है।
खाद और प्रूनिंग से मिलेगी अच्छी ग्रोथ
पौधे की बढ़त के लिए समय-समय पर जैविक कंपोस्ट या दूसरी उपयुक्त खाद दी जा सकती है। बहुत ज्यादा खाद देने से बचें। पौधे की सूखी, कमजोर या आपस में रगड़ खाने वाली शाखाओं को समय-समय पर हटाने से उसका आकार व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
फल आने में कितना समय लग सकता है?
जामुन के पौधे में फल आने का समय उसकी किस्म, पौधे की उम्र, मौसम और देखभाल पर निर्भर करता है। बीज से तैयार पौधों को फल देने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है, जबकि अच्छी नर्सरी से लिया गया ग्राफ्टेड या उपयुक्त किस्म का पौधा जल्दी फल दे सकता है। इसलिए पौधा खरीदते समय उसकी किस्म और फल देने की संभावित अवधि की जानकारी जरूर लें।
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लेखक: (कीर्ति)
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