‘कपड़े हो गए छोटे, तो शर्म कहां से आए?’ वाली कॉन्टेंट क्रिएटर Anita Bishnoi ने खाया जहर, अस्पताल में भर्ती
सोशल मीडिया पर होने वाली मानसिक प्रताड़ना और 'साइबर बुलिंग' का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। राजस्थान की मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर अनीता बिश्नोई ने बुधवार को कथित तौर पर कोई जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत जोधपुर के मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अनीता के परिजनों का आरोप है कि वह पिछले कई हफ्तों से सोशल मीडिया पर हो रही लगातार ट्रोलिंग, भद्दे कमेंट्स और व्यक्तिगत उत्पीड़न के कारण गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही थीं।
राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर वीडियो बनाने के लिए जानी जाने वाली ‘कंटेंट क्रिएटर’ अनीता बिश्नोई को बनार पुलिस थाना क्षेत्र स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, बिश्नोई ने कथित तौर पर घर पर कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। यह घटना बिश्नोई द्वारा सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करने के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे उनके सोशल मीडिया फॉलोअर और रिश्तेदारों में चिंता पैदा हो गई।
अपने पोस्ट में, बिश्नोई ने संकेत दिया कि शायद वह फिर कभी दिखाई न दें। बिश्नोई के फेसबुक पर करीब 13 लाख और इंस्टाग्राम पर 6.45 लाख से अधिक फॉलोअर हैं। उनके पति दिनाराम ने आरोप लगाया कि बिश्नोई को हफ्तों से सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ रहा था। उनके पति के अनुसार, महिलाओं के पहनावे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक वीडियो पोस्ट करने के बाद उनकी आलोचना और बढ़ गई। साथ ही कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और साथी इन्फ्लुएंसर की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
दिनाराम ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से बिश्नोई को निशाना बना रहे थे, जिससे वह काफी तनाव में थीं। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियों के माध्यम से उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे थे। अस्पताल में भर्ती बिश्नोई की हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अभी तक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
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मूवी रिव्यू- पेड्डी:पहचान की लड़ाई को दमदार अंदाज में दिखाती है फिल्म, राम चरण के करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस, फर्स्ट हाफ स्लो, लेकिन कहानी असरदार
स्टार- 3.5/5 रनटाइम- 3 घंटे 8 मिनट कास्ट- राम चरण, जान्हवी कपूर, जगपति बाबू कई बार कुछ फिल्में कहानी से ज्यादा अपने जज्बातों के लिए याद रखी जाती हैं। पेड्डी भी ऐसी ही फिल्म है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज है जिनकी मौजूदगी तक सरकारी कागजों में दर्ज नहीं है। राम चरण और निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने एक बड़े व्यावसायिक कैनवास पर पहचान, सम्मान और हक की लड़ाई को पेश करने की कोशिश की है। फिल्म हर मोड़ पर परफेक्ट नहीं है, लेकिन जब यह दिल पर वार करती है तो असर छोड़ जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? विजयनगरम जिले की पहाड़ियों के नीचे बसा एक गांव ऐसा है जिसका कोई सरकारी अस्तित्व नहीं है। वहां रहने वाले लोगों के पास पहचान नहीं, वोट देने का अधिकार नहीं और बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। पेड्डी इसी गांव का रहने वाला युवक है। वह गुड़ की फैक्ट्री में काम करता है और स्थानीय क्रिकेट मैचों में पैसे लेकर खेलने जाता है। गांव के बुजुर्ग अप्पलासूरी सालों से अपने गांव के लिए रेलवे स्टेशन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। एक दर्दनाक घटना के बाद पेड्डी इस लड़ाई को अपना मिशन बना लेता है। क्रिकेट से शुरू हुआ उसका सफर कुश्ती और फिर एथलेटिक्स तक पहुंचता है। सवाल सिर्फ एक रेलवे स्टेशन का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे गांव को पहचान दिलाने का बन जाता है। पेड्डी इस लड़ाई को कैसे अंजाम देता है, यही फिल्म की मुख्य कहानी है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? राम चरण ने अपने करियर की सबसे परिपक्व और समर्पित परफॉर्मेंस दी है। उनका शारीरिक बदलाव, अलग बोली पर पकड़ और भावनात्मक दृश्यों में दिखाई गई ईमानदारी प्रभावित करती है। खासकर दूसरे हिस्से में उनका अभिनय कई जगह आंखें नम कर देता है। शिव राजकुमार सीमित लेकिन प्रभावी भूमिका में नजर आते हैं। उनके और राम चरण के बीच गुरु शिष्य वाला रिश्ता फिल्म की बड़ी ताकत बनकर उभरता है। जगपति बाबू ने अपने किरदार में भावनात्मक गहराई लाने की कोशिश की है। हालांकि कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगते हैं। जाह्नवी कपूर के हिस्से में ज्यादा कुछ करने को नहीं है। उनका किरदार कहानी के मुख्य मुद्दे से लगभग कटा हुआ महसूस होता है। एक मजबूत भूमिका बनने की संभावना थी, लेकिन लेखन ने उन्हें सिर्फ प्रेम कहानी तक सीमित कर दिया। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? बुच्ची बाबू सना की सबसे बड़ी ताकत भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करना है। फिल्म का मूल विचार बेहद दमदार है और दूसरे हिस्से में निर्देशक इस विचार को मजबूती से पकड़कर रखते हैं। कुश्ती वाले दृश्य और अंतिम आधा घंटा फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा है। हालांकि पहले हिस्से में कहानी कई बार भटकती है। रोमांस और कुछ व्यावसायिक मसाला दृश्य फिल्म की रफ्तार को धीमा करते हैं। तीन घंटे से ज्यादा की अवधि भी कुछ जगह महसूस होती है। तकनीकी पक्ष मजबूत है। रत्नवेलु की सिनेमैटोग्राफी गांव, खेल के मैदान और भावनात्मक दृश्यों को खूबसूरती से कैद करती है। प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म को वास्तविकता के करीब रखता है। हालांकि कुछ दृश्य प्रभाव अपेक्षित स्तर के नहीं लगते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? ए आर रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा है। गाने कहानी का हिस्सा बनकर आते हैं और पृष्ठभूमि संगीत कई दृश्यों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। खासकर भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्यों में उनका काम फिल्म को ऊंचाई देता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? पेड्डी एक ऐसी फिल्म है जो तर्क से ज्यादा भावनाओं के सहारे चलती है। इसमें कई कमियां हैं, कुछ सवाल भी अनुत्तरित रह जाते हैं, लेकिन फिल्म का दिल सही जगह पर है। राम चरण का शानदार अभिनय, दमदार क्लाइमैक्स और पहचान की लड़ाई पर आधारित भावनात्मक कहानी इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको खेल, संघर्ष और इंसानी जज्बातों से जुड़ी कहानियां पसंद हैं तो पेड्डी आपको निराश नहीं करेगी।
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