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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, सात और बच्चों की मौत; मृतकों की संख्या 600 के पार

ढाका, 3 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। बुधवार को इस बीमारी से सात और बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद 15 मार्च से अब तक खसरे से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 601 पहुंच गई है।

बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, बुधवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में ये मौतें दर्ज की गईं। ताजा सातों मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, अब तक खसरे से 90 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 511 मौतों को संदिग्ध माना गया है।

पिछले 24 घंटों में 1,210 नए संदिग्ध मामलों की पहचान हुई, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 74,572 हो गई है। वहीं, 55 नए पुष्ट मामले सामने आने के बाद कुल पुष्ट मामलों की संख्या 9,191 तक पहुंच गई है।

देश में स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है। केवल मई महीने में ही खसरे और उससे जुड़े लक्षणों के कारण 309 लोगों की मौत दर्ज की गई। यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा चलाया गया डेढ़ महीने का विशेष खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान 20 मई को अपने प्रारंभिक चरण में समाप्त हो चुका है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मई महीने में अधिकांश दिनों में प्रतिदिन 1,000 से अधिक नए मामले सामने आए। केवल 9, 16 और 23 मई को यह संख्या 1,000 से कम रही।

इस बीच, मई में यूनिसेफ ने खुलासा किया था कि उसने देश की तत्कालीन अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे, को वैक्सीन की कमी को लेकर कई बार चेतावनी दी थी। यूनिसेफ के बांग्लादेश प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने बताया कि 2024 से ही स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्रों और बैठकों के माध्यम से आगाह किया जा रहा था कि टीकों की कमी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।

राना फ्लावर्स के अनुसार, यूनिसेफ ने इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय को पांच से छह पत्र भेजे और 10 अलग-अलग बैठकों में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 2024 से 2026 तक लगातार सरकार को सूचित किया गया कि वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समय रहते ऑर्डर देना आवश्यक है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टेड चैबन ने अगस्त 2025 में बांग्लादेश दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ बैठक में वैक्सीन संकट का मुद्दा उठाया था।

राना फ्लावर्स ने कहा कि वर्तमान में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा खसरा प्रकोप की जांच कराई जा रही है और यूनिसेफ इस जांच में सहयोग के लिए आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध कराएगा।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Delhi Malviya Nagar Hotel Fire Accident: कैसे हो गया इतना बड़ा हादसा? ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए सच्चाई

Delhi Malviya Nagar Hotel Fire Accident: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इमारत का कभी फायर विभाग ने निरीक्षण नहीं किया. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस जगह आग लगी, वह कानूनी रूप से होटल ही नहीं थी. बताया जा रहा है कि पिछले पांच साल से यह इमारत अवैध रूप से बीएनबी और होटल की तरह संचालित की जा रही थी. जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक थी. ऐसे में फायर सेफ्टी क्लीयरेंस और एनओसी लेना अनिवार्य था. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मालिक की ओर से जरूरी जानकारी नहीं दी गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला. इसी वजह से इस बिल्डिंग को कभी फायर सेफ्टी एनओसी जारी नहीं की गई थी. अब पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं.

बिना लाइसेंस चल रहा था कारोबार

जानकारी के मुताबिक, इमारत के पास न होटल चलाने का लाइसेंस था, न फायर एनओसी और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था. पहले यहां रेस्टोरेंट बनाया गया और बाद में कमरों को किराए पर देना शुरू कर दिया गया. आग से बचाव के लिए कोई उचित व्यवस्था भी मौजूद नहीं थी.

कई लोग जिंदगी की जंग लड़ रहे

मैक्स अस्पताल के अनुसार, आग लगने के बाद 39 लोगों को भर्ती कराया गया था. इनमें 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 8 मरीज अभी भी वेंटिलेटर पर हैं. घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और अवैध निर्माणों पर निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यह भी पढ़ें- मालवीय नगर अग्निकांड: होटल मालिक लवकेश बजाज की हुई गिरफ्तारी, हादसे के बाद से चल रहा था फरार

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